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Dehradun News: ऊपरी शेरकी में पानी को तरस रहे 12 परिवार, चार किमी दूर से लाते हैं पानी

Wed, 08 May 2024 04:13 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 08 May 2024 04:13 AM IST
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12 families yearning for water in Upper Sherki, bring wate

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पहाड़ों की खूबसूरती देखते ही मन कहता है कि यहां रहने को मिले तो कितना अच्छा होगा। यहां पर साफ हवा और सुकून होगा। लेकिन पहाड़ पर रहने वालों को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है यह उनसे बेहतर कोई नहीं जानता। ऐसा ही एक खूबसूरत गांव ऊपरी शेरकी है। माल देवता से चार किलोमीटर दूर बसे इस गांव के लोगों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। इन्हें चार किलोमीटर दूर से पानी लाना होता है। 2014 में आई प्राकृतिक आपदा में पेयजल लाइन बह गई थी। इसके बाद से आज तक दूसरी लाइन नहीं पड़ी है।

ऊपरी शेरकी में 12 परिवार रहते हैं। इन परिवारों में करीब 100 लोग हैं। इसके पास ही दूसरा गांव निचली शेरकी है। निचली शेरकी में पेयजल की लाइन है और लोगों को पानी मिल रहा है। लेकिन ऊपरी शेरकी वालों के लिए पेयजल की कोई सुविधा नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार जल संस्थान को अवगत कराया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। गांव में पानी भले ही नहीं आ रहा है, लेकिन लगातार बिल भेजे जा रहे हैं। लोगों ने श्रमदान कर पेयजल लाइन ठीक भी करवाई, लेकिन दोबारा आपदा आई और लाइन बह गई। स्थानीय निवासी विक्रम पंवार ने बताया कि इसी गांव में कल्पेश्वर महादेव मंदिर है। यहां भक्तों का आना जाना लगा रहता है।
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चार फीट चौड़ा रास्ते पर गिरने का खतरा

स्थानीय निवासियों ने बताया कि मसूरी विधानसभा में ऊपरी शेरकी गांव आने-जाने के लिए सड़क भी नहीं है। रास्ते की चौड़ाई मात्र चार फीट है। ऐसे में यहां पर पानी लाने के लिए पैदल चलना पड़ता है। बरसात के समय रास्ते पर चलना मुश्किल हो जाता है। कई लोग गिरकर चोटिल होते रहते हैं।
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यहां से मिल सकता है पेयजल



- नजदीक स्थित लालपुल से बांदल नदी बहती है। गांव से इसकी दूरी सिर्फ डेढ़ किलोमीटर है। पंपिंग योजना के तहत यहां से पानी आ सकता है।

- ऊपरी सेरकी गांव से 500 मीटर की दूरी पर बौंठा गांव से बोरिंग करके पानी की पाइपलाइन डाली जा सकती है।



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स्थानीय निवासियों से बातचीत



यहां पर एक जल स्रोत है, जहां से पानी आता है। लेकिन यह पानी बहुत खारा है। पीना तो दूर इससे कपड़े धोने पर सफेद हो जाते हैं। - राजेंद्र रावत

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चार किलोमीटर दूर मालदेवता से हमें पानी लाना पड़ता है। रात के समय पानी लाने में डर लगता है। यहां का रास्ता बहुत संकरा है। - अरुण सोलंकी

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पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है। कपड़े धोने तो दूर की बात है। कपड़े धोने के लिए हम मालदेवता लाते हैं। धोने के बाद यहां से कपड़े ले जाते हैं। - विक्रम पंवार


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पानी और सड़क की व्यवस्था ठीक कर दी जाए तो यहां पर हम लोग आराम से रह सकते हैं। यहां हमारा घर है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। - मोहित पंवार

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पहाड़ों पर ऐसी स्थिति के चलते ही पलायन होता है। जरूरी सुविधाएं मिल जाएं तो पलायन कम हो जाएगा। सरकार को पेयजल और सड़क सुविधा के लिए काम करना चाहिए।

- स्वामी वेदायन



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गांव में लगे हैंडपंप से मोटर लगाकर पेयजल लाइन जोड़ी जाएगी। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया है। इस सीजन में यहां के लोगों को पेयजल मिल जाएगा। - संदीप कश्यप,



अधिशासी अभियंता, मसूरी डिवीजन
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