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क्रिकेट में एक ऐसा रिकॉर्ड, जिसे तोड़ पाना आसान नहीं
Updated Thu, 18 Sep 2014 10:35 AM IST
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यूं तो क्रिकेट में अब तक बेशुमार रिकॉर्ड्स बने हैं और ढेरों हर महीने टूटते भी रहते हैं। हालांकि कुछ रिकॉर्ड ऐसे भी बनते हैं, जिन्हें तोड़ पाना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता।
इन्हीं रिकॉर्डों में से एक वर्ल्ड रिकॉर्ड 'मिस्टर भरोसेमंद' राहुल द्रविड़ के नाम दर्ज और उनके इस रिकॉर्ड को तोड़ पाना फिलहाल कुछ सालों के भीतर मुमकिन होता नहीं दिख रहा।
हम यहां जिस रिकॉर्ड की बात कर रहे हैं, वह है लगातार सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय पारियां (टेस्ट, वनडे और ट्वंटी-20) खेलने के बावजूद शून्य पर आउट नहीं होने का। द्रविड़ के वर्ल्ड रिकॉर्ड के अलावा 7 और ऐसे दिग्गज बल्लेबाज हैं, जिन्हें लगातार सौ से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय पारियां खेलने के बावजूद दुनिया का कोई भी गेंदबाज शून्य पर आउट नहीं कर सका। (रिकॉर्ड की चर्चा बढ़ते हुए क्रम में)
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इन्हीं रिकॉर्डों में से एक वर्ल्ड रिकॉर्ड 'मिस्टर भरोसेमंद' राहुल द्रविड़ के नाम दर्ज और उनके इस रिकॉर्ड को तोड़ पाना फिलहाल कुछ सालों के भीतर मुमकिन होता नहीं दिख रहा।
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हम यहां जिस रिकॉर्ड की बात कर रहे हैं, वह है लगातार सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय पारियां (टेस्ट, वनडे और ट्वंटी-20) खेलने के बावजूद शून्य पर आउट नहीं होने का। द्रविड़ के वर्ल्ड रिकॉर्ड के अलावा 7 और ऐसे दिग्गज बल्लेबाज हैं, जिन्हें लगातार सौ से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय पारियां खेलने के बावजूद दुनिया का कोई भी गेंदबाज शून्य पर आउट नहीं कर सका। (रिकॉर्ड की चर्चा बढ़ते हुए क्रम में)
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प्लेसिस जैसी शुरुआत तो कोई भी नहीं कर पाया
सौ से ज्यादा लगातार अंतरराष्ट्रीय पारियां खेलने और एक बार भी शून्य पर आउट नहीं होने वाले 8 बल्लेबाजों में शामिल फैफ डु प्लेसिस ही एकमात्र बल्लेबाज हैं जो अभी क्रिकेट खेल रहे हैं।
30 साल के इस दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज ने अब तक कुल 101 अंतरराष्ट्रीय पारियां खेली हैं और वह एक बार भी शून्य पर आउट नहीं हुए। उन्होंने 18 जनवरी, 2011 को भारत के खिलाफ वनडे मैच में उतरते हुए अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला, जिसमें उन्होंने 60 रनों की पारी खेली।
प्लेसिस ने हाल (6 सितंबर) ही में अपना अंतिम मैच हरारे में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला जिसमें वह अपने चौथे वनडे शतक से महज 4 रन से चूक गए थे। बावजूद इसके, उनके करियर की खास बात यह है कि 18 जनवरी, 2011 को अंतरराष्ट्रीय शुरू करने के बाद प्लेसिस अब तक क्रिकेट के तीनों प्रारूपों को मिलाकर 92 मैच खेल चुके हैं और हर बार खाता खोलने में कामयाब रहे हैं।
30 साल के इस दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज ने अब तक कुल 101 अंतरराष्ट्रीय पारियां खेली हैं और वह एक बार भी शून्य पर आउट नहीं हुए। उन्होंने 18 जनवरी, 2011 को भारत के खिलाफ वनडे मैच में उतरते हुए अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला, जिसमें उन्होंने 60 रनों की पारी खेली।
प्लेसिस ने हाल (6 सितंबर) ही में अपना अंतिम मैच हरारे में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला जिसमें वह अपने चौथे वनडे शतक से महज 4 रन से चूक गए थे। बावजूद इसके, उनके करियर की खास बात यह है कि 18 जनवरी, 2011 को अंतरराष्ट्रीय शुरू करने के बाद प्लेसिस अब तक क्रिकेट के तीनों प्रारूपों को मिलाकर 92 मैच खेल चुके हैं और हर बार खाता खोलने में कामयाब रहे हैं।
लगातार 103 पारियों में 0 पर आउट नहीं हुए युसूफ
कभी पाकिस्तान की क्रिकेट टीम में युसूफ योहाना के नाम से अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू करने वाले मोहम्मद यूसुफ ने बाद में धर्म परिवर्तन कर अपना नाम बदल लिया। लेकिन इससे पहले उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए अपने करियर की शुरुआत की।
डेढ़ दशक पहले युसूफ को पाक टीम की बल्लेबाजी की रीढ़ माना जाता था, उन्होंने कई मौकों पर अपनी टीम को संकट से बाहर निकाला।
29 जनवरी, 2006 को भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान फैसलाबाद टेस्ट में 126 रनों की शतकीय पारी खेलने के बाद यूसुफ अगले टेस्ट मैच (कराची) की पहली पारी में जीरो पर आउट हो गए। लेकिन इसके बाद उन्होंने गजब की बल्लेबाजी की और जनवरी, 2006 से लेकर 3 दिसंबर, 2009 तक एक बार भी जीरो पर आउट नहीं हुए। उन्होंने कालखंड में 103 अंतरराष्ट्रीय पारियां खेली और एक बार भी शून्य पर आउट नहीं हुए।
डेढ़ दशक पहले युसूफ को पाक टीम की बल्लेबाजी की रीढ़ माना जाता था, उन्होंने कई मौकों पर अपनी टीम को संकट से बाहर निकाला।
29 जनवरी, 2006 को भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान फैसलाबाद टेस्ट में 126 रनों की शतकीय पारी खेलने के बाद यूसुफ अगले टेस्ट मैच (कराची) की पहली पारी में जीरो पर आउट हो गए। लेकिन इसके बाद उन्होंने गजब की बल्लेबाजी की और जनवरी, 2006 से लेकर 3 दिसंबर, 2009 तक एक बार भी जीरो पर आउट नहीं हुए। उन्होंने कालखंड में 103 अंतरराष्ट्रीय पारियां खेली और एक बार भी शून्य पर आउट नहीं हुए।
400 से ज्यादा पारियां, 14 बार ही हुए शून्य पर आउट
लगातार अंतरराष्ट्रीय पारियों में शून्य पर आउट नहीं होने के मामले में पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और महान बल्लेबाजों में शुमार जावेद मियांदाद छठे नंबर पर आते हैं।
9 अक्टूबर, 1976 को न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट मैच खेलकर अपने करियर की शुरुआत करने वाले दाएं हाथ के बल्लेबाज मियांदाद का अंतरराष्ट्रीय करियर दो दशक (1975-1996) से ज्यादा समय तक चला।
अपने करियर के मध्य में वह लगातार 112 पारियों में खाता खोलने में सफल रहे। पाकिस्तान के सफलतम बल्लेबाजों में गिने जाने वाले मियांदाद के करियर का यह बेहतरीन समय था 23 जुलाई, 1897 से लेकर 18 जून, 1992 तक। मियांदाद ने टेस्ट और वनडे मिलाकर कुल 407 अंतरराष्ट्रीय पारियां खेली जिसमें वह महज 14 बार ही शून्य पर आउट हुए।
9 अक्टूबर, 1976 को न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट मैच खेलकर अपने करियर की शुरुआत करने वाले दाएं हाथ के बल्लेबाज मियांदाद का अंतरराष्ट्रीय करियर दो दशक (1975-1996) से ज्यादा समय तक चला।
अपने करियर के मध्य में वह लगातार 112 पारियों में खाता खोलने में सफल रहे। पाकिस्तान के सफलतम बल्लेबाजों में गिने जाने वाले मियांदाद के करियर का यह बेहतरीन समय था 23 जुलाई, 1897 से लेकर 18 जून, 1992 तक। मियांदाद ने टेस्ट और वनडे मिलाकर कुल 407 अंतरराष्ट्रीय पारियां खेली जिसमें वह महज 14 बार ही शून्य पर आउट हुए।
सिर्फ 4 बार शून्य पर आउट हुए जर्मी कोने
न्यूजीलैंड के दिग्गज आलराउंडर रहे हैं जर्मी कोने। दाएं हाथ से बल्लेबाजी करने के अलावा वह तेज गेंदबाज भी थे।
5 जनवरी, 1974 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज करने वाले कोने लगातार 117 पारियों में खाता खोलने में सफल रहे और इस सूची में शामिल वह पांचवें सबसे सफल बल्लेबाज भी हैं।
9 जनवरी, 1983 से लेकर वह अपने करियर के अंत तक एक बार भी शून्य पर आउट नहीं हुए। उन्होंने अपना अंतिम मैच 28 मार्च, 1987 को वेस्टइंडीज के खिलाफ (वनडे मैच) खेला था। उनके करियर की खास बात यह ही कि 165 अंतरराष्ट्रीय पारियों में वह सिर्फ 4 बार शून्य पर आउट हुए।
