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यूपी में एक बार टीम से हटे तो समझो कैरियर चौपट
इलाहाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 02 Nov 2012 12:46 AM IST
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यूपीसीए (उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन) की बेरुखी युवा खिलाड़ियों पर भारी पड़ रही है। कई पूर्व रणजी खिलाड़ी टीम से बाहर होने के बाद दोबारा वापसी के लिए तरस रहे हैं। रविकांत और शिवाकांत जैसे दमदार क्रिकेटरों ने आजिज आकर यूपी से किनारा कर लिया। कई दूसरे पूर्व रणजी खिलाड़ी हिम्मत कर ट्रायल में उतरे जरूर लेकिन उन्हें कैंप तक में जगह नहीं मिली। अब वे क्रिकेट छोड़ने पर विचार कर रहे हैं। यूपीसीए के पूर्व चयनकर्ता और खिलाड़ी मानते हैं कि युवा क्रिकेटरों के साथ अन्याय हो रहा है।
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इलाहाबाद के ताहिर अब्बास और शिवाकांत शुक्ला ने जूनियर क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर 2006 में यूपी रणजी टीम में जगह बनाई थी। शिवाकांत ने 30 से ज्यादा मैच खेलकर कई मौकों पर यूपी को संकट से उबारा। ताहिर अब्बास ने चार मैच खेले लेकिन इसके बाद उन्हें दोबारा मौका नहीं मिला। रोहित प्रकाश लंबे समय तक यूपी के खेवनहार रहे लेकिन अब उनकी टीम में जगह नहीं है। हिम्मत कर ये खिलाड़ी इस बार रणजी ट्रायल में उतरे जरूर लेकिन इन्हें कैंप में भी जगह नहीं मिली।
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दोबारा वापसी न होने से निराश शिवाकांत शुक्ला ने यूपी छोड़ रेलवे से खेलना शुरू कर दिया। यूपी से करीब 20 मैच खेल चुके रविकांत अब गोवा से अपना कैरियर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। छह रणजी मैच खेल चुके लखनऊ के अंशुल कपूर त्रिपुरा चले गए। कैंप में जगह न मिल पाने से मायूस मेरठ के राहत इलाही ने तो क्रिकेट छोड़ने का ही मन बना लिया है।
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पूर्व रणजी खिलाड़ी और बीसीसीआई के सेलेक्टर रह चुके आनंद शुक्ला ने बातचीत में स्वीकार किया कि युवाओं के साथ ज्यादती हो रही है। चयन का आधार बेहतर प्रदर्शन होना चाहिए लेकिन यूपी में ट्रायल के आधार पर खिलाड़ियों का चयन किया जा रहा है। आनंद शुक्ला कहते हैं कि यूपी में ओपन डिस्ट्रिक और आल इंडिया क्रिकेट प्रतियोगिताएं न होने से खिलाड़ियों के पास खुद को साबित करने का मौका भी नहीं है। पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी ज्ञानेंद्र पांडेय भी मानते हैं कि यूपी में कुछ खिलाड़ियों को और मौके मिलने चाहिए।
खिलाड़ियों के साथ हो रहा भेदभाव
पूर्व रणजी खिलाड़ी मुश्ताक अली के मुताबिक यूपीसीए पर कानपुर के चयनकर्ताओं का दबदबा है। वे कानपुर के खिलाड़ियों को तरजीह दे रहे हैं। यही वजह है कि इलाहाबाद, लखनऊ, वाराणसी जैसे शहरों के होनहार क्रिकेटर दम तोड़ रहे हैं। यही कारण है कि भारतीय टीम के स्क्वायड में रह चुके ज्योति यादव जैसे क्रिकेटर कह रहे हैं कि यूपीसीए में तत्काल बदलाव की जरूरत है।