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पहली बार टीम इंडिया ने लगाई 5 मैचों में अनोखी 'फिफ्टी'

Tue, 10 Mar 2015 12:30 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 10 Mar 2015 12:30 PM IST
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Indian bowlers bowled out 5 time in a row

क्रिकेट वर्ल्ड में टीम इंडिया की गेंदबाजी को अक्सर कमतर आंका जाता है और विपक्षी टीम मैच के दौरान भारत पर अंकुश बनाने के लिए गेंदबाजों के बजाए बल्लेबाजों पर रणनीति बनाती रही हैं।

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वर्ल्ड कप से पहले भी टीम इंडिया को अपने बल्लेबाजों से ही आस थी क्योंकि उसकी गेंदबाजी में अनुभवी तेज गेंदबाज इंशात शर्मा अनफिट होने के कारण टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही वापस भारत लौट आए। एक अन्य तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार भी चोट से संघर्ष कर रहे थे। जबकि टीम के शीर्ष फिरकी गेंदबाज आर अश्विन विदेशी धरती पर ज्यादा प्रभावशाली नहीं रहे हैं। भारत का गेंदबाजी विभाग अन्य टीमों की तुलना में बेहद कमजोर दिख रहा था।
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ऐसे में मोहम्मद शमी, मोहित शर्मा और उमेश यादव जैसे तेज गेंदबाजों के अलावा आलराउंडर रवींद्र जडेजा ही टीम के प्रमुख आक्रमण थे जिसके सामने विपक्षी टीम को छकाने का जिम्मा था। लेकिन जब वर्ल्ड कप शुरू हुआ तो भारतीय टीम में क्रांतिकारी बदलाव दिखाई दिया। भारतीय आक्रमण का काट ढूंढने में विपक्षी खिलाड़ियों को खासा संघर्ष करना पड़ा।
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इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि वर्ल्ड कप में टीम इंडिया ने अब तक 5 मैच खेले हैं और कोई भी विपक्षी टीम अपने कोटे के पूरे 50 ओवर भी नहीं खेल सकी है।

वर्ल्ड कप में भारत ने 5 मैचों में झटके पूरे 50 विकेट

Indian bowlers bowled out 5 time in a row

खिताब बचाने उतरी टीम इंडिया ने वर्ल्ड कप शुरू होते ही लाजवाब प्रदर्शन से अभी तक सभी को मंत्रमुग्‍ध कर रखा है। भारत को सबसे ज्यादा टेंशन गेंदबाजों से था लेकिन उन्होंने इसे गलत साबित किया और अभी तक 5 मैचों में किसी भी टीम को पूरे 50 ओवर खेलने का मौका नहीं दिया।

इस दौरान ऐसा भी नहीं है कि उसके सामने सारी छोटी टीमें ही उतरीं। 5 मैचों में उसके सामने यूएई और आयरलैंड को छोड़ दिया जाए तो पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज जैसी मजबूत टीमें भी थीं। टूर्नामेंट के अपने पहले ही मैच में टीम इंडिया ने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ जोरदार खेल दिखाया और 301 रनों का बड़ा लक्ष्य देने के बाद पाक टीम को 47 ओवर में ही 224 रनों पर समेट दिया।

इसके बाद भारत के सामने खिताब की प्रबल दावेदार दक्षिण अफ्रीकी टीम थी जिसे 308 रनों का बड़ा लक्ष्य देने के बाद गेंदबाजों ने लाजवाब खेल दिखाते हुए 41वें ओवर में ही पूरी टीम समेट दी। भारत के सामने अगली चुनौती यूएई के रूप में ‌थी जिसे महज 32वें ओवर में आउट कर 103 रनों के लक्ष्य को 19वें ओवर में ही हासिल कर लिया। जीत क‌ी हैट्रिक लगाने के बाद होली के दिन भारत के सामने वेस्टइंडीज चुनौती देने उतरा लेकिन पहले बल्‍लेबाजी करते हुए पूरी टीम 45वें ओवर में ही आउट हो गई। फिर उसने आसानी से लक्ष्य हासिल कर मैच जीत लिया।

गेंदबाजों के चमत्कारिक प्रदर्शन से सभी चकित हैं और उन्होंने अपना लाजवाब प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया के बाद न्यूजीलैंड में जारी रखा। मतलब यह कि पहले चारों मैच भारत ने ऑस्ट्रेलिया में खेले थे और आयरलैंड के खिलाफ मुकाबला न्यूजीलैंड में खेला गया जहां भारतीय गेंदबाजों ने एक बार फिर शानदार गेंदबाजी की और विपक्षी टीम को 50 ओवर से पहले ही समेट दिया।

लगातार 11वां वर्ल्ड कप खेल रही टीम इंडिया ने पहली बार वनडे क्रिकेट में लगातार 5 मैचों में विपक्षी टीमों को 50 ओवर से पहले ही समेटने का कारनामा किया है।

भारत ने ऑस्ट्रेलिया में ही दोहराया ऑलआउट करने का रिकॉर्ड

Indian bowlers bowled out 5 time in a row

टीम इंडिया के गेंदबाजों ने 30 साल बाद फिर से अपना जलवा दिखाना शुरू किया है। तीन दशक पहले भारतीय गेंदबाजों की वनडे क्रिकेट में जमक‌र तूती बोलती थी। कपिल देव की अगुवाई में 1983 में टीम इंडिया ने अपने गेंदबाजों के प्रदर्शन की वजह से वर्ल्ड कप जीतने का कारनामा किया था। उस समय क्रिकेट जगत में वेस्टइंडीज का दबदबा था जिसे भारत ने अपने गेंदबाजों के दम पर ही तोड़ा।

83 के वर्ल्ड कप में भारत ने 5 में से 4 बार विपक्षी टीम को ऑलआउट किया था। इसके 2 साल बाद 1985 में टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया में ही खेली गई बेंसन एंड हेडेज वर्ल्ड चैंपियनशिप के लीग चरण के सभी मैच में विपक्षी टीम को पूरे 50 ओवर खेलने का मौका नहीं दिया था और हर बार टीम को ऑलआउट कर दिया।

टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले 7 ‌देशों के इस टूर्नामेंट में भारत ने लाजवाब खेल दिखाया था और फाइनल से पहले सभी चारों मैच में विपक्षी टीम को 50 ओवर में ऑलआउट कर दिया। फाइनल में टीम इंडिया का मुकाबला था पाकिस्तान से और इस दिलचस्प मुकाबले में भारत ने खिताबी जीत हासिल जरूर की लेकिन वह पाक टीम के सभी 10 विकेट लेने में नाकाम रहा था‍। पाक टीम को ऑलआउट करने में वह महज एक विकेट से दूर रह गया।

दिलचस्प बात यह है कि 1985 में खेला गया फाइनल मैच आज ही के दिन यानी 10 मार्च को मेलबर्न में खेला गया था जिसमें भारत विजयी रहा था।

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