क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के पसंदीदा 'आशियाना' पर चली जेसीबी, पढ़िए क्या है पूरा मामला
क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के मसूरी स्थित 'आशियाना डहलिया बैंक हाउस' पर शनिवार को फिर जेसीबी चला दी गई। भवन के ध्वस्तीकरण में एक जेसीबी और 20 से ज्यादा मजदूर लगाए गए हैं।
कोठी के बचा हिस्सा शनिवार से फिर तोड़ा गया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल भी मौजूद रहा। इस कार्रवाई के लिए लंढौर कैंट बोर्ड ने शुक्रवार को ही कर ली थी। बता दें कि सचिन जब भी मसूरी आते थे तो यहीं ठहरते थे। हालांकि यह कोठी उनके मित्र संजय नारंग के नाम पर है। लेकिन स्थानीय लोगों की मानें तो यह कोठी सचिन तेंदुलकर की है।
शनिवार को डहलिया बैंक कोठी को तोड़ने की कार्रवाई दोपहर 2.30 बजे से शुरू हुई। इस दौरान कैंट बोर्ड सीईओ जाकीर हुसैन, नायब तहसीलदार दयाराम शामिल रहे। बता दें कि संजय नारंग के भवन डहलिया बैंक में अवैध निर्माण किया गया था, जिस पर कैंट बोर्ड ने ध्वस्तीकरण करने के आदेश जारी किए थे।
इस मामले को लेकर संजय नारंग कोर्ट चले गए थे। लेकिन निचली आदलत और हाईकोर्ट से फैसला छावनी परिषद के पक्ष में आया। इसके बाद नारंग सुप्रीम कोर्ट भी गए, लेकिन यहां भी नारंग के पक्ष में फैसला नहीं आया। कोर्ट कोठी के निर्माण को अवैध बताते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश दिए थे।
हाईकोर्ट की ओर से आदेश दिया गया है भवन को ध्वस्त करने का आदेश
तीन अक्तूबर 2017 को छावनी परिषद ने संजय नारंग के भवन को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की। करीब एक सप्ताह चली कार्रवाई के दौरान नारंग ने कोर्ट से तीन माह का स्टे ले लिया था। इसके बाद कैंट बोर्ड को कार्रवाई रोकनी पड़ी। हालांकि तब तक कैंट बोर्ड ने 45 फीसदी कोठी तोड़ चुकी थी।
संजय नारंग भवन के दूसरे हिस्से को बचाने के लिए हाईकोर्ट चले गए, हाईकोर्ट ने तीन माह का स्टे दिया था। छावनी परिषद ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा और 10 जनवरी 2018 को हाईकोर्ट ने संजय नारंग के स्टे को समाप्त कर छावनी परिषद के पक्ष में निर्णय दिया। इसके बाद फिर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई।
शनिवार को मजिस्ट्रेट और पुलिस की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण किया गया। नायब तहसीलदार दया राम ने बताया कि संजय नारंग के भवन को ध्वस्त करने के हाईकोर्ट की ओर से आदेश दिए गए है। इस मौके पर छावनी परिषद के मनोनीत सभासद कर्नल शुक्ला, कार्यालय अधीक्षक सीबी लखेड़ा समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा।