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छत्तीसगढ़: कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर लगेगी लगाम! 20 से ज्यादा छात्रों पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

Sun, 08 Nov 2026 10:18 AM IST
प्रतीक कुमार पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Published by: प्रतीक कुमार पाण्डेय Updated Sun, 08 Nov 2026 10:18 AM IST
सार

छत्तीसगढ़ सरकार कोचिंग संस्थानों को नियंत्रित करने के लिए नया कानून लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित विधेयक के तहत 20 या इससे अधिक विद्यार्थियों वाले कोचिंग सेंटरों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। नियम तोड़ने पर 10 हजार से 5 लाख रुपये तक जुर्माना और गंभीर मामलों में पंजीकरण रद्द करने का प्रावधान रखा गया है।

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Chhattisgarh Coaching Centre Regulation Bill 2026 Registration Rules
उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा - फोटो : Amar ujala digital

विस्तार

छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर लगाम कसने और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए नया कानून बनाने जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग ने इसके लिए छत्तीसगढ़ कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक, 2026 का प्रारूप तैयार कर लिया है। इस नए प्रस्तावित कानून के तहत 20 या उससे अधिक विद्यार्थियों वाले कोचिंग संस्थानों के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर कोचिंग संस्थानों पर 10 हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में संस्थानों का पंजीकरण रद्द करने का भी कड़ा प्रावधान किया गया है।
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पारदर्शी व्यवस्था और पंजीकरण के नियम
उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने बताया कि राज्य सरकार विद्यार्थियों को तनावमुक्त, सुरक्षित और सकारात्मक शैक्षणिक माहौल देने के लिए संकल्पबद्ध है। नए विधेयक के लागू होने से कोचिंग संस्थानों की जवाबदेही तय होगी। इसके साथ ही, विद्यार्थियों पर पड़ने वाले अनावश्यक पढ़ाई के दबाव, मनमानी फीस वसूली और अन्य समस्याओं से राहत मिलेगी। विधेयक के प्रारूप के अनुसार, 20 या उससे अधिक छात्र संख्या वाले कोचिंग केंद्रों का पंजीकरण अनिवार्य रहेगा और यह पंजीकरण पांच वर्ष की अवधि के लिए वैध होगा।
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सुरक्षा व्यवस्था और हेल्पलाइन सुविधा
प्रस्तावित कानून में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है। कोचिंग संस्थानों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के मानसिक तनाव को दूर करने के लिए विशेष परामर्श व्यवस्था लागू की जाएगी। किसी भी प्रकार के उत्पीड़न संबंधी मामलों के त्वरित निवारण और सहायता के लिए चौबीसों घंटे चालू रहने वाली टेलीफोन सेवा शुरू करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा कोचिंग केंद्रों से जुड़े छात्रावासों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के कड़े नियम लागू किए जाएंगे। पाठ्यक्रम को बीच में ही छोड़ने वाले विद्यार्थियों को नियमानुसार फीस वापसी की सुविधा भी मिलेगी।
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राज्य व जिला स्तरीय समितियों का गठन
विधेयक के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। वहीं, जिला स्तर पर जिलाधीश की अध्यक्षता में जिला समितियों का गठन करने की व्यवस्था की गई है। कोचिंग संस्थानों के संचालन में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए शुल्क संबंधी नियमों को स्पष्ट और सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। सरकार का यह कदम अभिभावकों के वित्तीय हितों की रक्षा करने के साथ-साथ कोचिंग जगत की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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