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‘सद्गुणों को नष्ट कर देता है घृणा भाव’
Updated Mon, 28 May 2018 01:40 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
जहां हृदय भगवानमय हो जाता है वही रामराज्य है। श्रीमद्भागवत कथा एक ऐसी मंदाकिनी नदी है जिसमें गोता लगाकर जीवन को सफल बनाया जा सकता है।
उक्त बातें साकेतवासी पंडित रामकिंकर महाराज के प्रमुख शिष्य पंडित उमाशंकर ने रविवार को श्री रामचरितमानस कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं को बताईं।
पंडित उमाशंकर श्री सनातन धर्म सभा गीता भवन पीपल मंडी में आयोजित श्री रामचरितमानस कथा में राम कथा कर रहे हैं। कथा मर्मज्ञ पंडित उमाशंकर ने कहा कि रामराज्य सिंहासन पर नहीं दिलों में प्रेम स्थापित करने से होता है। भगवान श्रीराम ने पहले रामराज्य की स्थापना चित्रकूट में की थी। जहां उन्होंने दीनहीनों का सम्मान किया। पंडित उमाशंकर ने कहा कि दूसरे के प्रति कभी भी घृणा भाव नहीं रखना चाहिए। क्योंकि घृणा भाव सद्गुणों को नष्ट कर देता है। यही वजह है कि ईश्वर का सच्चा भक्त सदैव प्रेम का संचार करता है। जिस चित्त में भगवान का चिंतन करते हैं उसमें संसार का चिंतन नहीं करना चाहिए। कार्यक्रम में गीता भवन के प्रधान राकेश ओबरॉय, मंत्री विपिन नागलिया, भूपेंद्र कुशवाहा, राजकुमार गोयल, अशोक गुप्ता, पंडित भगवती प्रसाद थपलियाल, मदनलाल, वीणा शर्मा, जयभगवान, गंगाधर जोशी आदि उपस्थित थे।
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जहां हृदय भगवानमय हो जाता है वही रामराज्य है। श्रीमद्भागवत कथा एक ऐसी मंदाकिनी नदी है जिसमें गोता लगाकर जीवन को सफल बनाया जा सकता है।
उक्त बातें साकेतवासी पंडित रामकिंकर महाराज के प्रमुख शिष्य पंडित उमाशंकर ने रविवार को श्री रामचरितमानस कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं को बताईं।
पंडित उमाशंकर श्री सनातन धर्म सभा गीता भवन पीपल मंडी में आयोजित श्री रामचरितमानस कथा में राम कथा कर रहे हैं। कथा मर्मज्ञ पंडित उमाशंकर ने कहा कि रामराज्य सिंहासन पर नहीं दिलों में प्रेम स्थापित करने से होता है। भगवान श्रीराम ने पहले रामराज्य की स्थापना चित्रकूट में की थी। जहां उन्होंने दीनहीनों का सम्मान किया। पंडित उमाशंकर ने कहा कि दूसरे के प्रति कभी भी घृणा भाव नहीं रखना चाहिए। क्योंकि घृणा भाव सद्गुणों को नष्ट कर देता है। यही वजह है कि ईश्वर का सच्चा भक्त सदैव प्रेम का संचार करता है। जिस चित्त में भगवान का चिंतन करते हैं उसमें संसार का चिंतन नहीं करना चाहिए। कार्यक्रम में गीता भवन के प्रधान राकेश ओबरॉय, मंत्री विपिन नागलिया, भूपेंद्र कुशवाहा, राजकुमार गोयल, अशोक गुप्ता, पंडित भगवती प्रसाद थपलियाल, मदनलाल, वीणा शर्मा, जयभगवान, गंगाधर जोशी आदि उपस्थित थे।