5 जनवरी, 1974 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज करने वाले कोने लगातार 117 पारियों में खाता खोलने में सफल रहे और इस सूची में शामिल वह पांचवें सबसे सफल बल्लेबाज भी हैं।
9 जनवरी, 1983 से लेकर वह अपने करियर के अंत तक एक बार भी शून्य पर आउट नहीं हुए। उन्होंने अपना अंतिम मैच 28 मार्च, 1987 को वेस्टइंडीज के खिलाफ (वनडे मैच) खेला था। उनके करियर की खास बात यह ही कि 165 अंतरराष्ट्रीय पारियों में वह सिर्फ 4 बार शून्य पर आउट हुए।
शतक लगाया, फिर 5 साल जीरो पर आउट नहीं हुए
वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाजों में गिने जाने वाले कार्ल हूपर ने भी अपने करियर की शुरुआत बेहद लाजवाब अंदाज में की। उन्हें आउट कर पाना किसी भी गेंदबाजी के लिए आसान नहीं होता था और जब पैर निकाल कर बल्लेबाजी करते थे तो बड़े से बड़े गेंदबाज भी उनकी शैली के आगे परेशान सा हो जाता था।
हूपर ने दिसंबर, 1987 में भारत के खिलाफ मुंबई में टेस्ट मैच खेलकर अपने करियर का आगाज किया था। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 20 बार खाता खोलने से चूकने वाले हूपर 6 दिसंबर, 1997 को पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच की पहली पारी में जीरो पर आउट हुए।
उसके बाद दूसरी पारी में उन्होंने शतक ठोक दिया, इसके बाद से 28 फरवरी, 2003 को केपटाउन में श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच में वह पहली बार शून्य पर आउट हुए। इस दौरान लगातार 122 पारियों में वह खाता खोलने में कामयाब हुए थे।
हूपर ने दिसंबर, 1987 में भारत के खिलाफ मुंबई में टेस्ट मैच खेलकर अपने करियर का आगाज किया था। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 20 बार खाता खोलने से चूकने वाले हूपर 6 दिसंबर, 1997 को पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच की पहली पारी में जीरो पर आउट हुए।
उसके बाद दूसरी पारी में उन्होंने शतक ठोक दिया, इसके बाद से 28 फरवरी, 2003 को केपटाउन में श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच में वह पहली बार शून्य पर आउट हुए। इस दौरान लगातार 122 पारियों में वह खाता खोलने में कामयाब हुए थे।
विकेटकीपिंग के साथ-साथ बैटिंग में भी दिखाया जलवा
इंग्लैंड के विकेटकीपर-बल्लेबाज एलेक स्टीवर्ट ने भारत में हुए नेहरू कप (वनडे क्रिकेट) से अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। उन्होंने अपना पहला वनडे मैच 15 अक्टूबर, 1989 को श्रीलंका के खिलाफ दिल्ली में खेला।
विकेट के पीछे कमाल दिखाने वाले स्टीवर्ट के बल्लेबाजी करियर में एक समय ऐसा आया जब वह लगातार 135 पारियों में एक बार भी शून्य पर आउट नहीं हुए। उन्होंने 17 मार्च, 1994 से लेकर 28 नवंबर, 1998 तक लगातार 135 पारियां खेली, लेकिन हर बार खाता खोलने में सफल जरूर रहे। 1989-2003 तक चले अपने करियर में वह 397 पारियों में महज 27 बार शून्य पर आउट हुए।
30 अक्टूबर, 1989 को नागपुर में पाकिस्तान के खिलाफ वनडे मैच में वह पहली बार खाता नहीं खोल पाए थे जो उनके करियर का छठा ही मैच था। उन्होंने अपना अंतिम मैच (टेस्ट) सितंबर, 2003 को ओवल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला था।
विकेट के पीछे कमाल दिखाने वाले स्टीवर्ट के बल्लेबाजी करियर में एक समय ऐसा आया जब वह लगातार 135 पारियों में एक बार भी शून्य पर आउट नहीं हुए। उन्होंने 17 मार्च, 1994 से लेकर 28 नवंबर, 1998 तक लगातार 135 पारियां खेली, लेकिन हर बार खाता खोलने में सफल जरूर रहे। 1989-2003 तक चले अपने करियर में वह 397 पारियों में महज 27 बार शून्य पर आउट हुए।
30 अक्टूबर, 1989 को नागपुर में पाकिस्तान के खिलाफ वनडे मैच में वह पहली बार खाता नहीं खोल पाए थे जो उनके करियर का छठा ही मैच था। उन्होंने अपना अंतिम मैच (टेस्ट) सितंबर, 2003 को ओवल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला था।
सवा 5 साल तक शून्य पर आउट ही नहीं हुए सचिन
