उत्तराखंड के बागी विधायकों की उड़ी नींद, डर कहीं भाजपा पीछे ना खींच ले कदम
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दलबदल कानून के तहत जारी किए गए नोटिस ने भी उनकी बेचैनी बढ़ा दी है। बागियों को आशंका है कि बहुमत साबित करने से पहले कांग्रेस उन्हें अयोग्य न ठहरा दे। ऐसा हुआ तो हरीश बहुमत जुटा लेंगे।
गुड़गांव के होटल लीला में ठहरे कांग्रेस के बागी 9 विधायकों में शनिवार जैसी तल्खी और तेजी नहीं दिखी। रविवार को वह होटल से बाहर नहीं आ रहे थे। मुश्किल से लॉबी में आकर बात करने को राजी हुए। वह भी ऑफ द रिकॉर्ड बातचीत करने की शर्त रखी।
बहुमत भाजपा और बागियों के पास है
विधायक सुबोध उनियाल ने अमर उजाला से कहा कि राज्यपाल ने किसी साजिश के तहत हरीश रावत को इतना लंबा वक्त दिया है। नौ बागी विधायकों के खिलाफ दलबदल कानून के तहत जो नोटिस दिया गया है, उसका 26 को जवाब देना है। उन्हें आशंका है कि कहीं इसी दिन उन्हें कांग्रेस अयोग्य न ठहरा दे।
इसलिए उन लोगों ने राष्ट्रपति से मिलने का वक्त मांगा है। इस होटल में कांग्रेस के बागियों सहित 35 विधायक ठहरे हैं। भाजपा का एक विधायक जेल में है। इस तरह उनके पास बहुमत के लिए 36 का संख्या बल है।
इसलिए उनकी कोशिश है कि विधानसभा से पहले वह राष्ट्रपति के यहां परेड कर साबित कर दें कि हरीश रावत सरकार सदन का विश्वास खो चुकी है और बहुमत भाजपा और बागियों के पास है। ऑफ द रिकॉर्ड कुछ का कहना है कि उन्हें ऐसा लग रहा है भाजपा ने उनके साथ एक कदम आगे बढ़ाकर दो कदम पीछे खींच लिए हैं। कांग्रेस स्थिति के प्रबंधन में अब भाजपा से आगे दिख रही है।
भाजपा के 26 विधायक भी होटल लीला में ठहरे हुए हैं
-सुबह से शाम तक होटल में कांग्रेस के बागी और उत्तराखंड के भाजपा नेताओं के समर्थकों का आना-जाना लगा रहा। उत्तराखंड नंबर की गाड़ियों की लाइन लगी रही। यहां हरिद्वार के मेयर भी पहुंचे।
-बागी विधायकों का कहना है कि उन्होंने सरकार के खिलाफ जाने का फैसला राज्य हित में लिया है। उनकी खरीद-फरोख्त नहीं हुई है। हरीश रावत की सरकार गिरने की स्थिति में मुख्यमंत्री कौन बनेगा इस सभी चुप्पी साधे हुए हैं।