#MeToo विवादः जौहरी को क्लीन चिट, बीसीसीआई के सीईओ पद पर रहेंगे, डायना ने इस्तीफे की मांग रखी बरकरार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी को प्रशासकों की समिति (सीओए) की ओर से गठित की गई तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने यौन उत्पीड़न के आरोपों से क्लीन चिट दे दी है। कमेटी ने जौहरी पर लगाए गए आरोपों को निराधार, गलत और मनगढ़ंत करार दिया है।
सीओए चेयरमैन विनोद राय की ओर से मंजूरी मिलने के बाद जौहरी ने बुधवार को ही मुंबई स्थित बीसीसीआई ऑफिस में कार्यभार संभाल लिया। हालांकि जांच कमेटी की ओर से क्लीन चिट देने के बावजूद सीओए सदस्य डायना एडुल्जी ने जौहरी के इस्तीफे की मांग बरकरार रखी है। कमेटी ने जौहरी को क्लीन चिट जरूर दी है, लेकिन बर्मिंघम में महिला कर्मी से किए गए खराब व्यवहार के लिए उनकी लिंग समानता के मुद्दे पर काउंसिलिंग की सिफारिश की है।
डायना ने जौहरी के ऑफिस ज्वाइन करने का विरोध करते हुए कहा है कि कमेटी का फैसला सर्वसम्मति से नहीं हैं। कमेटी चेयरमैन जस्टिस राकेश शर्मा और महिला आयोग की पूर्व चेयरपरसन बरखा सिंह ने जौहरी पर लगाए आरोपों को गलत पाया है, जबकि वीणा गौड़ा ने उनकी काउंसिलिंग की सिफारिश की है।
डायना का कहना है कि यही कारण है कि जौहरी बोर्ड का ऑफिस ज्वाइन करने के लिए अयोग्य हैं और वह उनके ऑफिस नहीं संभालने के साथ इस्तीफे की मांग पर कायम हैं। वहीं राय ने जांच कमेटी के फैसले को उचित ठहराते हुए जौहरी को कार्यभार संभालने की अनुमति दे दी।
सच्चाई की जीत
जौहरी का कहना है कि सच्चाई सामने आ गई है। वह भगवान के शुक्रगुजार हैं। उन पर लगे आरोपों के चलते उन्होंने और उनके परिवार ने बेहद बुरा वक्त गुजारा है। जौहरी ने ऑफिस ज्वाइन करने की भी बात स्वीकारी।
आरोप साबित नहीं
जस्टिस शर्मा की ओर से रिपोर्ट विनोद राय को 21 नवंबर को साढ़े 11 बजे सौंप दी गई। इसे राय ने बोर्ड की लीगल कमेटी के समक्ष खोला और इसके अंश बुधवार को सार्वजनिक किए। जस्टिस सिंह ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि शिकायतें जौहरी पर लगे आरोपों को साबित नहीं कर पाती हैं। जौहरी पर ऑफिस के बाहर और अंदर लगे यौन उत्पीडऩ के आरोप तथ्यहीन हैं।
आरोपों के जरिए जौहरी की प्रतिष्ठा पर धब्बा लगाने के साथ उन्हें बोर्ड ऑफिस से बाहर किए जाने की कोशिश है। यही कारण है कि ट्वीट, ईमेल, सोशल मीडिया और शिकायत के जरिए जौहरी पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों पर उनके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई की जरूरत नहीं है।
सिंह ने यहां तक कहा है कि इस तरह मनगढ़ंत आरोप महिलाओं के कद और उनके काम करने के अवसरों को धक्का पहुंचाने वाले हैं। कमेटी के समक्ष बोर्ड की एंटी करप्शन यूनिट के चीफ नीरज कुमार, बोर्ड ट्रेजरॉर अनिरुद्ध चौधरी, रणजी खिलाड़ी शिशिर हटंग्गड़ी के अलावा आईपीएल याचिकाकर्ता आदित्य वर्मा पेश हुए। वर्मा ने कमेटी के फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के समक्ष 27 नवंबर को होने वाली सुनवाई में विनोद राय और जौहरी की कारगुजारी को रखेंगे।