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शिव मंदिर तोड़ने पर विहिप का हंगामा
Updated Thu, 29 Jun 2017 10:31 PM IST
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कोटद्वार। राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे पुराने शिव मंदिर को वन विभाग द्वारा तोड़े जाने पर भड़के विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ का घेराव किया। इसके बाद उन्होंने कोतवाली में भी हंगामा काटा और डीएफओ मयंक शेखर झा के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दी।
विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष संदीप डबराल ने बताया कि बृहस्पतिवार शाम को विश्व हिंदू परिषद के नगर मंत्री राहुल अग्रवाल लैंसडौन से कोटद्वार आ रहे थे। तभी राष्ट्रीय राजमार्ग पर लालपुल के पास सड़क किनारे मंदिर को तोड़ते हुए उन्होंने वन कर्मियों को देखा। उन्होंने इसकी जानकारी डीएफओ से लेनी चाही, लेकिन डीएफओ ने जानबूझ कर मंदिर तोड़ने की बात की। विहिप कार्यकर्ताओं का आरोप है कि डीएफओ ने मंदिर बनाए जाने पर उसे बार-बार तोड़ने की बात कही। इसके बाद कार्यकर्ता भड़क गए। कार्यकर्ता डीएफओ कार्यालय बंद होने के कारण उनके निवास पर एकत्र हो गए और डीएफओ का घेराव किया। इस दौरान दोनों पक्षों में तीखी बहस भी हुई।
कार्यकर्ताओं को कहना था कि मंदिर सौ वर्ष पुराना है। इससे लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। उधर डीएफओ ने वन भूमि पर मंदिर बने होने की बात कही। डीएफओ की वार्ता से असंतुष्ट होकर कार्यकर्ता मंदिर बनाने की जिद पर कोतवाली पहुंच गए। देखते ही देखते यह सूचना पूरे क्षेत्र में फैल गई। शहर के सभी हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता और पदाधिकारी कोतवाली में एकत्र हो गए। उन्होंने मामले को लेकर सीओ कोटद्वार से वार्ता की और डीएफओ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस पर सीओ जेआर जोशी ने कार्यकर्ताओं को समझाया और कानून के मुताबिक कार्रवाई का आश्वासन दिया। तब जाकर कार्यकर्ता शांत हुए।
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उधर, डीएफओ मयंक शेखर झा ने बताया कि मंदिर आरक्षित वन भूमि में था। कुछ लोग पुराना मंदिर को तोड़कर बिना इजाजत उसकी जगह में बड़ा मंदिर बनाना चाह रहे थे, जिसे कर्मचारियों ने तोड़ डाला है। इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषर के नगर अध्यक्ष संजय थपलियाल, मनमोहन जुयाल, अमित सजवाण, सोमप्रकाश नैथानी, लक्ष्मण बिष्ट, दुर्गेश ममंगाईं, राजेंद्र बिष्ट, संजय गोदियाल, राजगौरव नौटियाल आदि मौजूद थे।
विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष संदीप डबराल ने बताया कि बृहस्पतिवार शाम को विश्व हिंदू परिषद के नगर मंत्री राहुल अग्रवाल लैंसडौन से कोटद्वार आ रहे थे। तभी राष्ट्रीय राजमार्ग पर लालपुल के पास सड़क किनारे मंदिर को तोड़ते हुए उन्होंने वन कर्मियों को देखा। उन्होंने इसकी जानकारी डीएफओ से लेनी चाही, लेकिन डीएफओ ने जानबूझ कर मंदिर तोड़ने की बात की। विहिप कार्यकर्ताओं का आरोप है कि डीएफओ ने मंदिर बनाए जाने पर उसे बार-बार तोड़ने की बात कही। इसके बाद कार्यकर्ता भड़क गए। कार्यकर्ता डीएफओ कार्यालय बंद होने के कारण उनके निवास पर एकत्र हो गए और डीएफओ का घेराव किया। इस दौरान दोनों पक्षों में तीखी बहस भी हुई।
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कार्यकर्ताओं को कहना था कि मंदिर सौ वर्ष पुराना है। इससे लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। उधर डीएफओ ने वन भूमि पर मंदिर बने होने की बात कही। डीएफओ की वार्ता से असंतुष्ट होकर कार्यकर्ता मंदिर बनाने की जिद पर कोतवाली पहुंच गए। देखते ही देखते यह सूचना पूरे क्षेत्र में फैल गई। शहर के सभी हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता और पदाधिकारी कोतवाली में एकत्र हो गए। उन्होंने मामले को लेकर सीओ कोटद्वार से वार्ता की और डीएफओ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस पर सीओ जेआर जोशी ने कार्यकर्ताओं को समझाया और कानून के मुताबिक कार्रवाई का आश्वासन दिया। तब जाकर कार्यकर्ता शांत हुए।
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उधर, डीएफओ मयंक शेखर झा ने बताया कि मंदिर आरक्षित वन भूमि में था। कुछ लोग पुराना मंदिर को तोड़कर बिना इजाजत उसकी जगह में बड़ा मंदिर बनाना चाह रहे थे, जिसे कर्मचारियों ने तोड़ डाला है। इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषर के नगर अध्यक्ष संजय थपलियाल, मनमोहन जुयाल, अमित सजवाण, सोमप्रकाश नैथानी, लक्ष्मण बिष्ट, दुर्गेश ममंगाईं, राजेंद्र बिष्ट, संजय गोदियाल, राजगौरव नौटियाल आदि मौजूद थे।