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'ठीक नहीं है सरकार की मंशा': सुशील बोले- एक नवंबर से हो धान खरीदी, 3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हो भुगतान
Tue, 13 Oct 2026 07:33 PM IST
Lalit Kumar Singh
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Tue, 13 Oct 2026 07:33 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ में अब तक धान खरीदी शुरू नहीं हुई है। दीपावली करीब है पर किसानों से धान खरीदी शुरू नहीं की गई है। कांग्रेस ने सरकार से दीपावली से पहले धान खरीदी शुरू करने की मांग की है। इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि धान खरीदी एक नवंबर से शुरू होना चाहिये। क्योंकि उक्त तारीख तक किसानों का धान खेतों से खलिहान में आकर बेचने के लिये तैयार हो जाता है।
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प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला
- फोटो : Amar Ujala Digital
विस्तार
छत्तीसगढ़ में अब तक धान खरीदी शुरू नहीं हुई है। दीपावली करीब है पर किसानों से धान खरीदी शुरू नहीं की गई है। कांग्रेस ने सरकार से दीपावली से पहले धान खरीदी शुरू करने की मांग की है। इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि धान खरीदी एक नवंबर से शुरू होना चाहिये। क्योंकि उक्त तारीख तक किसानों का धान खेतों से खलिहान में आकर बेचने के लिये तैयार हो जाता है। सरकार ने अभी तक धान खरीदी के लिए कोई तारीख घोषित नहीं की है, जिससे किसान चिंतित और परेशान हैं।
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प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जब से राज्य बना है, राज्योत्सव के दिन से ही धान खरीदी की परंपरा रही है। साय सरकार पिछले दो साल से 15 दिन देरी धान खरीदी शुरू करती है। ताकि कम किसानों का धान खरीदना पड़े। इस वर्ष भी सरकार की मंशा ठीक नहीं लग रही है। पिछले ढाई साल में केंद्र सरकार ने धान के एमएसपी में कुल 258 रुपए की वृद्धि की है। 2023 में वादा 3100 का था उस राशि में 258 जोड़कर किसानों को मिलना चाहिए, जिससे 3358 रुपए प्रति क्विंटल की मांग पूरी तरह वाजिब है। महंगाई के अनुपात में वर्तमान दर नाकाफी है। भाजपा सरकार किसानों को धान का समर्थन मूल्य बढ़ाने का प्रचार तो खूब करती है, लेकिन पिछले दो बार से छत्तीसगढ़ के किसानों को बढ़ा हुआ समर्थन नहीं दिया गया। ये किसानों के साथ अन्याय है।
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पिछले साल हुई थी ये परेशानी
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष ने कहा कि पिछले खरीफ सीजन में धान खरीदी किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए टोकन, बारदाना, उठाव, गिरदावरी और रकबा सत्यापन जैसी समस्याओं से जूझना पड़ा था। जिसके चलते लाखों किसानों ने अपना उपज नहीं बेच पाया था। धान बेचने में परेशानी के चलते कई किसानों ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी। कई किसानों को गंभीर स्वास्थ्य की समस्या उत्पन्न हुई थी।
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धान खरीदी न करने की साजिश: सुरेंद्र वर्मा
पटवारियों के मांगो का समर्थन करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा सरकार डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शी धान खरीदी के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पटवारियों पर बिना संसाधनों और व्यावहारिक व्यवस्था के नए-नए नियम थोपे जा रहे हैं। भुइयां ऐप ब्लॉक करके पीवी ऐप की अनिवार्यता, गिरदावरी और सत्यापन के नाम पर पटवारियों को उलझाया जा रहा है, जिससे किसान अपने ही रकबे के पंजीयन और सुधार के लिए तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। छत्तीसगढ़ का किसान खेत में पसीना बहाकर फसल तैयार कर चुका है, लेकिन साय सरकार धान खरीदने की नीयत ही नहीं रख रही है।
कांग्रेस ने की ये मांग
- धान खरीदी एक नवंबर से हो
- 21 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से खरीदी हो
- धान की कीमत 3100+258 कुल 3358 रु का भुगतान करने की घोषणा करें सरकार
- 2024-25 में किए गए एमएसपी में वृद्धि 117 और 2025-26 में 69, इस वर्ष की 72 रु की एमएसपी में वृद्धि को जोड़कर कुल 3358 रुपए प्रति क्विंटल होता है। इस हिसाब से किसानों को राशि मिले