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नवाचार: पहाड़ में बदलती खेती, युवाओं ने उठाया पारंपरिक पद्धति को बदलने का बीड़ा

Narendra Singh Bisht नरेन्द्र सिंह बिष्ट
Updated Wed, 26 Jul 2023 06:54 AM IST
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सार
जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न कठिनाइयों के बीच उत्तराखंड के युवा किसान ऐसी खेती अपना रहे हैं, जो उनके उज्ज्वल भविष्य के रूप में दिखाई दे रहे हैं।
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young farmers of Uttarakhand adopting new farming methods due to climate change impact on agriculture
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

वर्तमान समय में सभी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन का असर किसी न किसी रूप में देखने को मिल रहा है। जलवायु में होने वाले बदलावों ने सबसे अधिक कृषक वर्ग को प्रभावित किया है, चाहे वह मैदानी क्षेत्र के किसान हों या फिर पर्वतीय क्षेत्र के। मैदानी क्षेत्र में फिर भी आजीविका के कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान का खामियाजा कृषकों को ज्यादा ही उठाना पड़ता है, क्योंकि पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों के पास आय के दूसरे स्रोत नहीं हैं। वहीं प्राकृतिक कहर और जंगली जानवरों के नुकसान ने किसानों को खेती से विमुख होने के लिए विवश कर दिया है। अब किसान या तो पलायन के लिए मजबूर हैं या फिर मामूली तनख्वाह पर कहीं काम कर रहे हैं।



लेकिन इन कठिनाइयों के बीच नितिन महतोलिया और मनोज बिष्ट जैसे कुछ युवा किसानों ने हार नहीं मानी और खेती के ऐसे स्वरूप को अपनाया, जो अब उनके उज्ज्वल भविष्य की आस के रूप में दिखाई देने लगा है। उन्होंने कम समय में अधिक उत्पादन व नकदी खेती की ओर रुझान किया, जिसमें मशरूम, औषधीय पौधे व पॉलीहाउस खेती प्रमुख हैं। इनमें जंगली जानवरों का खतरा व मौसम की मार का प्रभाव न के बराबर होता है।


कृषि कार्य में हो रही कठिनाइयों को देखते हुए नैनीताल के महतोलिया गांव के युवा किसान नितिन ने अलग प्रकार से खेती करने का मन बनाया और पॉलीहाउस के जरिये फूलों की खेती शुरू की। उन्होंने गांव में आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में पॉलीहाउस की जानकारी ली। प्रथम वर्ष में ही पॉलीहाउस में लागत और मेहनताना के अलावा उन्हें 20,000 रुपये का लाभ हुआ। जो खेत अनाज उगाने में असमर्थ हो गए थे, वही आज नितिन को प्रति सीजन एक लाख रुपये की आय दे रहे हैं। नितिन के पॉलीहाउस में उगाए गए फूल आज केवल उत्तराखंड में ही नहीं, बल्कि राजधानी दिल्ली तक बेचे जा रहे हैं। नितिन अब गांव के अन्य युवाओं को भी इस ओर प्रेरित कर उन्हें प्रशिक्षित कर रहे हैं, ताकि वे पलायन की जगह घर पर ही रहकर आय सृजित कर सकें।

पॉलीहाउस की खेती के संबंध में भीमताल ब्लॉक के सहायक उद्यान अधिकारी आनंद सिंह बिष्ट का कहना है कि सरकार द्वारा ग्रामीण समुदाय के हित में विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिसमें से एक पॉलीहाउस खेती भी है। इस वर्ष नैनीताल में 23,000 वर्ग मीटर पर जिला एवं केंद्र योजना के अंतर्गत 163 लोगों को पॉलीहाउस खेती से लाभान्वित किया गया, जिसमें सब्जी और फूलों की खेती की जा रही है।

नितिन की तरह ही अल्मोड़ा स्थित लमगड़ा के युवा किसान मनोज बिष्ट ने पारंपरिक खेती से अलग मशरूम की खेती करने का फैसला किया। इसके लिए उन्हें घर वालों के विरोध का सामना करना भी पड़ा। लेकिन मनोज ने उनकी बातों को नकारते हुए इसमें सफलता हासिल की। आज उनका मशरूम हल्द्वानी, नैनीताल व अल्मोड़ा में बिक रहा है। उनके द्वारा गांव के 12 लोगों को रोजगार भी मिला है। उत्तराखंड पर्यटन के लिहाज से विश्व में अपनी खास पहचान रखता है, जिसके चलते लाखों की संख्या में पर्यटक प्रतिवर्ष यहां आते हैं, जहां उनके खाने में मशरूम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके चलते भीमताल को मशरूम उत्पादन का हब बनाने को लेकर जिला प्रशासन की योजना कामयाब हो रही है।

खाने में विशेषता उपलब्ध कराने के साथ-साथ बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए जिला प्रशासन के दिशा-निर्देशन में भीमताल विकास खंड के सोनगांव, भवाली व नथुवाखान क्लस्टर का गठन किया गया, जिसमें वर्ष 2022-23 में 131 लाभार्थियों को 156 बीजयुक्त मशरूम कंपोस्ट उपलब्ध करवाए गए। वास्तव में, सरकारी योजनाएं लोगों के हित में बनाई जाती हैं, जिससे युवाओं को काफी लाभ भी मिलता है। पर परियोजना समाप्ति के पश्चात रख-रखाव से संबंधित कोई विधि न होने के बाद अक्सर कई योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में दम तोड़ देती हैं। ऐसे में सरकार और संबंधित विभाग को ऐसी योजनाएं बनाने की जरूरत है, जिससे परियोजना समाप्ति के बाद भी योजनाएं निर्बाध गति से चलती रहें। इसके लिए स्वयं लाभान्वितों को भी आगे आने की जरूरत है, ताकि इसका फायदा उनके साथ-साथ अन्य बेरोजगार युवाओं को भी मिले। (चरखा फीचर)

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