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सरकार को गेहूं बेचने से बच रहे किसान, 36 दिन में केवल 29 कुंतल खरीद
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
जिले के किसान इस बार सरकार को गेहूं बेचने से बच रहे हैं। हालत यह है कि मौजूदा क्रय सीजन के 36 दिनों में महज 29 क्विंटल खरीद ही हो पाई है। लक्ष्य के मुकाबले यह मात्रा शून्य के आसपास ही है। इसका कारण बाजार में एमएसपी से अधिक मूल्य मिलने को बताया जा रहा है।
यह आंकड़े मंगलवार को गेहूं खरीद प्रगति की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी के समक्ष रखे गए। इस पर जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कम खरीद का कारण और खरीद बढ़ाने के सुझाव अधिकारियों से मांगे। जिलाधिकारी ने प्रगति रिपोर्ट पूछी तो अधिकारियों ने लगभग शून्य बताया। बैठक में जानकारी दी कि जनपद में केवल तौल केंद्र विकासनगर में ही खरीद हो सकी है। वह भी महज 29 क्विंटल। कारण पूछने पर अधिकारियों ने बाजार में गेहूं का मूल्य एमएसपी से अधिक समेत भिन्न-भिन्न कारण बताए। लिहाजा किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे हैं। इसके अलावा दलालों का सक्रिय होना भी कारण बताया जा रहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि गेहूं खरीद में दलालों की भूमिका को शून्य किया जाना चाहिए। उन्होंने जिला कृषि अधिकारी को आदेश दिया कि वह सीधे किसानों को फोन करें और तौल केंद्रों तक आने के लिए कहें। साथ ही विभाग की ओर से एक विशेष स्थान पर वाहन भी किसानों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
बता दें, इस बार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1840 रुपये है जिस पर जनपद में लगभग 2450 टन खरीद का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से खाद्य विभाग को 450 टन और सहकारिता विभाग को लगभग 2000 टन का लक्ष्य मिला था। जिले में कुल सात तौल केंद्र हैं, जिसमें चार खाद्य विभाग के और तीन सहकारिता विभाग के हैं।
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एमएसपी और किराया बढ़ाने का सुझाव
अधिकारियों ने बताया कि किसान किराए का 20 रुपये प्रति क्विंटल को भी कम मान रहे हैं। साथ ही एमएसपी भी उन्हें कम लग रहा है। लिहाजा शासन को प्रस्ताव भेजा जाए कि इस किराए और एमएसपी दोनों को बढ़ाया जाए।
क्या है बाजार में मूल्य
बाजार में इस समय गेहूं का थोक दाम 2000 रुपये से लेकर 2150 रुपये प्रति क्विंटल तक है। यह दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1840 से अच्छा खासा ज्यादा है। इसके साथ ही कुछ ऐसे दलाल भी सक्रिय हैं जो किसानों को खेत पर ही पैसे दे देते हैं और माल बाद में ले जाते हैं। यह सहूलियत भी किसानों को सरकारी तौल केंद्रों से दूर किए हुए है।
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जिले के किसान इस बार सरकार को गेहूं बेचने से बच रहे हैं। हालत यह है कि मौजूदा क्रय सीजन के 36 दिनों में महज 29 क्विंटल खरीद ही हो पाई है। लक्ष्य के मुकाबले यह मात्रा शून्य के आसपास ही है। इसका कारण बाजार में एमएसपी से अधिक मूल्य मिलने को बताया जा रहा है।
यह आंकड़े मंगलवार को गेहूं खरीद प्रगति की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी के समक्ष रखे गए। इस पर जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कम खरीद का कारण और खरीद बढ़ाने के सुझाव अधिकारियों से मांगे। जिलाधिकारी ने प्रगति रिपोर्ट पूछी तो अधिकारियों ने लगभग शून्य बताया। बैठक में जानकारी दी कि जनपद में केवल तौल केंद्र विकासनगर में ही खरीद हो सकी है। वह भी महज 29 क्विंटल। कारण पूछने पर अधिकारियों ने बाजार में गेहूं का मूल्य एमएसपी से अधिक समेत भिन्न-भिन्न कारण बताए। लिहाजा किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे हैं। इसके अलावा दलालों का सक्रिय होना भी कारण बताया जा रहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि गेहूं खरीद में दलालों की भूमिका को शून्य किया जाना चाहिए। उन्होंने जिला कृषि अधिकारी को आदेश दिया कि वह सीधे किसानों को फोन करें और तौल केंद्रों तक आने के लिए कहें। साथ ही विभाग की ओर से एक विशेष स्थान पर वाहन भी किसानों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
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बता दें, इस बार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1840 रुपये है जिस पर जनपद में लगभग 2450 टन खरीद का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से खाद्य विभाग को 450 टन और सहकारिता विभाग को लगभग 2000 टन का लक्ष्य मिला था। जिले में कुल सात तौल केंद्र हैं, जिसमें चार खाद्य विभाग के और तीन सहकारिता विभाग के हैं।
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एमएसपी और किराया बढ़ाने का सुझाव
अधिकारियों ने बताया कि किसान किराए का 20 रुपये प्रति क्विंटल को भी कम मान रहे हैं। साथ ही एमएसपी भी उन्हें कम लग रहा है। लिहाजा शासन को प्रस्ताव भेजा जाए कि इस किराए और एमएसपी दोनों को बढ़ाया जाए।
क्या है बाजार में मूल्य
बाजार में इस समय गेहूं का थोक दाम 2000 रुपये से लेकर 2150 रुपये प्रति क्विंटल तक है। यह दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1840 से अच्छा खासा ज्यादा है। इसके साथ ही कुछ ऐसे दलाल भी सक्रिय हैं जो किसानों को खेत पर ही पैसे दे देते हैं और माल बाद में ले जाते हैं। यह सहूलियत भी किसानों को सरकारी तौल केंद्रों से दूर किए हुए है।