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राज्य सरकार, वन मंत्रालय, एनटीसीए, एनबीडब्ल्ल्यूएल को नोटिस जारी
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की अनुमति के बिना राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में राज्य सरकार की ओर से सड़क बनाए जाने के मामले में एनजीटी ने प्रदेश सरकार, केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु मंत्रालय, एनटीसीए, नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ (एनबीडब्ल्यूएल) को नोटिस जारी कर दिया है।
राज्य सरकार ने राजाजी टाइगर रिजर्व के सटे इलाके में लालढांग से चिल्लरखाल तक सड़क का निर्माण शुरू कराया। लेकिन, इसके लिए एनटीसीए से अनुमति नहीं ली गई। इसकी जानकारी एनटीसीए अधिकारियों को हुई तो उन्होंने राज्य सरकार के साथ-साथ वन विभाग को नोटिस जारी कर सड़क निर्माण रोकने को कहा। बावजूद इसके निर्माण जारी रहा। इस पर एनटीसीए ने 14 मार्च को मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को पत्र भेजकर नाराजगी जताई। इस पर वन्यजीव प्रतिपालक ने प्रभागीय वनाधिकारी लैंसडोन को तत्काल सड़क निर्माण रोकने को कहा। उसके बाद कार्य रोका गया। अब यह मामला एनजीटी में पहुंच गया है। एनजीटी के अधिवक्ता गौरव बंसल की ओर से इस प्रकरण में याचिका दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान सड़क निर्माण पर एनजीटी ने नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार, केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु मंत्रालय, एनटीसीए, एनबीडब्ल्यूएल को नोटिस जारी किया। इसमें एनजीटी ने कहा कि सड़क निर्माण से एनटीसीए से अनुमति क्यों नही ली गई? जबकि प्रावधान है कि देश के किसी भी टाइगर रिजर्व में सड़क निर्माण समेत कोई भी संरचना करनी है तो इसके लिए पहले एनटीसीए की अनुमति जरूरी है। लेकिन, राज्य सरकार व वन विभाग के अफसरों ने इन प्रावधानों को दरकिनार कर मनमर्जी से निर्माण कार्य शुरू कर दिया।
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देहरादून। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की अनुमति के बिना राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में राज्य सरकार की ओर से सड़क बनाए जाने के मामले में एनजीटी ने प्रदेश सरकार, केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु मंत्रालय, एनटीसीए, नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ (एनबीडब्ल्यूएल) को नोटिस जारी कर दिया है।
राज्य सरकार ने राजाजी टाइगर रिजर्व के सटे इलाके में लालढांग से चिल्लरखाल तक सड़क का निर्माण शुरू कराया। लेकिन, इसके लिए एनटीसीए से अनुमति नहीं ली गई। इसकी जानकारी एनटीसीए अधिकारियों को हुई तो उन्होंने राज्य सरकार के साथ-साथ वन विभाग को नोटिस जारी कर सड़क निर्माण रोकने को कहा। बावजूद इसके निर्माण जारी रहा। इस पर एनटीसीए ने 14 मार्च को मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को पत्र भेजकर नाराजगी जताई। इस पर वन्यजीव प्रतिपालक ने प्रभागीय वनाधिकारी लैंसडोन को तत्काल सड़क निर्माण रोकने को कहा। उसके बाद कार्य रोका गया। अब यह मामला एनजीटी में पहुंच गया है। एनजीटी के अधिवक्ता गौरव बंसल की ओर से इस प्रकरण में याचिका दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान सड़क निर्माण पर एनजीटी ने नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार, केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु मंत्रालय, एनटीसीए, एनबीडब्ल्यूएल को नोटिस जारी किया। इसमें एनजीटी ने कहा कि सड़क निर्माण से एनटीसीए से अनुमति क्यों नही ली गई? जबकि प्रावधान है कि देश के किसी भी टाइगर रिजर्व में सड़क निर्माण समेत कोई भी संरचना करनी है तो इसके लिए पहले एनटीसीए की अनुमति जरूरी है। लेकिन, राज्य सरकार व वन विभाग के अफसरों ने इन प्रावधानों को दरकिनार कर मनमर्जी से निर्माण कार्य शुरू कर दिया।
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