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सफाई कर्मचारियों की 34वें दिन भी हड़ताल, शहर में 150 टन कूड़ा
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08jjrp05- नगर परिषद कार्यालय में धरना देते सफाई कर्मचारी। संवाद
- फोटो : File Photo
झज्जर। नगर पालिका कर्मचारी संघ हरियाणा व सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के आह्वान पर नगर परिषद झज्जर के सफाई कर्मचारी 34वें दिन भी हड़ताल पर हैं। मंगलवार, 7 सितंबर 2026 को उनका धरना नगर परिषद के प्रांगण में जारी रहा। शहर से 2 सितंबर 2026 से कूड़े का उठान नहीं हुआ है, जिससे जगह-जगह करीब 150 टन कूड़ा जमा हो गया है।
बाजारों, कॉलोनियों व मुख्य मार्गों पर कूड़े के ढेर लगे हैं। नगर परिषद के 109 कर्मचारी हड़ताल व धरने में शामिल हैं। मंगलवार, 7 सितंबर 2026 को सर्व कर्मचारी संघ के राजेंद्र जुलाना, जिला प्रधान रामवीर, जिला सचिव देवेंद्र सहरावत सहित कई नेता कर्मचारियों के समर्थन में आए। इकाई प्रधान शिवम चावरिया ने धरने की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा मांगों का समाधान न होने तक आंदोलन तेज होगा। इसकी जिम्मेदारी हरियाणा सरकार की होगी।
कर्मचारियों ने संघ व सरकार के बीच हुए समझौते को लागू करने की मांग की। उन्होंने फरीदाबाद अग्निकांड में शहीद हुए कर्मचारियों के परिवार को एक-एक करोड़ रुपये और सरकारी नौकरी देने को कहा। पैरोल के सफाई कर्मचारियों, सीवरमैन, फायरमैन व चालकों को नियमित करने की मांग भी शामिल है। झज्जर के 2014 में हटाए गए 61 कर्मचारियों को वापस ड्यूटी पर लेने की भी मांग है। इसके अतिरिक्त, ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर 20 लाख रुपये और सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तथा ठेका प्रथा बंद करने की मांग की गई।
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बाजारों, कॉलोनियों व मुख्य मार्गों पर कूड़े के ढेर लगे हैं। नगर परिषद के 109 कर्मचारी हड़ताल व धरने में शामिल हैं। मंगलवार, 7 सितंबर 2026 को सर्व कर्मचारी संघ के राजेंद्र जुलाना, जिला प्रधान रामवीर, जिला सचिव देवेंद्र सहरावत सहित कई नेता कर्मचारियों के समर्थन में आए। इकाई प्रधान शिवम चावरिया ने धरने की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा मांगों का समाधान न होने तक आंदोलन तेज होगा। इसकी जिम्मेदारी हरियाणा सरकार की होगी।
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कर्मचारियों ने संघ व सरकार के बीच हुए समझौते को लागू करने की मांग की। उन्होंने फरीदाबाद अग्निकांड में शहीद हुए कर्मचारियों के परिवार को एक-एक करोड़ रुपये और सरकारी नौकरी देने को कहा। पैरोल के सफाई कर्मचारियों, सीवरमैन, फायरमैन व चालकों को नियमित करने की मांग भी शामिल है। झज्जर के 2014 में हटाए गए 61 कर्मचारियों को वापस ड्यूटी पर लेने की भी मांग है। इसके अतिरिक्त, ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर 20 लाख रुपये और सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तथा ठेका प्रथा बंद करने की मांग की गई।
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