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हैप्पी बर्थडे वीवीएस लक्ष्मण: वो पारियां, जिनसे वह बने 'गॉड ऑफ फोर्थ इनिंग्स'; ऑस्ट्रेलिया का घमंड कैसे तोड़ा?
Sun, 01 Nov 2026 11:13 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sun, 01 Nov 2026 11:13 AM IST
सार
भारतीय क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण एक नवंबर को अपना 52वां जन्मदिन मना रहे हैं। अपनी कलात्मक बल्लेबाजी और संकट के समय टीम को संभालने की क्षमता के कारण उन्हें 'गॉड ऑफ फोर्थ इनिंग' कहा जाता है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2001 में कोलकाता टेस्ट में खेली गई 281 रन की ऐतिहासिक पारी उनके करियर की सबसे यादगार उपलब्धियों में शामिल है। संन्यास के बाद भी वह भारतीय क्रिकेट में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
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वीवीएस लक्ष्मण
- फोटो : IANS
विस्तार
भारतीय क्रिकेट में कुछ बल्लेबाज अपनी आक्रामकता के लिए जाने गए तो कुछ अपनी तकनीक के लिए। लेकिन वीवीएस लक्ष्मण ऐसे खिलाड़ी रहे, जिन्होंने अपनी कलात्मक बल्लेबाजी और मुश्किल परिस्थितियों में धैर्य दिखाकर अलग पहचान बनाई। कलाई के जादूगर के नाम से मशहूर लक्ष्मण को टेस्ट क्रिकेट में भारत के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में गिना जाता है। खासकर चौथी पारी में उनका प्रदर्शन ऐसा रहा कि उन्हें 'गॉड ऑफ फोर्थ इनिंग' कहा जाने लगा।
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वीवीएस लक्ष्मण का जन्म एक नवंबर 1974 को हैदराबाद में हुआ था। वह रविवार को अपना 52वां जन्मदिन मना रहे हैं। सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग जैसे दिग्गजों की मौजूदगी वाले दौर में टेस्ट टीम में अपनी जगह बनाए रखना आसान नहीं था, लेकिन लक्ष्मण ने अपने प्रदर्शन से यह कर दिखाया।
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कोलकाता की 281 रन की पारी ने बदल दी पहचान
लक्ष्मण के करियर की सबसे यादगार पारियों में 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलकाता टेस्ट में खेली गई 281 रन की पारी सबसे ऊपर आती है। फॉलोऑन खेल रही भारतीय टीम के लिए उन्होंने राहुल द्रविड़ के साथ ऐतिहासिक साझेदारी की थी। दोनों की पारियों ने मैच का रुख पलट दिया और भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर क्रिकेट इतिहास की यादगार जीत दर्ज की।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लक्ष्मण का बल्ला अक्सर खूब चलता था। उन्होंने 2000 में सिडनी में 167 रन और 2003 में एडिलेड में 148 रन की शानदार पारियां खेलीं। इसके अलावा 2010 में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में 103 रन और 2004 में न्यूजीलैंड के खिलाफ नेपियर में 124 रन की पारी भी उनके करियर की खास उपलब्धियों में शामिल है। उनकी कई पारियां ऐसी रहीं, जिन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में भारत को जीत दिलाई या हार से बचाया।
लक्ष्मण के करियर की सबसे यादगार पारियों में 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलकाता टेस्ट में खेली गई 281 रन की पारी सबसे ऊपर आती है। फॉलोऑन खेल रही भारतीय टीम के लिए उन्होंने राहुल द्रविड़ के साथ ऐतिहासिक साझेदारी की थी। दोनों की पारियों ने मैच का रुख पलट दिया और भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर क्रिकेट इतिहास की यादगार जीत दर्ज की।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लक्ष्मण का बल्ला अक्सर खूब चलता था। उन्होंने 2000 में सिडनी में 167 रन और 2003 में एडिलेड में 148 रन की शानदार पारियां खेलीं। इसके अलावा 2010 में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में 103 रन और 2004 में न्यूजीलैंड के खिलाफ नेपियर में 124 रन की पारी भी उनके करियर की खास उपलब्धियों में शामिल है। उनकी कई पारियां ऐसी रहीं, जिन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में भारत को जीत दिलाई या हार से बचाया।
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134 टेस्ट और 86 वनडे में बनाए हजारों रन
लक्ष्मण ने नवंबर 1996 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। इसके बाद नौ अप्रैल 1998 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने वनडे करियर की शुरुआत की। उन्होंने भारत के लिए 134 टेस्ट मैच खेले और 225 पारियों में 17 शतक तथा 56 अर्धशतकों की मदद से 8,781 रन बनाए। टेस्ट में उनका सर्वोच्च स्कोर 281 रन रहा। वहीं, 86 वनडे मुकाबलों में उन्होंने 83 पारियां खेलीं और छह शतक तथा 10 अर्धशतकों के साथ 2,338 रन बनाए। लक्ष्मण ने 18 अगस्त 2012 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की थी। हालांकि, क्रिकेट से उनका जुड़ाव इसके बाद भी बना रहा।
लक्ष्मण ने नवंबर 1996 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। इसके बाद नौ अप्रैल 1998 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने वनडे करियर की शुरुआत की। उन्होंने भारत के लिए 134 टेस्ट मैच खेले और 225 पारियों में 17 शतक तथा 56 अर्धशतकों की मदद से 8,781 रन बनाए। टेस्ट में उनका सर्वोच्च स्कोर 281 रन रहा। वहीं, 86 वनडे मुकाबलों में उन्होंने 83 पारियां खेलीं और छह शतक तथा 10 अर्धशतकों के साथ 2,338 रन बनाए। लक्ष्मण ने 18 अगस्त 2012 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की थी। हालांकि, क्रिकेट से उनका जुड़ाव इसके बाद भी बना रहा।
संन्यास के बाद भी भारतीय क्रिकेट में निभा रहे अहम भूमिका
संन्यास के बाद लक्ष्मण ने कमेंट्री, आईपीएल और युवा खिलाड़ियों को तैयार करने में योगदान दिया। वह आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद के मेंटॉर भी रहे। उनके मेंटॉर रहते टीम ने 2016 में आईपीएल का खिताब जीता था। 13 दिसंबर 2021 को उन्हें राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) का प्रमुख बनाया गया। वह भारतीय क्रिकेट में युवा प्रतिभाओं को निखारने और खिलाड़ियों के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वह अंडर-19 और इंडिया-ए टीम के कोच की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
जरूरत पड़ने पर भारतीय सीनियर टीम के मुख्य कोच की भूमिका में भी नजर आते हैं। उनकी कोचिंग में भारतीय टीम ने एशियाई खेलों में दो बार स्वर्ण पदक जीता है। क्रिकेट में उनके योगदान के लिए लक्ष्मण को 2011 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। मैदान पर अपनी बल्लेबाजी से मुश्किल मैचों का रुख बदलने वाले लक्ष्मण अब पर्दे के पीछे रहकर भारतीय क्रिकेट की अगली पीढ़ी तैयार करने में जुटे हैं।
संन्यास के बाद लक्ष्मण ने कमेंट्री, आईपीएल और युवा खिलाड़ियों को तैयार करने में योगदान दिया। वह आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद के मेंटॉर भी रहे। उनके मेंटॉर रहते टीम ने 2016 में आईपीएल का खिताब जीता था। 13 दिसंबर 2021 को उन्हें राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) का प्रमुख बनाया गया। वह भारतीय क्रिकेट में युवा प्रतिभाओं को निखारने और खिलाड़ियों के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वह अंडर-19 और इंडिया-ए टीम के कोच की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
जरूरत पड़ने पर भारतीय सीनियर टीम के मुख्य कोच की भूमिका में भी नजर आते हैं। उनकी कोचिंग में भारतीय टीम ने एशियाई खेलों में दो बार स्वर्ण पदक जीता है। क्रिकेट में उनके योगदान के लिए लक्ष्मण को 2011 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। मैदान पर अपनी बल्लेबाजी से मुश्किल मैचों का रुख बदलने वाले लक्ष्मण अब पर्दे के पीछे रहकर भारतीय क्रिकेट की अगली पीढ़ी तैयार करने में जुटे हैं।