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सात फेरे लेकर ससुराल विदा हुईं 28 बेटियां
Updated Mon, 25 Jun 2018 01:44 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
मायके की कभी न याद आए, ससुराल में इतना प्यार मिले... जैसे ही यह गाना बजा तो पूरा माहौल गमगीन हो गया, लोगों की आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे। मौका था पथरी बाग चौक स्थित ब्लेसिंग फार्म में श्री श्री बालाजी सेवा समिति की ओर से आयोजित 28 निर्धन बेटियों के सामूहिक विवाह का। वैवाहिक जीवन के सात फेरे लेने के बाद बेटियों को समिति के सदस्यों ने एक साथ ससुराल के लिए विदा किया। शहर के तमाम लोग इस सामूहिक विवाह के साक्षी बने।
रविवार सुबह करीब 11 बजे पंचायती मंदिर से मैराथन बारात शुरू हुई। एक साथ 28 दूल्हे घोड़ी चढ़े तो देखने वालों का तांता लग गया। झूमते, नाचते और गाते हुए बाराती पटेलनगर स्थित ब्लेसिंग फार्म पहुंचे। यहां बेटियों के परिजन और मेहमानों ने बारातियों का जोरदार स्वागत किया। नाश्ता-पानी के बाद विवाह की रस्में शुरू हुईं। बारातियों की आवभगत और विवाह कार्यक्रम मेें समिति के सेवादार और अन्य लोग पूरे मनोयोग से जुटे रहे। दूल्हों की जरूरतों और बारातियों का पूरा ध्यान रखा गया। विवाह स्थल पर वरमाला से लेकर फेरों तक पंडाल गढ़वाली मांगल गीतों से गुंजायमान रहा।
वर-वधुओं को आशीर्वाद देने के लिए तमाम सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के लोगों के अलावा मसूरी विधायक गणेश जोशी, चंद्रगुप्त विक्रम, जोगेंद्र सिंह पुंडीर, लालचंद शर्मा, मनोज ध्यानी, राजरानी अग्रवाल, आरके गुप्ता, श्रवण वर्मा, कुलभूषण अग्रवाल, समिति के अध्यक्ष अखिलेश अग्रवाल, सचिव मनोज खंडेलवाल, चंद्रेश अरोड़ा, उमाशंकर रघुवंशी, मनमोहन लखेड़ा, संजय शर्मा, विजय बिष्ट, पंकज चांदना, राजेश चौरसिया, दीपक अग्रवाल, एसपी शर्मा, अशोक गुप्ता, आरके शर्मा, ऋ षभ अग्रवाल, कविता खंडेलवाल, मीरा, रश्मि अरोड़ा, भावना बिष्ट, गीता नेगी, अर्चना अग्रवाल, ममता गर्ग, कृष्णा देवी, गीता वर्मा, सुशीला काला समेत सैकड़ों सेवादार उपस्थित रहे।
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मंच से दिया बेटियों के सम्मान का संदेश
मंच पर कतारबद्ध बैठे जोड़ों को देखने के लिए वेडिंग प्वाइंट में भीड़ लगी थी। इस मौके पर आयोजकों ने बेटियों के सम्मान का संदेश दिया। लोगों को समझाया कि अभिभावकों की जिंदगी में बेटी कितनी जरूरी है। बेटी के आने से कोई घर कैसे स्वर्ग बन जाता है। कहा गया कि बेटियों को पढ़ाने के लिए यदि पैसा नहीं है तो समिति मदद करेगी। उनकी शादी के लिए पैसा नहीं है तो भी समिति शादी कराएगी। समिति ने संदेश दिया कि बेटियों का सम्मान करना सीखें।
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ब्यूटीशियंस ने किया फ्री मेकअप
इस सामूहिक विवाह में किसी ने आर्थिक सहयोग दिया तो किसी ने व्यवस्था में मदद की। शहर की कई ब्यूटीशियंस ने दुल्हनों का फ्री मेकअप किया। वंदना, संगीता, सीमा, मंजुला, मन्नू, कंचन, संगीता, गुड़िया, हिमानी, पूनम, गोरी, रेनू, हेमा, सरोज, खुशबू, अपना-अपना पार्लर छोड़ दुल्हनों के श्रृंगार में लगी रहीं। उन्होंने कहा कि गरीबों की मदद करने का अवसर हर किसी को नसीब नहीं होता। समिति के नीरज गर्ग ने बताया कि सभी ब्यूटीशियंस ने खुद ही आयोजन में सेवा देने की रुचि दिखाई।
