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कैसे निकलेगी स्त्री इस ‘फोबिया’ से बाहरv
Dehradun
Updated Wed, 23 Jan 2013 05:31 AM IST
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देहरादून। पति को इलाज के लिए जीप में स्वास्थ्य केंद्र ले जा रही महिला के दरिंदगी के डर से जीप से कूद जाने को महिला अधिकार कार्यकर्ता कतई उचित नहीं ठहरातीं, लेकिन इनका कहना यह भी है कि परिस्थितिवश ही महिला ने यह फैसला लिया होगा। रात का वक्त था और पति घायल थे, ऐसे में उसके पास कोई चारा नहीं था। दूसरे, नई दिल्ली गैंगरेप की घटना का ‘फोबिया’। समझ नहीं आ रहा कि इससे महिलाएं कैसे बाहर निकलेंगी।
महिला को साहस का परिचय देना चाहिए था। उसे अपने मोबाइल से पुलिस या किसी परिचित को इस संबंध में सूचित करना चाहिए था, लेकिन शायद उसके पास इतना समय नहीं था और उसे पुलिस की मदद पर भरोसा भी नहीं था। पति घायल थे और वह अकेली। लिहाजा, उसे जो उचित लगा, वह कर गुजरी। जरूरत इस बात की है कि रात के वक्त महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराया जाए।
--कमला पंत, उत्तराखंड महिला मंच
मानसिकता बदलने की जरूरत है। महिला अकेली थी और पति घायल। ऐसे में ड्राइवर को उसकी मदद करनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। महिला ने जो किया उसे उचित नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन उसके पास कोई और चारा भी घटना के बारे पढ़कर लग नहीं रहा। ऐसे में उसने तुरंत निर्णय लेते हुए कूदने का फैसला किया। आवश्यकता है कि इस तरह की घटना के फोबिया से महिलाओं को निकाला जाए।
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--गीता गैरोला, महिला समाख्या
महिला ने परिस्थितिजन्य फैसला लिया। रात का वक्त था। गंतव्य से दूर थी। पति घायल थे। ऐसे में वह क्या करती? नई दिल्ली गैंगरेप की घटना ने हालात कुछ इस कदर बना दिए हैं कि महिला के भीतर सुरक्षा को लेकर चिंता घर कर गई है। रात के वक्त अगर वह चिल्लाती भी तो जंगल में कोई सुनने वाला नहीं था। यही सब सोचकर वह कूदी होगी। पुलिस ने वही किया, जिसका अंदेशा था। उसने उसकी नहीं सुनी।
--गीता बलोदी, वरिष्ठ मनोविद्
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महिला को साहस का परिचय देना चाहिए था। उसे अपने मोबाइल से पुलिस या किसी परिचित को इस संबंध में सूचित करना चाहिए था, लेकिन शायद उसके पास इतना समय नहीं था और उसे पुलिस की मदद पर भरोसा भी नहीं था। पति घायल थे और वह अकेली। लिहाजा, उसे जो उचित लगा, वह कर गुजरी। जरूरत इस बात की है कि रात के वक्त महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराया जाए।
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--कमला पंत, उत्तराखंड महिला मंच
मानसिकता बदलने की जरूरत है। महिला अकेली थी और पति घायल। ऐसे में ड्राइवर को उसकी मदद करनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। महिला ने जो किया उसे उचित नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन उसके पास कोई और चारा भी घटना के बारे पढ़कर लग नहीं रहा। ऐसे में उसने तुरंत निर्णय लेते हुए कूदने का फैसला किया। आवश्यकता है कि इस तरह की घटना के फोबिया से महिलाओं को निकाला जाए।
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--गीता गैरोला, महिला समाख्या
महिला ने परिस्थितिजन्य फैसला लिया। रात का वक्त था। गंतव्य से दूर थी। पति घायल थे। ऐसे में वह क्या करती? नई दिल्ली गैंगरेप की घटना ने हालात कुछ इस कदर बना दिए हैं कि महिला के भीतर सुरक्षा को लेकर चिंता घर कर गई है। रात के वक्त अगर वह चिल्लाती भी तो जंगल में कोई सुनने वाला नहीं था। यही सब सोचकर वह कूदी होगी। पुलिस ने वही किया, जिसका अंदेशा था। उसने उसकी नहीं सुनी।
--गीता बलोदी, वरिष्ठ मनोविद्