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छत्तीसगढ़: वेदांता हादसे पर विधानसभा में गरमाया माहौल, जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने किया वॉकआउट

Tue, 14 Jul 2026 03:41 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Tue, 14 Jul 2026 03:41 PM IST
सार

प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष ने सरकार से औद्योगिक दुर्घटनाओं में जवाबदेही तय करने और वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति पर सवाल किए। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

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Vedanta tragedy escalates in Assembly, opposition walks out, dissatisfied with response in Chhattisgarh
छत्तीसगढ़ विधानसभा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन औद्योगिक सुरक्षा और वेदांता पावर प्लांट हादसे का मुद्दा सदन में जोरदार तरीके से उठा। प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष ने सरकार से औद्योगिक दुर्घटनाओं में जवाबदेही तय करने और वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति पर सवाल किए। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
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नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने राज्य में पिछले दो वर्षों के दौरान हुई औद्योगिक दुर्घटनाओं का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि कितने उद्योगों में सुरक्षा ऑडिट कराया गया और जिन इकाइयों में ऑडिट नहीं हुआ, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि सुरक्षा ऑडिट कितने अंतराल में कराना अनिवार्य है।
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उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने बताया कि नियमों के अनुसार खतरनाक उद्योगों का अधिकृत एजेंसियों से सुरक्षा ऑडिट कराया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 32 कारखानों में सेफ्टी ऑडिट हो चुका है और जहां प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, वहां नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान है।
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इसके बाद चर्चा का केंद्र सक्ती जिले के वेदांता पावर प्लांट में हुए हादसे पर आ गया। विपक्ष ने सवाल उठाया कि मामले में अनिल अग्रवाल का नाम सामने आने के बावजूद अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई। इस पर मंत्री ने कहा कि जांच जारी है और जरूरत पड़ने पर अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस और संबंधित विभाग अपने-अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं तथा किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

बहस के दौरान विधायक रामकुमार यादव ने हादसे के पीड़ित परिवारों को घोषित आर्थिक सहायता का मुद्दा उठाया। मंत्री ने जवाब दिया कि कंपनी ने मृतकों के आश्रितों को 35-35 लाख रुपये का मुआवजा दिया है। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा 5 लाख रुपये और केंद्र सरकार की ओर से 2 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि यदि किसी उद्योग में गंभीर लापरवाही सामने आती है तो केवल इस मामले में ही नहीं, बल्कि भविष्य में भी कंपनी के शीर्ष जिम्मेदार अधिकारियों पर समान कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या अनिल अग्रवाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर केवल औपचारिकता है या जांच वास्तव में निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है।


सदन में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्ष ने मंत्री के जवाब को अपर्याप्त बताते हुए सरकार पर गंभीर सवाल उठाए और अंततः विरोध स्वरूप सदन से बहिर्गमन कर दिया।
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