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फेरों के साथ कोर्ट मैरिज भी
एक ओर से समिति ने जोड़ों के फेरे कराए तो दूसरी और कोर्ट मैरिज भी कराई। समिति से जुड़े शिव नंदन सक्सेना और अरविंद कुमार तायल ने पहले ही सभी औपचारिकताएं पूरी करा ली थीं। विवाह स्थल पर उन्होंने सभी जोड़ों के हस्ताक्षर करवाए।
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मांगलगीत गाकर लगाए पौधे
महिला नवजागरण समिति से जुड़ी महिलाओं ने दैणो होया खोली का गणेशा... मांगलगीत गाए। साथ ही उन्होंने पिंजरी कुसुआ...गीत से बारात का स्वागत किया। इस दौरान समिति की अध्यक्ष शशि रतूड़ी ने बताया कि समिति पिछले चार साल से शादी समारोह में पहाड़ी गीत गाती आ रही हैं। सभी शादियों में डाली लगाओ, बेटी बचाओ का संदेश देती हैं। शादी में फलदार पेड़ लगाकर संदेश दिया जाता है कि बच्ची का जीवनफलदार पेड़ की तरह फलता-फूलता रहे। इस दौरान प्रमिला पांडे, रेखा कोठारी, दीपांजलि कोठारी, संतोषी, ज्योति कृषाली, सागर आदि महिलाएं मौजूद रहीं।
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ससुराल में करें बड़ों का सम्मान
श्री श्री बालाजी सेवा समिति के सभी पदाधिकारी कन्याओं के मायके वाले बने थे। उन्होंने कन्याओं से कहा कि ससुराल पहुंचने के बाद बड़ों का आदर और सम्मान करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। समिति की महिला पदाधिकारियों ने बताया कि सास भी मां के बराबर होती है। इसलिए अपनी सास को मां समझकर ही रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ भी काम करने से पहले भगवान के बाद सास-श्वसुर से आज्ञा लेना। जब तुम अपनों का आदर करोगे तो सब तुम्हारा आदर करेंगे और तुम्हें प्यार करेंगे।
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पापा होते तो कितने खुश होते
विवाह समारोह में आठ कन्याएं ऐसी थीं, जिनके सिर से पिता का साया पहले ही उठ चुका है। विवाह के दिन वे अपने पिता को याद करके खूब रोईं। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इन कन्याओं का रिश्ता या तो इनकी मां ने कराया है या फिर चाचा-ताऊ ने। चकराता की गुड्डी ने कहा कि पापा हमेशा कहते थे कि मैं अपनी रानी गुड़िया के लिए सुंदर सा राजा ढूंढकर धूमधाम से शादी करूंगा, लेकिन पापा की यह इच्छा अधूरी रह गई। सेलाकुई निवासी राधा ने बताया कि विवाह के दिन पापा की बहुत याद आ रही है। काश वह अपने हाथ से कन्यादान करते।
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18 कन्याओं ने अपनी पसंद से चुना वर
श्री श्री बालाजी समिति ने 28 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह कर समाज में एक अलग संदेश दिया। विवाह में खास बात यह रही कि 28 में से 18 कन्याओं ने अपनी पसंद का वर चुना। शादी के बंधन में बंधने के बाद ये जोड़े बेहद खुश नजर आए। दूल्हे दयाल ने बताया कि वह चार साल पहले आशा से कॉलेज में मिले थे। इसके बाद शुरू हुआ दोनों का प्यार रविवार को शादी के बंधन में बंधने के बाद हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो गया। अपनी पसंद से विवाह करने वालों में गुड्डी, प्रकाश, विशाल, शिल्पा और शिव कुमार, काजल कुमारी आदि की जोड़ी शामिल रही।
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लोगों ने बढ़-चढ़ कर किया कन्यादान
