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अजीब फरमानः मंदिरों की तरह सरकारी स्कूलों में भी लगेंगे दान पात्र
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 22 Jun 2017 02:01 PM IST
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राजस्थान शिक्षा विभाग ने एक अजीब फरमान जारी कर दिया है। नए फरमान के मुताबिक अब स्कूलों में मंदिरों की तर्ज पर दान पात्र रखे जाएंगे। दान की राशि से संबंधित स्कूल का विकास किया जाएगा।
राजस्थान शिक्षा विभाग के आदेशानुसार अब प्रदेश के हर सरकारी स्कूल को दानपात्र रखना अनिवार्य होगा। इन दानपात्रों पर 'शिक्षा का दान,सरस्वती का सम्मान' का नारा लिखा होगा। स्कूल में आने वाले परिजन और भामाशाह (दानदाता) इस दान पात्र में जो भी राशि डालेंगे, उसे स्कूल के विकास के लिए काम में लिया जाएगा। इन दान पात्रों को अनिवार्य रूप से महीने में एक बार खोला जाएगा।
शिक्षा विभाग द्वारा यह आदेश राजस्थान सरकार की भामाशाह योजना के तहत दिया गया, क्योंकि राजस्थान सरकार हर साल विकास कार्यों के लिए राशि दान करने वाले दानदाताओं को सम्मानित करती है।
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लेकिन खास यह है कि दान में आने वाली राशि केवल खास स्कूलों के लिए ही दी जाती है, ऐसे में कई जरुरतमंद स्कूलों में यह राशि नहीं पहुंचने से कई स्कूलों में छोटे मोटे विकास कार्य नहीं हो पाते हैं।
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राजस्थान शिक्षा विभाग के आदेशानुसार अब प्रदेश के हर सरकारी स्कूल को दानपात्र रखना अनिवार्य होगा। इन दानपात्रों पर 'शिक्षा का दान,सरस्वती का सम्मान' का नारा लिखा होगा। स्कूल में आने वाले परिजन और भामाशाह (दानदाता) इस दान पात्र में जो भी राशि डालेंगे, उसे स्कूल के विकास के लिए काम में लिया जाएगा। इन दान पात्रों को अनिवार्य रूप से महीने में एक बार खोला जाएगा।
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शिक्षा विभाग द्वारा यह आदेश राजस्थान सरकार की भामाशाह योजना के तहत दिया गया, क्योंकि राजस्थान सरकार हर साल विकास कार्यों के लिए राशि दान करने वाले दानदाताओं को सम्मानित करती है।
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लेकिन खास यह है कि दान में आने वाली राशि केवल खास स्कूलों के लिए ही दी जाती है, ऐसे में कई जरुरतमंद स्कूलों में यह राशि नहीं पहुंचने से कई स्कूलों में छोटे मोटे विकास कार्य नहीं हो पाते हैं।
दान को लेकर शिक्षा विभाग के अफसरों ने दिया ये जवाब
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- फोटो : डेमो पिक
अब स्कूलों में दानपात्रों के होने से दान में आनी वाली राशि से हर स्कूल में विकास कार्य हो पाएंगे। हालांकि राज्य सरकार की ओर से भी प्राथमिक और सैकेंडरी स्कूलों को क्रमश: 10 से 15 हजार और 50 हजार की राशि अनुदानित की जाती है, मगर यह राशि विकास कार्यों के लिए पर्याप्त नहीं रहती है।
इस मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह लोग मंदिरों में पैसा दान करते हैं उस तरह ही स्कूलों में भी वो पैसा दान कर सकते हैं। आखिर स्कूल भी तो शिक्षा का मंदिर होता है।
विभाग का मानना है कि हर स्कूल में दानपात्र होने से दानदाताओं का स्कूलों से जुड़ाव भी रहेगा, वहीं दान राशि से स्कूलों में कक्षा निर्माण, रंगाई पुताई जैसे कार्य करवाए जा सकेंगे।
इस मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह लोग मंदिरों में पैसा दान करते हैं उस तरह ही स्कूलों में भी वो पैसा दान कर सकते हैं। आखिर स्कूल भी तो शिक्षा का मंदिर होता है।
विभाग का मानना है कि हर स्कूल में दानपात्र होने से दानदाताओं का स्कूलों से जुड़ाव भी रहेगा, वहीं दान राशि से स्कूलों में कक्षा निर्माण, रंगाई पुताई जैसे कार्य करवाए जा सकेंगे।