घाटी में अमरनाथ यात्रियों के जत्थों पर हमले की साजिश कर रहे आतंकी संगठन
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आतंकी संगठनों ने अमरनाथ यात्री जत्थों पर हमले की साजिश रची है। कश्मीर में सीआरपीएफ कैंपों, पुलिस स्टेशन और सैन्य शिविरों पर सीरियल हमले कर आतंकियों ने अपनी ताकत का अहसास कराने की कोशिश की है। हमले उस रूट पर भी हुए जहां से अमरनाथ यात्री पैदल गुजरते हैं।
अनंतनाग के आंचीडूरा में हमला कर चार रायफलें लूटीं गईं। यह स्थान अमरनाथ यात्रा के पैदल रूट पर है। आतंकी इस माह की 29 तारीख को शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा में खलल डालकर दहशत फैलाने के षड्यंत्र के तहत हमले कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने अभी और सीरियल हमलों की आशंका जताई है।
अनंतनाग का बिजबिहाड़ा और पहलगाम भी आतंकियों के आरामगाह बन गए हैं। पहलगाम के पास चंदनबाड़ी से ही अमरनाथ यात्रा शुरू होती है। यात्रा के दूसरे रूट बालटाल पर भी आतंकी हमले का खतरा मंडरा रहा है। सीरियल आतंकी हमलों के बाद अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर नई चुनौतियां खड़ी हुईं हैं। मंगलवार को चार घंटे में सात हमले करने वाले आतंकी अब तक पकड़े नहीं जा सके हैं।
अमरनाथ यात्रा के दौरान हो सकते हैं हमले
लश्कर ए तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और आईएस के संपर्क के जाकिर मूसा गुट ने अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने की रणनीति तय की है। सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि यात्रा से पहले अभी और बड़े हमलों की आशंका है। आतंकियों ने साजिश के तहत अमरनाथ यात्रा को प्रभावित करने के लिए दहशत का माहौल बनाने की रणनीति पर अमल शुरू किया है।
कश्मीर में आतंकी आईएस के खूनी रमजान के एलान पर अमल कर रहे हैं। घाटी में आईएस की मजबूत होती पकड़ ने सुरक्षा बलों के लिए नई चुनौतियां खड़ी की हैं। हिजबुल से अलग हुआ आतंकी जाकिर मूसा का गुट अब आईएस से जुड़ गया है।
जैश-ए-मोहम्मद और अल उमर ने लंबे अंतराल के बाद घाटी में सक्रियता बढ़ाई है। लश्कर-ए-तैयबा ने चेहरा बदलकर हमले की रणनीति बनाई है। अमरनाथ यात्रा से पहले सांप्रदायिक तनाव फैलाने के लिए धर्मस्थलों पर भी हमले की आशंका बनी हुई है।
आईएस के खूनी रमजान के एलान से संबंध तलाशने में जुटी एजेंसियां
सुरक्षा एजेंसियां अब भी घाटी में मंगलवार को हुए सीरियल हमलों के मामले में किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई हैं। डीजीपी एसपी वैद ने भले ही सीरियल हमलों के लिए जैश-ए-मोहम्मद को जिम्मेदार करार दिया हो, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इन हमलों को आईएस के खूनी रमजान के एलान से संबंध तलाशने में जुट गई हैं।
उड़ी में सैन्य शिविर पर आतंकी हमलों में 19 जवानों के शहीद होने के तुरंत बाद सेना ने हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद का हाथ बताया था, लेकिन बाद में जांच में हमला लश्कर की करतूत साबित हुई। इस बार हमलों के तुरंत बाद हिजबुल प्रवक्ता बुरहान यू दीन ने हमलों की जिम्मेदारी ली और मुजफ्फराबाद में अल उमर के कमांडर मुश्ताक अहमद ने कहा कि हमला अल उमर और जैश ने मिलकर किया है। इन दावों और पुलिस के प्रारंभिक इनपुट से मामला उलझ गया है।
घाटी में सेना और सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई में हिजबुल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। हिजबुल में फूट भी पड़ गई है। इस कारण हिजबुल से जुड़े आतंकी अब जैश-ए-मोहम्मद और आईएस से जुड़ रहे हैं। इससे पहले कश्मीर में जैश की पकड़ लगभग खत्म होती दिख रही थी।
दक्षिणी कश्मीर में बढ़ रहे आईएस के संपर्क वाले आतंकी