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चीनी ड्रैगन से मुकाबले के लिए करने होंगे उपाय
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 28 Dec 2013 08:46 PM IST
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राज्य की चीन से लगती साढ़े तीन सौ किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मौजूद सैन्य ढांचे को लेकर न केवल सेना बल्कि उत्तराखंड सरकार की चिंताएं पूर्व सैनिकों की रैली में दिखी।
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सीमा पर सैन्य दृष्टि से मजबूत आधारभूत ढांचा विकसित करने की बात रखते हुए रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल एचबी काला ने इसके सामरिक महत्व को साझा किया।
मुख्य सचिव ने भी जताई चिन्ता
मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने अपने बतौर कुमाऊं आयुक्त कार्यकाल के अनुभवों को साझा किया। प्रदेश सरकार ने सीमा सड़कों को दुरुस्त करने को लेकर चिंता जताई है।
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मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने अपने बतौर कुमाऊं आयुक्त कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय उन्हें सीमा पर जाने का कई बार मौका मिला है। स्वयं 65 किमी पैदल चलकर सीमांत सड़कों का मुआयना किया है।
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आईटीबीपी के बंकर देखकर उन्हें लगा कि सैन्य सुविधाएं को मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमांत सड़कों के निर्माण के लिए राज्य सरकार अपने स्तर से हर संभव कोशिश कर रही है।
सड़क और हवाई सेवाओं पर जोर
मुख्यसचिव ने बाड़ाहोती के सामरिक महत्व को देखते हुए वहां सड़क और हैलीकाप्टर सेवाएं बेहतर बनाने पर जोर दिया। सुमना घटियाबगढ़ लिपूलेख मिलम आदि क्षेत्रों पर सड़कों का निर्माण जल्द कराया जाना चाहिए।
हालांकि वर्दी में मौजूद वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने सीधे तौर पर चीन सीमा पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन मंच पर मौजूद चीन सीमा संबंधी सैन्य मसलों के विशेषज्ञ रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल एचबी काला ने कहा कि चीन सीमा हमारा सबसे बड़ा फोकस का क्षेत्र है।
सीमा पार जिस तरह चीन ने अपने आधारभूत ढांचे को विकसित किया है उसको देखते हुए उत्तराखंड सहित चीन सीमा से लगने वाले अन्य राज्यों में सुविधाओं को बेहतर बनाना होगा। उन्होंने कहा कि सेना इसके लिए निरंतर प्रयास कर रही है, जिसमें और तेजी आनी चाहिए।