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शबे कद्र की रात
Updated Sun, 10 Jun 2018 02:12 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
माह-ए-रमजान की 25वीं रात को शनिवार को रोजेदारों ने पूरी रात अल्लाह की इबादत कर शबे कद्र की तलाश की। इस दौरान रोजेदारों ने गिड़गिड़ाकर अपने गुनाहों से तौबा की।
शहर मुफ्ती मोहम्मद सलीम अहमद के मुताबिक रमजान का तीसरा अशरा जहन्नुम की आग से निजात का है। रमजान की 21, 23, 25, 27, 29वीं रात में कुरान शरीफ नाजिल हुई थी। इन रातों में से जिस रात को कुरान शरीफ नाजिल हुई, उसे शबे कद्र की रात कहते हैं। शबे कद्र की रात को हजार महीने की रातों के बराबर बताया गया है। शनिवार को भी मोमिनों ने पूरी रात जागकर 25वीं रात में शबे कद्र की तलाश की। रोजेदारों ने मस्जिदों में तरावीह के बाद नफिल नमाज, तसबीह पढ़कर और कुरान की तिलावत कर अल्लाह की इबादत की। रोजेदारों के पूरी रात इबादत करने से मुस्लिम इलाकों आजाद कालोनी, मुस्लिम कालोनी, इनामुल्ला बिल्डिंग, डालनवाला आदि जगहों पर खास चहल-पहल रही।
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माह-ए-रमजान की 25वीं रात को शनिवार को रोजेदारों ने पूरी रात अल्लाह की इबादत कर शबे कद्र की तलाश की। इस दौरान रोजेदारों ने गिड़गिड़ाकर अपने गुनाहों से तौबा की।
शहर मुफ्ती मोहम्मद सलीम अहमद के मुताबिक रमजान का तीसरा अशरा जहन्नुम की आग से निजात का है। रमजान की 21, 23, 25, 27, 29वीं रात में कुरान शरीफ नाजिल हुई थी। इन रातों में से जिस रात को कुरान शरीफ नाजिल हुई, उसे शबे कद्र की रात कहते हैं। शबे कद्र की रात को हजार महीने की रातों के बराबर बताया गया है। शनिवार को भी मोमिनों ने पूरी रात जागकर 25वीं रात में शबे कद्र की तलाश की। रोजेदारों ने मस्जिदों में तरावीह के बाद नफिल नमाज, तसबीह पढ़कर और कुरान की तिलावत कर अल्लाह की इबादत की। रोजेदारों के पूरी रात इबादत करने से मुस्लिम इलाकों आजाद कालोनी, मुस्लिम कालोनी, इनामुल्ला बिल्डिंग, डालनवाला आदि जगहों पर खास चहल-पहल रही।
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