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जापान की नजर उत्तर प्रदेश पर: राज्य की विकास यात्रा का नया अध्याय

Durgesh Upadhyay दुर्गेश उपाध्याय
Updated Thu, 27 Aug 2026 04:48 PM IST
सार

जापान के पास उन क्षेत्रों में लंबा अनुभव है, जिनमें उत्तर प्रदेश अब अपनी क्षमता बढ़ाना चाहता है-उन्नत विनिर्माण, इंजीनियरिंग, गुणवत्ता नियंत्रण, तकनीक, कौशल विकास और बेहतर उत्पादन व्यवस्था। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के पास वह चीज है जिसकी बराबरी बहुत कम बाजार कर सकते हैं- बड़ा पैमाना।

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Uttar Pradesh and Japan are deepening their economic and cultural partnership
सीएम योगी का जापान दौरा - फोटो : PTI

विस्तार

पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश की आर्थिक और प्रशासनिक यात्रा को करीब से देखते हुए मेरा मानना है कि हाल में जापानी प्रतिनिधिमंडल का उत्तर प्रदेश दौरा केवल निवेश से जुड़ी सामान्य खबरों तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रतिनिधिमंडल की मुलाकातों से संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश और जापान के बीच संबंध अब अधिक गंभीर और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी की दिशा में बढ़ रहे हैं।

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2017 से पहले इस तरह के उच्चस्तरीय संवाद अपेक्षाकृत कम देखने को मिलते थे। उस समय कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और कारोबारी माहौल को लेकर बनी धारणा अक्सर विदेशी निवेशकों को उत्तर प्रदेश में संभावनाएं तलाशने से रोकती थी।
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हालिया बातचीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि निवेशकों की नजर में उत्तर प्रदेश की तस्वीर काफी बदली है। कुछ समय पहले तक राज्य में निवेश की चर्चा शुरू होते ही बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और सरकारी विभागों के साथ काम करने में आने वाली दिक्कतों की बात सामने आती थी। आज बातचीत तेजी से इस ओर बढ़ रही है कि उत्तर प्रदेश निवेशकों को क्या अवसर दे सकता है।
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मेरे विचार से यह एक बड़ा बदलाव है, जिसके पीछे निर्णायक नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी निवेश आकर्षित करने और निवेशकों की राह आसान बनाने में व्यक्तिगत रुचि दिखाई है।

इस बदलाव के कई संकेत जमीन पर दिखाई देते हैं। नए एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स सुविधाओं और उभरते निवेश केंद्रों ने कारोबारियों के उत्तर प्रदेश को देखने का नजरिया बदला है। इसके साथ ही प्रशासन के काम करने के तरीके में भी बदलाव आया है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने निवेश को आसान बनाने और समयबद्ध निर्णय लेने को अपनी आर्थिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है ।

ऐसे समय में जापान की रुचि उत्तर प्रदेश के लिए खास मायने रखती है

जापान-उत्तर प्रदेश की एक दूसरे से उम्मीद

जापान के पास उन क्षेत्रों में लंबा अनुभव है, जिनमें उत्तर प्रदेश अब अपनी क्षमता बढ़ाना चाहता है- उन्नत विनिर्माण, इंजीनियरिंग, गुणवत्ता नियंत्रण, तकनीक, कौशल विकास और बेहतर उत्पादन व्यवस्था। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के पास वह चीज है जिसकी बराबरी बहुत कम बाजार कर सकते हैं- बड़ा पैमाना।

विशाल आबादी, तेजी से बढ़ता उपभोक्ता बाजार, युवा कार्यबल और बेहतर होती कनेक्टिविटी उत्तर प्रदेश को उन कंपनियों के लिए स्वाभाविक विकल्प बनाती है, जो पारंपरिक औद्योगिक केंद्रों से आगे नए बाजार तलाश रही हैं।

हालांकि, उत्तर प्रदेश को इस संबंध को केवल आने वाले निवेश की राशि के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। असली अवसर जापानी विशेषज्ञता को राज्य के व्यापक औद्योगिक तंत्र का हिस्सा बनाने में है। 

