{"_id":"5aca77464f1c1be16b8b4737","slug":"101523218246-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सम्पूर्ण चिकित्सा विज्ञान है होम्योपैथिक : डॉ. सीमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सम्पूर्ण चिकित्सा विज्ञान है होम्योपैथिक : डॉ. सीमा
Updated Mon, 09 Apr 2018 01:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
विश्व होम्योपैथिक दिवस के अवसर पर रविवार को शांति होम्योपैथिक हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में लोगों को होम्योपैथी के बारे में जागरूक किया गया। कार्यक्रम में केंद्र संचालिका डॉ. सीमा कौशिक ने कहा कि होम्योपैथिक में एलोपैथी के मुकाबले बिना नुकसान बीमारी का सटीक इलाज मौजूद है। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी के जनक डॉ. क्रिस्टियन फ्रे डरिक सेमुअल हेनमन के 265 जन्मदिवस के उपलक्ष्य में होम्योपैथी के बारे में लोगों को जागरूक किया जाना आवश्यक है। ताकि होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति से जुड़ी भ्रांतियां दूर की जा सकें। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी किसी भी अन्य पद्धति का विकल्प नहीं, बल्कि एक संपूर्ण चिकित्सा विज्ञान है। यह दुर्भाग्य है कि चिकित्सा जगत में इससे दोयम दर्जें का व्यवहार होता है। इसका स्तर कम आंके जाने के कारण ही चिकित्सक न तो इसका गहन अध्ययन करते हैं, ना ही मरीज इसकी असीम क्षमता को पहचान पाते हैं। खास यह कि होम्योपैथिक दवाएं रोगी की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है और इसके साइड इफेक्ट भी नहीं हैं। कार्यक्रम में डॉ. सुषमा, डॉ. रेखा डॉ. नमीता, राजीव कौशिक, एमपी नैथानी, सुप्रिया, रुचिका रावत, मोनिका, दर्शन कौर आदि ने अपने विचार रखे।
विज्ञापन
विश्व होम्योपैथिक दिवस के अवसर पर रविवार को शांति होम्योपैथिक हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में लोगों को होम्योपैथी के बारे में जागरूक किया गया। कार्यक्रम में केंद्र संचालिका डॉ. सीमा कौशिक ने कहा कि होम्योपैथिक में एलोपैथी के मुकाबले बिना नुकसान बीमारी का सटीक इलाज मौजूद है। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी के जनक डॉ. क्रिस्टियन फ्रे डरिक सेमुअल हेनमन के 265 जन्मदिवस के उपलक्ष्य में होम्योपैथी के बारे में लोगों को जागरूक किया जाना आवश्यक है। ताकि होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति से जुड़ी भ्रांतियां दूर की जा सकें। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी किसी भी अन्य पद्धति का विकल्प नहीं, बल्कि एक संपूर्ण चिकित्सा विज्ञान है। यह दुर्भाग्य है कि चिकित्सा जगत में इससे दोयम दर्जें का व्यवहार होता है। इसका स्तर कम आंके जाने के कारण ही चिकित्सक न तो इसका गहन अध्ययन करते हैं, ना ही मरीज इसकी असीम क्षमता को पहचान पाते हैं। खास यह कि होम्योपैथिक दवाएं रोगी की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है और इसके साइड इफेक्ट भी नहीं हैं। कार्यक्रम में डॉ. सुषमा, डॉ. रेखा डॉ. नमीता, राजीव कौशिक, एमपी नैथानी, सुप्रिया, रुचिका रावत, मोनिका, दर्शन कौर आदि ने अपने विचार रखे।