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पीएमओ की तर्ज पर विकसित हुआ सीएम का सचिवालय

Fri, 12 Sep 2025 06:16 AM IST
Suresh Tiwari सुरेश तिवारी
Updated Fri, 12 Sep 2025 06:16 AM IST
सार

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री सचिवालय सिंगल पावर सेंटर बन गया है। अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने दो माह में कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित कर मुख्यमंत्री का विश्वास जीता। वे प्रतिदिन मॉनिटरिंग कर लंबित और महत्वपूर्ण मामलों की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं, जिससे प्रशासनिक व राजनीतिक कार्यकुशलता में तेजी आई है।

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CM's secretariat developed on the lines of PMO
मध्य प्रदेश की सियासी और प्रशासनिक हलचल को बताता कॉलम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का सचिवालय पीएमओ और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की तर्ज पर धीरे-धीरे सिंगल पावर सेंटर के रूप में विकसित हो गया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा में 1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नीरज मंडलोई ने दो महीने पहले मुख्यमंत्री सचिवालय के अपर मुख्य सचिव का कार्यभार संभाला और इस छोटी सी समयावधि में उन्होंने मुख्यमंत्री का विश्वास अर्जित करने में सफलता हासिल की है। यह पहली बार हो रहा है जब नीरज मंडलोई ने मुख्यमंत्री सचिवालय की सभी शाखाओं के कार्यों को स्ट्रीमलाइन किया है। वे स्वयं इन कार्यों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग करते हैं। फाइलों की ट्रैकिंग में तेजी आई है। खासतौर पर मुख्यमंत्री के समक्ष आने वाले आवेदनों में ए प्लस और मॉनिटरिंग के महत्वपूर्ण मामलों से संबंधित एक चार्ट प्रतिदिन मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, जिससे मुख्यमंत्री को यह मालूम पड़ जाता है कि कौन से कार्य लंबित हैं, कौन से महत्वपूर्ण हैं और किन कार्यों को तत्काल किया जाना है। इसके साथ ही राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी इस सचिवालय को मजबूत किया गया है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री सचिवालय ही अब सिंगल पावर सेंटर बन गया है।
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आखिर फूट ही पड़ा दो मंत्रियों का गुस्सा, मुख्यमंत्री भी नहीं रोक पाए
ग्वालियर की लगातार हो रही उपेक्षा को लेकर आखिर वहां के स्थानीय मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट का गुस्सा कैबिनेट मीटिंग में सामने आ ही गया। हुआ यह कि जब बैठक के दौरान ग्वालियर के मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, जो प्रदेश के उर्जा मंत्री भी हैं, ने यह कहा कि ग्वालियर शहर की स्थिति बदतर होती जा रही है, सड़कों पर गड्ढे बढ़ते जा रहे हैं, हालात नर्क जैसे हो गए हैं। हालत यह है कि नगर निगम कमिश्नर और कलेक्टर हमारी भी नहीं सुनते हैं। सीएम ने कहा कि इस बारे में वह अपने केबिन में बात कर सकते हैं, लेकिन तोमर माने नहीं और अपनी बात को जोरदार तरीके से प्रस्तुत करते रहे, इतना ही नहीं प्रदेश के जल संसाधन मंत्री और ग्वालियर के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट ने भी ऊर्जा मंत्री का समर्थन करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को ऊर्जा मंत्री की भावना के अनुरूप कोई कार्रवाई करनी चाहिए। बता दें, ये दोनों मंत्री सिंधिया कोटे के हैं। दोनों मंत्रियों की बात से कहीं ना कहीं यह इंगित होता है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी ग्वालियर के मामले में अंदर ही अंदर नाराज हैं और अपनी नाराजगी को न बताते हुए उन्होंने अपने मंत्रियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को संदेश देने की कोशिश की है।
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कलेक्टरों के तबादले अब कलेक्टर-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस के बाद
मध्य प्रदेश में दो-तीन दिन पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की जारी तबादला सूची में अति आवश्यक दिखने वाले दो-तीन जिलों के कलेक्टर ही बदले गए हैं। इसका मतलब यह है कि बड़े पैमाने पर कलेक्टरों की तबादला सूची का अभी भी इंतजार है। माना जा रहा है कि अब यह तबादला सूची कलेक्टर-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस और दशहरे के बाद ही आ सकती है। बता दें कि त्योहारी मौसम के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस 17 सितंबर से गांधी जयंती 2 अक्टूबर तक प्रदेश में सेवा पखवाड़ा अभियान चलाया जाएगा। राज्य सरकार के सर्वोच्च प्राथमिकता वाले इस अभियान को सफल बनाने की जवाबदारी कलेक्टरों को दी गई है। इसी अभियान के बाद मुख्यमंत्री द्वारा कलेक्टर-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की जानी है। माना जा सकता है कि इसमें कलेक्टरों के कार्यों का आकलन किया जाएगा और उसके बाद ही कलेक्टरों के तबादला आदेश जारी होंगे।
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पहली बार जनसंपर्क आयुक्त बने इंदौर संभाग के आयुक्त
मध्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था का अगर इतिहास देखा जाए तो अभी तक यह होता आया है कि इंदौर के कलेक्टर रहे आईएएस अधिकारी बाद में संचालक या आयुक्त जनसंपर्क विभाग बनाए जाते हैं। यह परंपरा भागीरथ प्रसाद, ओपी रावत से लेकर मनीष सिंह तक देखी जा सकती है। ऐसा भी हुआ है जब जनसंपर्क संचालक को कलेक्टर बनाया गया है। ऐसे उदाहरण पूर्व में डॉ. राजेश राजौरा और गोपाल रेड्डी के रूप में देखे जा सकते हैं, लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है जब जनसंपर्क आयुक्त को इंदौर संभाग का आयुक्त बनाया गया है। माना जा सकता है कि आयुक्त जनसंपर्क हमेशा से मुख्यमंत्री के अति विश्वसनीय अधिकारियों में शामिल रहे हैं और सुदाम खाड़े भी उसी परंपरा के अधिकारी हैं। ऐसे में सुदाम को प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण संभाग इंदौर की जवाबदारी दिया जाना नए संदेश दे रहा है।

अस्वीकरण: यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें। 
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