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टिहरी झील का नाम सुमन सागर हो
Updated Sat, 26 May 2018 02:00 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
श्रीदेव सुमन के 102वीं जयंती पर शुक्रवार को श्रीदेव सुमन संस्कृति, साहित्य एवं शिक्षा संस्थान की ओर से गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में साहित्यकार सोमवारी लाल उनियाल और उत्तराखंड राज्य आंदोलन परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष रविन्द्र जुगराण ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की। गोष्ठी का उद्घाटन श्रीदेव सुमन संस्कृति, साहित्य एवं शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. एमआर सकलानी ने किया।
इस मौके पर उत्तराखंड राज्य आंदोलन परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष रविन्द्र जुगराण ने कहा कि श्रीदेव सुमन जहां एक ओर स्वतंत्रा संग्राम सेनानी थे वहीं दूसरी ओर समाजसेवी, साहित्यकार व पत्रकार थे। श्रीदेव सुमन ने आयरलैंड के क्रांतिकारी मैक्सूनी के समकक्ष थे। उनके व्यक्तिव एवं कृतित्व को अखिल भारतीय स्तर पर पढ़ाना चाहिए। उन्होंने देहरादून में श्रीदेव सुमन की प्रतिमा लगाने और टिहरी झील का नाम सुमन सागर करने की मांग रखी। पत्रकार डॉ. मित्रानंद बडानी ने कहा कि श्रीदेव सुमन बहुमुखी प्रतिमा के धनी थे। तीर्थेन्द बहुगुणा ने कहा कि सुमन क्रांतिकारी भगत सिंह के समकक्ष थे, उन्होंने ही श्रीनगर में आयोजित कांग्रेस कमेटी 1938 में उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने की मांग की थी। गोष्ठी के अध्यक्ष सोमवारी लाल अनियाल ने कहा कि सुमन गांधी के प्रतिभूति थे। उन्होंने सत्य अहिंसा का मार्ग अपना कर 209 दिन जेल में बिताए और 84 दिन अनशन कर प्राण त्यागे। गोष्ठी में भारती पांडेय, डॉ. सत्यानंद बडोनी, जयदीप सकलानी, अखिलेश उनियाल, जयकृष्ण सकलानी, रमेश चंद्र उनियाल, तीर्थेन्द्र बहुगुणा, माधव नयन बडोनी मौजूद रहे।
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श्रीदेव सुमन के 102वीं जयंती पर शुक्रवार को श्रीदेव सुमन संस्कृति, साहित्य एवं शिक्षा संस्थान की ओर से गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में साहित्यकार सोमवारी लाल उनियाल और उत्तराखंड राज्य आंदोलन परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष रविन्द्र जुगराण ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की। गोष्ठी का उद्घाटन श्रीदेव सुमन संस्कृति, साहित्य एवं शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. एमआर सकलानी ने किया।
इस मौके पर उत्तराखंड राज्य आंदोलन परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष रविन्द्र जुगराण ने कहा कि श्रीदेव सुमन जहां एक ओर स्वतंत्रा संग्राम सेनानी थे वहीं दूसरी ओर समाजसेवी, साहित्यकार व पत्रकार थे। श्रीदेव सुमन ने आयरलैंड के क्रांतिकारी मैक्सूनी के समकक्ष थे। उनके व्यक्तिव एवं कृतित्व को अखिल भारतीय स्तर पर पढ़ाना चाहिए। उन्होंने देहरादून में श्रीदेव सुमन की प्रतिमा लगाने और टिहरी झील का नाम सुमन सागर करने की मांग रखी। पत्रकार डॉ. मित्रानंद बडानी ने कहा कि श्रीदेव सुमन बहुमुखी प्रतिमा के धनी थे। तीर्थेन्द बहुगुणा ने कहा कि सुमन क्रांतिकारी भगत सिंह के समकक्ष थे, उन्होंने ही श्रीनगर में आयोजित कांग्रेस कमेटी 1938 में उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने की मांग की थी। गोष्ठी के अध्यक्ष सोमवारी लाल अनियाल ने कहा कि सुमन गांधी के प्रतिभूति थे। उन्होंने सत्य अहिंसा का मार्ग अपना कर 209 दिन जेल में बिताए और 84 दिन अनशन कर प्राण त्यागे। गोष्ठी में भारती पांडेय, डॉ. सत्यानंद बडोनी, जयदीप सकलानी, अखिलेश उनियाल, जयकृष्ण सकलानी, रमेश चंद्र उनियाल, तीर्थेन्द्र बहुगुणा, माधव नयन बडोनी मौजूद रहे।
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