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संध्या छाया नाटक में छलका वयोवृद्घ मां बाप का दर्ज
Updated Tue, 01 May 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
कला मंच की ओर से सोमवार को नगर निगम स्थित टाउन हॉल में संध्या छाया नाटक का मंचन किया गया। नाटक के जरिए कलाकारों ने सेवानिवृत्त के बाद वृद्ध दंपतियों के एकाकी जीवन का दर्द मंचित किया।
नाट्य मंचन कार्यक्रम का शुभारंभ समाजसेवी सत्य प्रकाश गोयल और विशिष्ट अतिथि डॉल्फिन इंस्टीट्यूट के चेयरमैन अरविंद गुप्ता ने संयुक्तरूप से दीप जलाकर किया। नाट्य प्रस्तुति के अनुसार वृद्ध दंपति के दो पुत्र होते हैं। एक फौज में होता है तो दूसरा देश से बाहर नौकरी करता है। विदेश में रहने वाला बेटा एक विदेशी लड़की से विवाह कर लेता है। इस बीच फौजी बेटा देश सेवा में शहीद हो जाता है। इससे वृद्ध मां-बाप टूट जाते हैं। दंपति इसकी सूचना विदेश में रहने वाले बेटे को देते हैं। इस पर बेटा कुछ समय बाद वतन लौटता है, लेकिन फिर से वापस लौट जाता है। माता-पिता बेटे से पास रहने की फरियाद करते हैं, लेकिन वह राजी नहीं होता है। इसके बाद वृद्ध दंपति काफी टूट जाते हैं। नाटक के यही दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। नाट्यकार जयवंत दलवी द्वारा रचित इस नाटक को टीके अग्रवाल के निर्देशन में तैयार किया गया। नाटक में पिता की भूमिका प्रदीप शर्मा और मां की भूमिका डॉ. जागृति डोभाल ने निभाई। इसके अलावा अन्य पात्रों में मयंक चौधरी, श्यामदेश पांडेय, प्रण वर्मा, रूप सज्जा में अरुण अग्रवाल का कार्य सराहनीय रहा। इस मौके पर कला मंच के अध्यक्ष एके अग्रवाल, राजीव जैन, संजय गुप्ता, नरेंद्र शाह, अतुल विश्नोई आदि मौजूद थे।
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कला मंच की ओर से सोमवार को नगर निगम स्थित टाउन हॉल में संध्या छाया नाटक का मंचन किया गया। नाटक के जरिए कलाकारों ने सेवानिवृत्त के बाद वृद्ध दंपतियों के एकाकी जीवन का दर्द मंचित किया।
नाट्य मंचन कार्यक्रम का शुभारंभ समाजसेवी सत्य प्रकाश गोयल और विशिष्ट अतिथि डॉल्फिन इंस्टीट्यूट के चेयरमैन अरविंद गुप्ता ने संयुक्तरूप से दीप जलाकर किया। नाट्य प्रस्तुति के अनुसार वृद्ध दंपति के दो पुत्र होते हैं। एक फौज में होता है तो दूसरा देश से बाहर नौकरी करता है। विदेश में रहने वाला बेटा एक विदेशी लड़की से विवाह कर लेता है। इस बीच फौजी बेटा देश सेवा में शहीद हो जाता है। इससे वृद्ध मां-बाप टूट जाते हैं। दंपति इसकी सूचना विदेश में रहने वाले बेटे को देते हैं। इस पर बेटा कुछ समय बाद वतन लौटता है, लेकिन फिर से वापस लौट जाता है। माता-पिता बेटे से पास रहने की फरियाद करते हैं, लेकिन वह राजी नहीं होता है। इसके बाद वृद्ध दंपति काफी टूट जाते हैं। नाटक के यही दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। नाट्यकार जयवंत दलवी द्वारा रचित इस नाटक को टीके अग्रवाल के निर्देशन में तैयार किया गया। नाटक में पिता की भूमिका प्रदीप शर्मा और मां की भूमिका डॉ. जागृति डोभाल ने निभाई। इसके अलावा अन्य पात्रों में मयंक चौधरी, श्यामदेश पांडेय, प्रण वर्मा, रूप सज्जा में अरुण अग्रवाल का कार्य सराहनीय रहा। इस मौके पर कला मंच के अध्यक्ष एके अग्रवाल, राजीव जैन, संजय गुप्ता, नरेंद्र शाह, अतुल विश्नोई आदि मौजूद थे।
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