28 निर्धन कन्याओं के सामूहिक विवाह में लोगों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार कन्यादान किया। समिति के उपाध्यक्ष सचिन गुप्ता ने बताया कि ऐसे लोग कन्यादान के लिए उत्सुकता दिखाते हैं, जिनकी बेटियां नहीं है। इस आयोजन की खासियत है। सेलाकुई से आए विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष हर्ष गुप्ता ने सेलाकुई के वर-वधू, रविंदर-अनुजा को पांच सोने की वस्तुएं और 2100 रुपये देकर कन्यादान किया। उन्होंने बताया कि उनकी कोई बेटी नहीं है। इस बात का उन्हें बहुत दुख है, इसलिए बेटियों से संबंधित कार्यक्रमों में वह सबसे आगे रहते है। एसके मित्तल, विपिन गर्ग, विनय गुप्ता, विनीत गर्ग, मनोज गुप्ता, अशोक फारुखी ने भी कन्यादान किया।
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बनारस के जूस और आगरा के पेठे का उठाया लुत्फ
विवाह समारोह में बनारस से आए यूके सिंह ने फ्रूटी और जलजीरा से बारातियों की प्यास बुझाई, वहीं आगरा से आए कार्ति कजी और उनके परिजनों ने बारातियों का पेठा खिलाकर मुंह मीठा कराया। इसकी समिति के लोगों ने काफी सराहना की।
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2019 में 51 निर्धन कन्याओं का विवाह का लक्ष्य
श्री श्री बालाजी सेवा समिति के अध्यक्ष अखिलेश अग्रवाल ने बताया कि लोगों के सहयोग के बिना कार्यक्रम सफल होना मुश्किल था। सभी के सहयोग और साथ से ही कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो पाया। उन्होंने बताया कि 2019 के लिए अभी से आवेदन आने शुरू हो गए हैं। अगले वर्ष समिति का 51 निर्धन कन्याओं का विवाह कराने का प्रयास करेगा।
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मायके की कभी न याद आए, ससुराल में इतना प्यार मिले... जैसे ही यह गाना बजा तो पूरा माहौल गमगीन हो गया, लोगों की आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे। मौका था पथरी बाग चौक स्थित ब्लेसिंग फार्म में श्री श्री बालाजी सेवा समिति की ओर से आयोजित 28 निर्धन बेटियों के सामूहिक विवाह का। वैवाहिक जीवन के सात फेरे लेने के बाद बेटियों को समिति के सदस्यों ने एक साथ ससुराल के लिए विदा किया। शहर के तमाम लोग इस सामूहिक विवाह के साक्षी बने।
रविवार सुबह करीब 11 बजे पंचायती मंदिर से मैराथन बारात शुरू हुई। एक साथ 28 दूल्हे घोड़ी चढ़े तो देखने वालों का तांता लग गया। झूमते, नाचते और गाते हुए बाराती पटेलनगर स्थित ब्लेसिंग फार्म पहुंचे। यहां बेटियों के परिजन और मेहमानों ने बारातियों का जोरदार स्वागत किया। नाश्ता-पानी के बाद विवाह की रस्में शुरू हुईं। बारातियों की आवभगत और विवाह कार्यक्रम मेें समिति के सेवादार और अन्य लोग पूरे मनोयोग से जुटे रहे। दूल्हों की जरूरतों और बारातियों का पूरा ध्यान रखा गया। विवाह स्थल पर वरमाला से लेकर फेरों तक पंडाल गढ़वाली मांगल गीतों से गुंजायमान रहा।
