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Ram mandir: छत्तीसगढ़ की प्रयाग नगरी राजिम में पधारे थे श्रीराम, माता सीता ने बालू से बनाया था शिवलिंग
Sat, 20 Jan 2024 05:23 PM IST
ललित कुमार सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
Published by: ललित कुमार सिंह
Updated Sat, 20 Jan 2024 05:23 PM IST
सार
Ram temple: Prayag nagari rajim Chhattisgarh: अमर उजाला की टीम छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पथ के तहत निर्माण किए जा रहे मंदिरों का जायजा लेने के लिए प्रदेश की प्रयाग नगरी राजिम पहुंची। वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम यहां पधारे थे।
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छत्तीसगढ़ की प्रयाग नगरी राजिम में पधारे थे श्रीराम,
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
Ram temple: Prayag nagari rajim Chhattisgarh: अमर उजाला की टीम छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पथ के तहत निर्माण किए जा रहे मंदिरों का जायजा लेने के लिए प्रदेश की प्रयाग नगरी राजिम पहुंची। वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम यहां पधारे थे। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 45 किलोमीटर दूर राजिम में राजीवलोचन, कुलेश्वर महादेव और लोमष ऋषि का मंदिर है, जहां त्रेता युग में प्रभु राम भ्राता लक्ष्मण और माता जानकी के साथ पहुंचे थे। इन स्थलाों को राम वनगमन पथ के तहत विकसित किया जा रहा है। 14 साल के वनवास के दौरान भगवान राम ने छत्तीसगढ़ में 10 साल बिताए थे।
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वे छत्तीसगढ़ में जिन-जिन स्थानों पर भ्रमण किए, जहां पर ठहरे, उन स्थानों को लेकर छत्तीसगढ़ के लोगों में भारी आस्था है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ के लोगों में भगवान राम के प्रति आपार आस्था है। वहीं रायपुर से 27 किलोमीटर दूर चंदखुरी में भगवान राम का ननिहाल होने से छत्तीसगढ़वासी उन्हें अपना भांजा मानते हैं। उनकी भक्ति में लीन रहते हैं, जो उपमा उत्तर प्रदेश की प्रयाग नगरी 'प्रयागराज' को दिया गया है। वही उपमा छत्तीसगढ़ की प्रयागराज नगरी राजिम को भी दिया गया है।
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यहां पर राम वन गमन पथ के तहत भगवान राम की विशालकाय प्रतिमा स्थापित की गई है। कहा जाता है कि वनवास काल के दौरान प्रभु श्रीराम, अनुज लक्ष्मण और माता जानकी के साथ यहां पहुंचे थे और लोमष ऋषि आश्रम में रात्रि विश्राम किए थे। इस दौरान उन्होंने गुरुओं से शिक्षा अर्जित की थी।