फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   world map changing india support but makes clear no change in kashmir aksai chin stand

संप्रभुता की लकीरें: नक्शा सिर्फ भूगोल नहीं, राष्ट्रीय अस्मिता का आईना है

Thu, 10 Sep 2026 07:23 AM IST
नितिन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 10 Sep 2026 07:23 AM IST
विज्ञापन
सार
संयुक्त राष्ट्र के नए वैश्विक मानचित्र में भारत के संप्रभु हिस्सों के भ्रामक चित्रण से उपजा विवाद बेहद गंभीर है और इसे सामान्य तकनीकी त्रुटि मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मानचित्रों से जमीनी वास्तविकताएं नहीं बदलतीं, लेकिन कूटनीतिक जरूरतों के मद्देनजर विसंगतियों को भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
loader
world map changing india support but makes clear no change in kashmir aksai chin stand
दुनिया का नया नक्शा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के नए विश्व मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन की स्थिति को लेकर जो नया विवाद खड़ा हुआ है, वह बेहद गंभीर है और इसे सामान्य तकनीकी त्रुटि मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मानचित्र सिर्फ भूगोल का चित्रण नहीं होते, बल्कि किसी देश की संप्रभुता, उसकी सीमाओं और उसके राजनीतिक अस्तित्व के प्रतीक भी होते हैं। लिहाजा, भारत ने इस प्रस्तुति में सामने आई विसंगतियों को यूएन के संबंधित पक्षों के सामने उठाकर बिल्कुल उचित किया है। नई दिल्ली स्पष्ट तौर पर अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अपना अभिन्न हिस्सा मानती है। इसी तरह, भारत व पाकिस्तान के बीच एलओसी की भी वास्तविक स्थिति को मानचित्र में नहीं दर्शाया गया है। 


इस पूरे प्रकरण का एक दिलचस्प पहलू यह है कि भारत ने कुछ ही दिन पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव का समर्थन किया था। चार सितंबर को पारित इस प्रस्ताव का उद्देश्य दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों को मानचित्र पर अधिक सटीक और न्यायसंगत ढंग से प्रदर्शित करना है। यह समझना भी जरूरी है कि सदियों से अब तक नौवहन के लिए उपयोग होते रहे मानचित्र में ध्रुवों के निकट के भू-भाग वास्तविक आकार से काफी बड़े दिखाई देते हैं।


इसी समस्या को दूर करने के लिए नए प्रक्षेपण सामने आए हैं और यूएन का हालिया प्रस्ताव इसी सुधार से जुड़ा है। बुनियादी सिद्धांत के तौर पर भारत ने इस प्रक्रिया का समर्थन जरूर किया था, पर किसी मानचित्र के प्रक्षेपण को बदलना और किसी देश की अंतरराष्ट्रीय सीमा या क्षेत्रीय दावे को बदल देना, दो बिल्कुल अलग बातें हैं। 

विदेश मंत्रालय ने इसी अंतर को रेखांकित करते हुए उचित ही साफ किया है कि भारत का प्रस्ताव के पक्ष में मतदान उसके क्षेत्रीय दावों की किसी अलग व्याख्या की स्वीकृति नहीं माना जा सकता। उल्लेखनीय है कि अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन लंबे समय से अपना दावा करता रहा है और समय-समय पर वहां के स्थानों के नाम बदलने जैसी कार्रवाइयों के माध्यम से अपने दावे को प्रचारित करने का प्रयास करता है। भारत ने ऐसी कोशिशों को लगातार खारिज किया है। इसी तरह अक्साई चिन पर भी भारत व चीन के दावे अलग हैं।

ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों को वैश्विक मानचित्र पर इस तरह प्रदर्शित किया जाना कि वे दो देशों के बीच किसी पृथक क्षेत्र जैसे प्रतीत हों, स्वाभाविक रूप से भ्रम पैदा कर सकता है। यह सही है कि मानचित्रों से जमीन पर वास्तविकता नहीं बदलती, लेकिन ये जनमत और अंतरराष्ट्रीय धारणा को जरूर प्रभावित करते हैं। ऐसे में, दीर्घकालिक कूटनीतिक जरूरतों के मद्देनजर इससे जुड़ी विसंगतियों को जितना शीघ्र ठीक करा लिया जाए, उतना बेहतर।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed