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दो साल तक कैंसर से जूझने वाले इस दिग्गज ने टेस्ट क्रिकेट को लेकर दिया बड़ा बयान
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Published by: मुकेश कुमार झा
Updated Sat, 29 Feb 2020 12:03 AM IST
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पिंक गेंद
- फोटो : सोशल मीडिया
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न्यूजीलैंड के पूर्व महान तेज गेंदबाज सर रिचर्ड हेडली टी-20 क्रिकेट के प्रशंसक नहीं है और उनका मानना है कि अगर टेस्ट का ध्यान नहीं रखा गया तो क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप का बचे रहना मुश्किल होगा। हेडली ने कहा कि क्रिकेट के आधार को ‘बचाए’ रखना चाहिए और अगर संतुलन बनाया गया तो तीनों प्रारूप एक साथ बने रह सकते हैं।
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सर रिचर्ड हेडली
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उन्होंने कहा, ‘टेस्ट क्रिकेट को संरक्षित करना होगा। यह वह नींव है जिस पर खेल आधारित है। इसलिए हमें पांच दिवसीय मैच पर ध्यान देना होगा। जाहिर है टी-20 क्रिकेट के आने से इस खेल में क्रांति आई है, तीनों प्रारुप एक साथ बने रह सकते है। तीनों जारी रह सकते हैं लेकिन मुझे टी-20 क्रिकेट देखना पसंद नहीं जो इन दिनों क्रिकेट की दुनिया में राज कर रहा है।’
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सर रिचर्ड हेडली
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उन्होंने कहा कि अगर पारंपरिक प्रारूप पर ध्यान नहीं दिया गया तो टी-20 क्रिकेट का बचे रहना मुश्किल है। उन्होंने कहा, ‘शायद दुनिया भर में काफी टी-20 क्रिकेट खेला जा रहा। लेकिन मैं इस बात को लेकर आश्वस्त हूं कि यह खेल टी-20 क्रिकेट के सहारे ही जीवित नहीं रह पाएगा क्योंकि टी-20 प्रारूप वास्तविक क्रिकेट नहीं है। टेस्ट क्रिकेट ही असली क्रिकेट है।’
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सर रिचर्ड हेडली
- फोटो : सोशल मीडिया
अपने जमाने के दिग्गज क्रिकेटर रिचर्ड हेडली ने कहा कि दो साल तक कैंसर से जूझने के बाद उनका जिंदगी के प्रति नजरिया बदल गया। हेडली को जून 2018 में आंत का कैंसर हो गया था। इसके एक महीने बाद उन्हें ट्यूमर हटाने के लिए ऑपरेशन करवाना पड़ा। इसके बाद लीवर के कैंसर के लिए उनका फिर से ऑपरेशन किया गया था।
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सर रिचर्ड हेडली
- फोटो : सोशल मीडिया
हेडली ने कहा, ‘इससे मेरा जिंदगी के प्रति नजरिया बदल गया क्योंकि मुझे कभी इस तरह के लक्षण नजर नहीं आए थे। सब कुछ अचानक ही हुआ जब नियमित कोलोनोस्कोपी से इस समस्या का पता चला। अगले पांच साल काफी महत्वपूर्ण हैं। दो वर्ष बीत चुके हैं अब मैं सभी सामान्य काम कर रहा हूं केवल अपने खाने पर ध्यान देता हूं। मेरा वजन दस किलो कम हो गया।’ बता दें कि हेडली ने न्यूजीलैंड की ओर से 86 टेस्ट मैचों में 431विकेट लिए हैं।
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