गांगुली के इस 'दांव' से कोच नहीं बस मैनेजर बनकर रह जाएंगे शास्त्री
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भारतीय क्रिकेट में टीम इंडिया के कोच को लेकर चल रहे ड्रामे का बेशक फिलहाल पटाक्षेप हो गया हो लेकिन लगता नहीं है यह मामला इतनी जल्दी ठंडा पड़ेगा। कोच के चयन के बाद अब कोचिंग स्टाफ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
हेड कोच बनाए गए रवि शास्त्री अपनी पसंद के बॉलिंग कोच को लेकर अड़े हैं तो कोच का चयन करने वाली तीन दिग्गजों की समिति CAC उनकी मांग पर कान धरने को ही तैयार नहीं है। शास्त्री की मांग है कि जहीर खान की जगह भरत अरुण को टीम का बॉलिंग कोच बनाया जाए लेकिन सीएसी ने जहीर खान के नाम पर ही मुहर लगा दी है, यहां तक की बोर्ड भी जहीर खान के नाम पर सहमति दे चुका है।
बहरहाल, इस पूरे विवाद के बीच एक बात जरूर निकलकर सामने आई कि कोच को चुनने-हटाने से इतर यह मामला सौरव गांगुली और रवि शास्त्री के बीच अहम के टकराव का भी बन गया, जो अब खुलकर सामने भी आ चुका है।
खास बात ये है कि शास्त्री बेशक कप्तान विराट कोहली के जबरदस्त समर्थन के चलते कोच की कुर्सी पाने में सफल रहे लेकिन गांगुली ने अंत में ऐसा दांव चल दिया कि शास्त्री कोच होकर भी कोच नहीं केवल मैनेजर की भूमिका में रह जाएंगे।
कोच बनाकर भी गांगुली ने काट दिए शास्त्री के पर
शास्त्री को दो साल के लिए टीम इंडिया का कोच बनाया गया है, वह वर्ल्ड कप तक यह जिम्मेदारी संभालेंगे। सूत्रों के अनुसार कोच का चयन करने वाली सीएसी के पास कुल छह नामों की लिस्ट थी, जिसमें से तीन दावेदार ही रेस में थे। खास बात ये है कि तीनों ही समिति के अलग अलग सदस्यों की पसंद थे।
मसलन, गांगुली जहां सहवाग को कोच बनाना चाह रहे थे वहीं वीवीएस लक्ष्मण आस्ट्रेलिया के टॉम मूडी को चाहते थे। जबकि सचिन तेंदुल्कर की खुलमखुल्ला पसंद रवि शास्त्री थे। यहां कप्तान कोहली का दबाव काम आया और शास्त्री बाजी मारने में सफल रहे, लेकिन गांगुली भी हार मानने के मूड़ में नहीं थे।
उन्होंने शास्त्री पर नकेल कसने के लिए दूसरा पैंतरा चला और जहीर खान को टीम का बॉलिंग कोच और राहुल द्रविड़ को टीम का बल्लेबाजी कोच बना दिया गया। खास बात ये है
कि टीम में पहले से ही संजय बांगर के तौर पर बैटिंग कोच मौजूद हैं, लेकिन शायद नई परिस्थितियों में वह आलराउंडर खिलाड़ियों को निखारने पर ज्यादा ध्यान लगाएं। हालांकि जहीर-द्रविड़ के बारे में बताया ये जा रहा है कि ये दोनों विदेशी दौरों पर ही टीम के साथ रहेंगे।
जहीर खान को बॉलिंग कोच बनाकर गांगुली ने चला बड़ा दांव
जानकारों की मानें तो टीम में एक साथ चार-चार कोच होने से शास्त्री की भूमिका अब कोच के बजाय मैनेजर की ज्यादा होकर रह गई है। क्योंकि खेल के हर क्षेत्र के लिए जब अलग अलग कोच की व्यवस्था कर दी गई है तो फिर इसका अंदाजा लगाना कठिन नहीं है कि उनके लिए कोच से ज्यादा काम अब मैनेजर का ही रह गया है।
यह बात भी दीगर है कि राहुल द्रविड़ और जहीर खान खेल और वजूद के मामले में भी शास्त्री से कहीं से भी कमतर नहीं हैं ऐसे में टीम में अब शास्त्री के लिए एकतरफा अपना निर्णय चलाना भी मुश्किल होगा।
शायद यही वजह है कि वह जहीर खान की जगह भरत अरुण को गेंदबाजी कोच बनाने की मांग पर अड़े हैं। बहरहाल उनकी दाल गलती नहीं दिख रही है, ऐसे में देखना होगा कि यह शीतयुद्ध आगे आगे क्या गुल खिलाता है।