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कच्चे तेल की खोज में ओएनजीसी ने शुरू कराई बोरिंग
Updated Tue, 13 Nov 2018 11:54 PM IST
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खेत में बोरिंग की तैयारी करते कर्मचारी। अमर उजाला
- फोटो : amar ujala
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ओएनजीसी की टीम ने नगला सबी पश्चिम गांव में बोरिंग और वैज्ञानिक विधियों से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की खोज शुरू कर दी है। मंगलवार को टीम के आने और काम में लग जाने की खबर फैलते ही देखने के लिए आसपास के गांवों से लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
जमीन के अंदर डीजल-पेट्रोल की मौजूदगी के संकेत मिलने पर ऑयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन (ओएनजीसी) की टीम मंगलवार को चौबिया के नगला सबी पश्चिम गांव में पहुंची। टीम के साथ मौजूद श्यामसिंह व रामूसिंह ने बताया कि प्रदेश में कच्चे तेल की खोज के लिए अलीगढ़ से कानपुर तक प्रयास चल रहे हैं। यह कार्य करीब दो महीने से चल रहा है और तकरीबन छह महीने तक चलेगा। जहां भी तेल होने के संकेत मिले हैं। उस जगह पर 100 फीट गहरी बोरिंग कराई जा रही है।
यह बोरिंग कई जगह होगी। बोरिंग से 60 मीटर की दूरी पर जीपीएस सैटेलाइट सिस्टम लगाए जा रहे हैं। बोरिंग होने के बाद शूटर मशीन से जमीन के अंदर ब्लास्ट किया जाएगा जो करीब सात किमी गहराई तक जाएगा। इसके बाद जीपीएस सिस्टम से तेल के भंडार होने का पता चलेगा।
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उन्होंने बताया कि परीक्षण कार्य के लिए यहां पर गांव नगला सबी पश्चिमी, भोजपुर रामायन, नगला पाये, मुगलपुरा, नगला हरजू आदि अन्य गांवों को मिलाकर करीब पांच किमी दायरे को शामिल किया गया है। इसके लिए जगह-जगह तंबू लगाकर करीब पांच सौ मजदूरों को रखा गया है।
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जमीन के अंदर डीजल-पेट्रोल की मौजूदगी के संकेत मिलने पर ऑयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन (ओएनजीसी) की टीम मंगलवार को चौबिया के नगला सबी पश्चिम गांव में पहुंची। टीम के साथ मौजूद श्यामसिंह व रामूसिंह ने बताया कि प्रदेश में कच्चे तेल की खोज के लिए अलीगढ़ से कानपुर तक प्रयास चल रहे हैं। यह कार्य करीब दो महीने से चल रहा है और तकरीबन छह महीने तक चलेगा। जहां भी तेल होने के संकेत मिले हैं। उस जगह पर 100 फीट गहरी बोरिंग कराई जा रही है।
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यह बोरिंग कई जगह होगी। बोरिंग से 60 मीटर की दूरी पर जीपीएस सैटेलाइट सिस्टम लगाए जा रहे हैं। बोरिंग होने के बाद शूटर मशीन से जमीन के अंदर ब्लास्ट किया जाएगा जो करीब सात किमी गहराई तक जाएगा। इसके बाद जीपीएस सिस्टम से तेल के भंडार होने का पता चलेगा।
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उन्होंने बताया कि परीक्षण कार्य के लिए यहां पर गांव नगला सबी पश्चिमी, भोजपुर रामायन, नगला पाये, मुगलपुरा, नगला हरजू आदि अन्य गांवों को मिलाकर करीब पांच किमी दायरे को शामिल किया गया है। इसके लिए जगह-जगह तंबू लगाकर करीब पांच सौ मजदूरों को रखा गया है।