जम्मू कश्मीर में तेजी से बढ़ रहा है साइबर क्राइम
- सावधान! ऑन लाइन ठगों का शिकार होने से बचें
- बिना मेहनत के धनवान बनने का लालच बनाता है ठगी का शिकार
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विस्तार
खुद को बैंक या बीमा कंपनी का कर्मी बताकर लोगों को ठगने वालों का नेटवर्क तेजी से बढ़ता जा रहा है। बिना मेहनत के अधिक पैसे कमाने की चाहत में लोग आसानी से इनके चंगुल में फंस जाते हैं। क्राइम ब्रांच के पास दर्ज होने वाले ऐसे मामलों की तादाद बीते साल ढाई गुना से भी अधिक हो गई।
पढ़े लिखे और प्रोफेशनल लोगों के नेटवर्क में कई विदेशी भी शामिल हैं। इस साल अब तक साइबर के 35 मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें 17 मामले बैंकों और अन्य जगहों में नौकरी,धोखाधड़ी, 12 जमीनों की हेरफेर, एक राहत दिलाने, एक फर्जी जन्म प्रमाणपत्र, 3 साइबर और एक एनबीएफसी शामिल हैं।
इस साल 22 अप्रैल तक 35 मामले दर्ज हो चुके हैं। 2015 में 68 मामले दर्ज हुए थे और 2014 में 25 मामले दर्ज हुए थे। क्राइम ब्रांच के एसएसपी मुबस्सर लतीफी का कहना है कि जागरूक न होने की वजह से लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। विभाग ने 20 हजार से अधिक परचे बांट कर इसके प्रति जागरूक करने की कोशिश की है।
ठगी के यह पांच तरीके
एटीएम कार्ड, मोबाइल टावर लगाने
लाटरी निकलना
बीमा पॉलिसी रिन्यू करना
बैंकों और अन्य विभागों में नौकरी दिलाने
फेसबुक पर दोस्ती के बहाने गिफ्टों का आदान प्रदान
ऐसे चलता है नेटवर्क
आन लाइन फ्राड करने वालों का नेटवर्क प्रोफेशनल और पढ़े लिखे लोग चला रहे हैं। झारखंड़ और छत्तीसगढ़ के मोबाइल और लैंडलाइन नंबरों से फोन काल लोगों को आते हैं और इन काल को दिल्ली में बैठे इन लोगों का ग्रुप आपरेट करता हैं।
यूं होती है ठगी
यह लोग एटीएम कार्ड उपभोक्ता को खुद को बैंक कर्मी बताकर फोन कर उनके एटीएम कार्ड का नंबर और पासवर्ड पूछ लेते हैं। इसके बाद उनके अकाउंट से पैसे निकाल लेते हैं। इमेल, एसएमएस और कालिंग के जरिए लॉटरी निकलने के मैसेज जाते हैं और अकाउंट नंबर मांगा जाता है।
बीमा उपभोक्ताओं की पॉलिसी रिन्यू करने के नाम पर अकाउंट नंबर मांग कर पैसे निकाले जाते हैं। बैंकों और अन्य विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की जा रही है। फेसबुक पर दोस्ती करने के बाद गिफ्टों के आदान प्रदान में पैसे ट्रांसफर करने को लेकर ठगी होती है। खुद को आरबीआई का कर्मी बताकर कस्टम विभाग का हवाला देकर पैसे ट्रांसफर होते हैं।
कहां से लेते हैं अकाउंट नंबर
बीमा कंपनियां और बैंक अपने उपभोक्ताओं के अकाउंट नंबर और बीमा पॉलिसी आउटसोर्स करते हैं। जहां ये मोबाइल नंबर और अकाउंट नंबर जनरेट करते हैं।
कैसे बचें इस ठगी से
हर बैंक और बीमा कंपनी के पास अपने उपभोक्ताओं की जानकारी है। वह कभी अपने उपभोक्ताओं से ऐसी जानकारियां नहीं मांगते। इसके लिए सावधान रहें। किसी भी अनजान के कहने पर उसके अकाउंट में पैसे ट्रांसफर न करें और उन्हें अपने अकाउंट की जानकारी न दें।
दस्तावेजों से छेड़छाड़
जमीनों के दस्तावेजों में हेरा फेरी करने के बाद किसी को जमीन को अपने नाम करने लेने के मामले भी क्राइम ब्रांच के पास पहुंचने लगे हैं।
क्राइम ब्रांच बढ़ाएगा सक्रियता
लोगों के मोबाइल नंबर पर क्राइम ब्रांच जम्मू ऐसे मामलों से सावधान रहने के मैसेज भेजेगा। इसमें पूरी जानकारियां रहेंगी। इसके अलावा क्राइम ब्रांच अपना नया फेसबुक अकाउंट बनाएगा। व्हाटसएप पर भी लोगों को ठगी के तरीके और इनसे बचने की जानकारियां दी जाएंगी।