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वर-वधुओं को आशीर्वाद देने के लिए तमाम सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के लोगों के अलावा मसूरी विधायक गणेश जोशी, चंद्रगुप्त विक्रम, जोगेंद्र सिंह पुंडीर, लालचंद शर्मा, मनोज ध्यानी, राजरानी अग्रवाल, आरके गुप्ता, श्रवण वर्मा, कुलभूषण अग्रवाल, समिति के अध्यक्ष अखिलेश अग्रवाल, सचिव मनोज खंडेलवाल, चंद्रेश अरोड़ा, उमाशंकर रघुवंशी, मनमोहन लखेड़ा, संजय शर्मा, विजय बिष्ट, पंकज चांदना, राजेश चौरसिया, दीपक अग्रवाल, एसपी शर्मा, अशोक गुप्ता, आरके शर्मा, ऋ षभ अग्रवाल, कविता खंडेलवाल, मीरा, रश्मि अरोड़ा, भावना बिष्ट, गीता नेगी, अर्चना अग्रवाल, ममता गर्ग, कृष्णा देवी, गीता वर्मा, सुशीला काला समेत सैकड़ों सेवादार उपस्थित रहे।
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मंच से दिया बेटियों के सम्मान का संदेश
मंच पर कतारबद्ध बैठे जोड़ों को देखने के लिए वेडिंग प्वाइंट में भीड़ लगी थी। इस मौके पर आयोजकों ने बेटियों के सम्मान का संदेश दिया। लोगों को समझाया कि अभिभावकों की जिंदगी में बेटी कितनी जरूरी है। बेटी के आने से कोई घर कैसे स्वर्ग बन जाता है। कहा गया कि बेटियों को पढ़ाने के लिए यदि पैसा नहीं है तो समिति मदद करेगी। उनकी शादी के लिए पैसा नहीं है तो भी समिति शादी कराएगी। समिति ने संदेश दिया कि बेटियों का सम्मान करना सीखें।
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ब्यूटीशियंस ने किया फ्री मेकअप
इस सामूहिक विवाह में किसी ने आर्थिक सहयोग दिया तो किसी ने व्यवस्था में मदद की। शहर की कई ब्यूटीशियंस ने दुल्हनों का फ्री मेकअप किया। वंदना, संगीता, सीमा, मंजुला, मन्नू, कंचन, संगीता, गुड़िया, हिमानी, पूनम, गोरी, रेनू, हेमा, सरोज, खुशबू, अपना-अपना पार्लर छोड़ दुल्हनों के श्रृंगार में लगी रहीं। उन्होंने कहा कि गरीबों की मदद करने का अवसर हर किसी को नसीब नहीं होता। समिति के नीरज गर्ग ने बताया कि सभी ब्यूटीशियंस ने खुद ही आयोजन में सेवा देने की रुचि दिखाई।
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फेरों के साथ कोर्ट मैरिज भी
एक ओर से समिति ने जोड़ों के फेरे कराए तो दूसरी और कोर्ट मैरिज भी कराई। समिति से जुड़े शिव नंदन सक्सेना और अरविंद कुमार तायल ने पहले ही सभी औपचारिकताएं पूरी करा ली थीं। विवाह स्थल पर उन्होंने सभी जोड़ों के हस्ताक्षर करवाए।
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मांगलगीत गाकर लगाए पौधे
महिला नवजागरण समिति से जुड़ी महिलाओं ने दैणो होया खोली का गणेशा... मांगलगीत गाए। साथ ही उन्होंने पिंजरी कुसुआ...गीत से बारात का स्वागत किया। इस दौरान समिति की अध्यक्ष शशि रतूड़ी ने बताया कि समिति पिछले चार साल से शादी समारोह में पहाड़ी गीत गाती आ रही हैं। सभी शादियों में डाली लगाओ, बेटी बचाओ का संदेश देती हैं। शादी में फलदार पेड़ लगाकर संदेश दिया जाता है कि बच्ची का जीवनफलदार पेड़ की तरह फलता-फूलता रहे। इस दौरान प्रमिला पांडे, रेखा कोठारी, दीपांजलि कोठारी, संतोषी, ज्योति कृषाली, सागर आदि महिलाएं मौजूद रहीं।
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ससुराल में करें बड़ों का सम्मान
श्री श्री बालाजी सेवा समिति के सभी पदाधिकारी कन्याओं के मायके वाले बने थे। उन्होंने कन्याओं से कहा कि ससुराल पहुंचने के बाद बड़ों का आदर और सम्मान करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। समिति की महिला पदाधिकारियों ने बताया कि सास भी मां के बराबर होती है। इसलिए अपनी सास को मां समझकर ही रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ भी काम करने से पहले भगवान के बाद सास-श्वसुर से आज्ञा लेना। जब तुम अपनों का आदर करोगे तो सब तुम्हारा आदर करेंगे और तुम्हें प्यार करेंगे।