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के बारे में कहा जाता है कि उनके नाम क्रिकेट में कितने रिकॉर्ड दर्ज हैं इसके पूरे आंकड़े जोड़कर बताए नहीं जा सकते। अपनी बेहतरीन बल्लेबाजी शैली से दुनिया के अनगिनत प्रशंसकों को अपना दीवाना बनाने वाले तेंदुलकर 24 साल तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते रहे।
तेंदुलकर ने 15 नवंबर, 1989 को पाकिस्तान के खिलाफ कराची में टेस्ट मैच खेलकर अपने करियर की शुरुआत की थी। वह 1990 से पहले अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत करने वाले उन गिने-चुने क्रिकेटरों में शामिल हैं जिन्हें क्रिकेट के तीनों संस्करणों में खेलने का मौका मिला।
उन्होंने 14 नवंबर, 2013 को वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना 200वां टेस्ट मैच खेलते हुए अपने करियर को विराम दिया था। तेंदुलकर ने 664 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कुल 782 पारियां खेली जिसमें वह 34 बार ही खाता खोलने से चूक गए। वह लगातार 136 पारियों में शून्य पर आउट नहीं हुए थे।
हालांकि वह अपने करियर के अंतिम पड़ाव में बेहतरीन फॉर्म में नहीं थे, लेकिन वह 23 जुलाई, 2008 से लेकर 14 नवंबर, 2013 तक एक बार भी शून्य पर आउट नहीं हुए।
तेंदुलकर ने 15 नवंबर, 1989 को पाकिस्तान के खिलाफ कराची में टेस्ट मैच खेलकर अपने करियर की शुरुआत की थी। वह 1990 से पहले अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत करने वाले उन गिने-चुने क्रिकेटरों में शामिल हैं जिन्हें क्रिकेट के तीनों संस्करणों में खेलने का मौका मिला।
उन्होंने 14 नवंबर, 2013 को वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना 200वां टेस्ट मैच खेलते हुए अपने करियर को विराम दिया था। तेंदुलकर ने 664 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कुल 782 पारियां खेली जिसमें वह 34 बार ही खाता खोलने से चूक गए। वह लगातार 136 पारियों में शून्य पर आउट नहीं हुए थे।
हालांकि वह अपने करियर के अंतिम पड़ाव में बेहतरीन फॉर्म में नहीं थे, लेकिन वह 23 जुलाई, 2008 से लेकर 14 नवंबर, 2013 तक एक बार भी शून्य पर आउट नहीं हुए।
द्रविड़ के नाम दर्ज है यह 'दुर्लभ' वर्ल्ड रिकॉर्ड
'द वॉल' के नाम से मशहूर राहुल द्रविड़ के नाम लगातार सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय पारियां खेलने के बावजूद शून्य पर आउट नहीं होने का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है।
उन्होंने जून, 1996 में लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ अपने टेस्ट करियर का आगाज किया। द्रविड़ अपने पहले ही मैच में शतक के बेहद करीब पहुंच गए थे लेकिन थोड़ा अनलकी रहे और 96 रन पर आउट होने के साथ ही शतक से महज 4 रन दूर रह गए।
द्रविड़ 2 जनवरी, 2000 से लेकर 8 फरवरी, 2004 तक लगातार 173 पारियों (ओवरऑल) में खाता खोलने में कामयाब रहे। इस दौरान मजेदार बात यह रही कि द्रविड़ दोनों ही बार सिडनी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच खेलते हुए शून्य पर आउट हुए थे।
पूर्व कप्तान द्रविड़ अपने बेमिसाल करियर में टेस्ट में सिर्फ 8 बार और वनडे में 13 बार ही खाता नहीं खोल सके। वह वनडे में लगातार 120 पारियों में शून्य पर आउट नहीं हुए।
उन्होंने जून, 1996 में लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ अपने टेस्ट करियर का आगाज किया। द्रविड़ अपने पहले ही मैच में शतक के बेहद करीब पहुंच गए थे लेकिन थोड़ा अनलकी रहे और 96 रन पर आउट होने के साथ ही शतक से महज 4 रन दूर रह गए।
द्रविड़ 2 जनवरी, 2000 से लेकर 8 फरवरी, 2004 तक लगातार 173 पारियों (ओवरऑल) में खाता खोलने में कामयाब रहे। इस दौरान मजेदार बात यह रही कि द्रविड़ दोनों ही बार सिडनी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच खेलते हुए शून्य पर आउट हुए थे।
पूर्व कप्तान द्रविड़ अपने बेमिसाल करियर में टेस्ट में सिर्फ 8 बार और वनडे में 13 बार ही खाता नहीं खोल सके। वह वनडे में लगातार 120 पारियों में शून्य पर आउट नहीं हुए।