डेंगू और चिकनगुनिया पर हाईकोर्ट गंभीर, केंद्र व दिल्ली सरकार को दिए निर्देश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने राजधानी में लगातार बढ़ रहे डेंगू व चिकनगुनिया के मरीजों की बढ़ती संख्या को गंभीरता से लिया है। अदालत ने केंद्र, दिल्ली सरकार समेत अन्य सिविक एजेंसियों को अस्पतालों में इन मरीजों के इलाज की उचित व्यवस्था करने समेत कई और जरूरी निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने आदेश में कहा कि सभी अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स व अन्य स्टाफ समेत बेड की संख्या बढ़ाई जाए।
साथ ही इन बीमारियों की जांच व इनमें दी जाने वाली सभी दवाइयोंका पर्याप्त स्टॉक रखा जाए। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि जिस हिसाब से ये बीमारियां बढ़ रही हैं उसे देखते हुए जरूरत पड़ने पर गैर सरकारी संस्था व रिटायर्ड डॉक्टर आदि।
बेड बढ़ाने समेत सेवानिवृत्त चिकित्सकों की सेवा लेने का भी सुझाव
इस महामारी से लड़ने में मदद ली जाए। सभी जिम्मेदार अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि डेंगू व चिकनगुनिया से पीड़ित मरीजों को सरकारी व निजी अस्पतालों में इलाज मिले। इसके अलावा याची के सुझावों पर भी गौर करने की जरूरत है।
खंडपीठ ने यह आदेश अधिवक्ता शाहिद अली द्वारा दायर जनहित याचिका पर दिया है। याची ने आरोप लगाया था कि सरकार व निगम डेंगू के प्रति गंभीर नहीं है और इस बीमारी के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
अदालत ने कहा कि डेंगू मुद्दे पर इस अदालत ने 2015 में भी दिशा निर्देश दिए थे उन पर भी अमल जारी रखा जाए। याचिकाकर्ता ने करीब 20 सुझाव दिए हैं, जिनमें बीमारी से बचने के लिए इलाकों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा जाए और कर्मचारी लगाए जाएं।
काम में कोताही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई हो। कूड़ा समय से उठाया जाए, सभी नालों को ढका जाए। साथ ही एक कमेटी का गठन किया जाए जो इन बीमारियों से निपटने के लिए किए गए उपायों जैसे डॉक्टर, पंप, फॉगिंग मशीन पर नजर रखे।