उत्तर प्रदेश में काम करने वाली जापानी कंपनियों को स्थानीय विक्रेता और सप्लायर नेटवर्क विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। इससे प्रदेश के एमएसएमई बड़े विनिर्माण नेटवर्क और सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकेंगे। यदि उन्हें तकनीक, गुणवत्ता मानकों और प्रबंधन प्रणाली के क्षेत्र में उचित सहयोग मिले, तो इनमें से कई उद्यम आगे चलकर जापान और वैश्विक सप्लाई चेन में भी अपनी जगह बना सकते हैं। 

कौशल विकास एक और ऐसा क्षेत्र है, जिसमें दोनों पक्षों को फायदा हो सकता है। उद्योग की वास्तविक जरूरतों से अलग प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने के बजाय उत्तर प्रदेश जापानी कंपनियों के साथ मिलकर उन क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर सकता है, जहां वास्तविक निवेश आ रहा है। युवाओं को उद्योग की विशिष्ट जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित करने से रोजगार के नतीजे कहीं अधिक सार्थक होंगे। 

इस साझेदारी का एक सांस्कृतिक पक्ष भी है, जिस पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। बौद्ध धर्म से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों के कारण उत्तर प्रदेश का विशेष महत्व है, जबकि जापान की बौद्ध विरासत में गहरी और निरंतर रुचि रही है। सारनाथ, वाराणसी और ऐसे अन्य स्थलों को व्यापक पर्यटन और सांस्कृतिक साझेदारी का हिस्सा बनाया जा सकता है। विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग, अकादमिक आदान-प्रदान और युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रम इन संबंधों को और मजबूत कर सकते हैं। 

आने वाले कुछ वर्ष इस लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे। निवेश प्रस्ताव और समझौता ज्ञापन (MoU) रुचि के संकेत जरूर हैं, लेकिन उनकी वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब परियोजनाएं जमीन पर उतरें, स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा हों और उत्तर प्रदेश की कंपनियों को इस उभरते कारोबारी माहौल का लाभ मिलना शुरू हो।

यहीं से योगी आदित्यनाथ सरकार के सामने अगली चुनौती भी शुरू होती है। निवेशकों को आकर्षित करना काम का पहला चरण है। उनका भरोसा बनाए रखने के लिए नीतियों में निरंतरता, समस्याओं का त्वरित समाधान और निवेश की घोषणा के बाद भी प्रशासन की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। 

राज्य की निवेश संबंधी तस्वीर को बदलते हुए देखने के बाद मेरा मानना है कि शायद यही सबसे बड़ा बदलाव है। उत्तर प्रदेश अब केवल निवेशकों से यह नहीं कह रहा कि वे आएं और राज्य की संभावनाओं को देखें। अब वह अधिक स्पष्ट प्रस्ताव के साथ उनके सामने जा रहा है कि उत्तर प्रदेश उनके लिए क्या अवसर लेकर आया है। 

जापान इस अगले चरण में उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण साझेदार बन सकता है। 

यदि मौजूदा रुचि निरंतर निवेश, तकनीकी साझेदारी, मजबूत स्थानीय सप्लाई चेन और बेहतर कौशल विकास में बदलती है, तो उत्तर प्रदेश-जापान संबंधों का प्रभाव व्यक्तिगत परियोजनाओं से कहीं आगे जा सकता है। यह राज्य में अधिक प्रतिस्पर्धी विनिर्माण आधार तैयार करने और वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में उत्तर प्रदेश की स्थिति मजबूत करने में मदद कर सकता है। 

जापानी प्रतिनिधिमंडल के दौरे ने निश्चित रूप से काफी उम्मीदें जगाई हैं। अब महत्वपूर्ण यह है कि प्रतिनिधिमंडल के वापस लौटने के बाद क्या होता है। इस साझेदारी की सफलता का असली आकलन बैठकों और सम्मेलन कक्षों में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में लगने वाले कारखानों, बढ़ते कारोबार, तैयार हो रहे कुशल युवाओं और पैदा होने वाले रोजगार से होगा। 




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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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