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पापा होते तो कितने खुश होते
विवाह समारोह में आठ कन्याएं ऐसी थीं, जिनके सिर से पिता का साया पहले ही उठ चुका है। विवाह के दिन वे अपने पिता को याद करके खूब रोईं। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इन कन्याओं का रिश्ता या तो इनकी मां ने कराया है या फिर चाचा-ताऊ ने। चकराता की गुड्डी ने कहा कि पापा हमेशा कहते थे कि मैं अपनी रानी गुड़िया के लिए सुंदर सा राजा ढूंढकर धूमधाम से शादी करूंगा, लेकिन पापा की यह इच्छा अधूरी रह गई। सेलाकुई निवासी राधा ने बताया कि विवाह के दिन पापा की बहुत याद आ रही है। काश वह अपने हाथ से कन्यादान करते।
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18 कन्याओं ने अपनी पसंद से चुना वर
श्री श्री बालाजी समिति ने 28 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह कर समाज में एक अलग संदेश दिया। विवाह में खास बात यह रही कि 28 में से 18 कन्याओं ने अपनी पसंद का वर चुना। शादी के बंधन में बंधने के बाद ये जोड़े बेहद खुश नजर आए। दूल्हे दयाल ने बताया कि वह चार साल पहले आशा से कॉलेज में मिले थे। इसके बाद शुरू हुआ दोनों का प्यार रविवार को शादी के बंधन में बंधने के बाद हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो गया। अपनी पसंद से विवाह करने वालों में गुड्डी, प्रकाश, विशाल, शिल्पा और शिव कुमार, काजल कुमारी आदि की जोड़ी शामिल रही।
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लोगों ने बढ़-चढ़ कर किया कन्यादान
28 निर्धन कन्याओं के सामूहिक विवाह में लोगों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार कन्यादान किया। समिति के उपाध्यक्ष सचिन गुप्ता ने बताया कि ऐसे लोग कन्यादान के लिए उत्सुकता दिखाते हैं, जिनकी बेटियां नहीं है। इस आयोजन की खासियत है। सेलाकुई से आए विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष हर्ष गुप्ता ने सेलाकुई के वर-वधू, रविंदर-अनुजा को पांच सोने की वस्तुएं और 2100 रुपये देकर कन्यादान किया। उन्होंने बताया कि उनकी कोई बेटी नहीं है। इस बात का उन्हें बहुत दुख है, इसलिए बेटियों से संबंधित कार्यक्रमों में वह सबसे आगे रहते है। एसके मित्तल, विपिन गर्ग, विनय गुप्ता, विनीत गर्ग, मनोज गुप्ता, अशोक फारुखी ने भी कन्यादान किया।
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बनारस के जूस और आगरा के पेठे का उठाया लुत्फ
विवाह समारोह में बनारस से आए यूके सिंह ने फ्रूटी और जलजीरा से बारातियों की प्यास बुझाई, वहीं आगरा से आए कार्ति कजी और उनके परिजनों ने बारातियों का पेठा खिलाकर मुंह मीठा कराया। इसकी समिति के लोगों ने काफी सराहना की।
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2019 में 51 निर्धन कन्याओं का विवाह का लक्ष्य
श्री श्री बालाजी सेवा समिति के अध्यक्ष अखिलेश अग्रवाल ने बताया कि लोगों के सहयोग के बिना कार्यक्रम सफल होना मुश्किल था। सभी के सहयोग और साथ से ही कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो पाया। उन्होंने बताया कि 2019 के लिए अभी से आवेदन आने शुरू हो गए हैं। अगले वर्ष समिति का 51 निर्धन कन्याओं का विवाह कराने का प्रयास करेगा।