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सीजी: फर्जी परमिट के सहारे लकड़ी तस्करी का खेल उजागर, अंतरराज्यीय सिंडिकेट के तीन तस्कर को पुलिस ने दबोचा
Fri, 04 Sep 2026 06:59 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 04 Sep 2026 06:59 PM IST
सार
रायगढ़ जिला में वन विभाग और पुलिस की साझा टीम ने खैर और तेंदू प्रजाति की बहुमूल्य लकड़ियों की अवैध कटाई व तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला में वन विभाग और पुलिस की साझा टीम ने खैर और तेंदू प्रजाति की बहुमूल्य लकड़ियों की अवैध कटाई व तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर रिमांड पर जेल भेज दिया, जबकि गिरोह का एक अन्य फरार आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर है। यह सिंडिकेट ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के जंगलों से लकड़ियों की अवैध कटाई करवाकर हरियाणा व हिमाचल प्रदेश समेत अन्य राज्यों में महंगे दामों पर आपूर्ति करता था।
तस्करों ने अवैध लकड़ियों की कटाई व परिवहन को वैध दिखाने के लिए फर्जी तरीके से ट्रांसपोर्ट परमिट (टीपी) तैयार किए थे। जांच में पाया गया कि परमिट पर जारीकर्ता वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर ही नहीं थे। फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब पिछले वर्ष 5 मई को वन विभाग की टीम ने गढ़उमरिया के जामटीकरा स्थित गोदाम में छापा मारा था। वहां से 42 नग तेंदू के लट्ठे, खैर प्रजाति की लकड़ी, कटर मशीन और ट्रक जब्त किया गया था। तब मुख्य आरोपी अपने साथियों के साथ गोदाम से भाग निकला था। बाद में, रेंजर की शिकायत पर 2 सितंबर को जूटमिल थाना में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की थी।
संगठित गिरोह का ताना-बाना
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, डीएफओ अरविंद पीएम, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी और सीएसपी मयंक मिश्रा ने पूरे मामले की विस्तृत जानकारी दी। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी रोहित मित्तल ने जामटीकरा स्थित गोदाम को किराये पर लिया था। वह अपने बिजनेस पार्टनर मनीष अग्रवाल के साथ रायगढ़ के धरमजयगढ़, घरघोड़ा और तमनार वन परिक्षेत्र के ग्रामीणों को पैसों का लालच देकर पेड़ों की अवैध कटाई करवाता था। लकड़ियों को गोदाम में डंप कर छिलाई की जाती थी। इसके बाद, वाहन मालिक भरत कुमार मेश्राम और सलाउद्दीन खान के साथ परिवहन के जरिये दूसरे राज्यों में खपाया जाता था।
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तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस की विशेष टीम ने जांच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर बृहस्पतिवार को तीन आरोपियों को हिरासत में लिया था। पूछताछ के बाद शुक्रवार को उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में रोहित मित्तल (निवासी विकास नगर, कोतरा रोड), मनीष अग्रवाल (निवासी मुड़पार, बलौदाबाजार) और सलाउद्दीन खान (निवासी सरसिवां, सारंगढ़) शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और वन अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की है। फरार वाहन मालिक भरत कुमार मेश्राम की तलाश में पुलिस जगह-जगह लगातार दबिश दे रही है।
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तस्करों ने अवैध लकड़ियों की कटाई व परिवहन को वैध दिखाने के लिए फर्जी तरीके से ट्रांसपोर्ट परमिट (टीपी) तैयार किए थे। जांच में पाया गया कि परमिट पर जारीकर्ता वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर ही नहीं थे। फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब पिछले वर्ष 5 मई को वन विभाग की टीम ने गढ़उमरिया के जामटीकरा स्थित गोदाम में छापा मारा था। वहां से 42 नग तेंदू के लट्ठे, खैर प्रजाति की लकड़ी, कटर मशीन और ट्रक जब्त किया गया था। तब मुख्य आरोपी अपने साथियों के साथ गोदाम से भाग निकला था। बाद में, रेंजर की शिकायत पर 2 सितंबर को जूटमिल थाना में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की थी।
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संगठित गिरोह का ताना-बाना
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, डीएफओ अरविंद पीएम, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी और सीएसपी मयंक मिश्रा ने पूरे मामले की विस्तृत जानकारी दी। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी रोहित मित्तल ने जामटीकरा स्थित गोदाम को किराये पर लिया था। वह अपने बिजनेस पार्टनर मनीष अग्रवाल के साथ रायगढ़ के धरमजयगढ़, घरघोड़ा और तमनार वन परिक्षेत्र के ग्रामीणों को पैसों का लालच देकर पेड़ों की अवैध कटाई करवाता था। लकड़ियों को गोदाम में डंप कर छिलाई की जाती थी। इसके बाद, वाहन मालिक भरत कुमार मेश्राम और सलाउद्दीन खान के साथ परिवहन के जरिये दूसरे राज्यों में खपाया जाता था।
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तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस की विशेष टीम ने जांच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर बृहस्पतिवार को तीन आरोपियों को हिरासत में लिया था। पूछताछ के बाद शुक्रवार को उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में रोहित मित्तल (निवासी विकास नगर, कोतरा रोड), मनीष अग्रवाल (निवासी मुड़पार, बलौदाबाजार) और सलाउद्दीन खान (निवासी सरसिवां, सारंगढ़) शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और वन अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की है। फरार वाहन मालिक भरत कुमार मेश्राम की तलाश में पुलिस जगह-जगह लगातार दबिश दे रही है।