फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Not just the husband, but the daughter-in-law and her parents are also accused in domestic violence High Court

घरेलू हिंसा में सिर्फ पति नहीं, बहू और मायके वाले भी आरोपी: हाईकोर्ट

Sat, 26 Sep 2026 05:30 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Sat, 26 Sep 2026 05:30 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि घरेलू हिंसा के मामलों में केवल पति ही आरोपी नहीं होता, बल्कि पत्नी और उसके मायके पक्ष के रिश्तेदार भी आरोपी बन सकते हैं।

विज्ञापन
Not just the husband, but the daughter-in-law and her parents are also accused in domestic violence High Court
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि घरेलू हिंसा के मामलों में केवल पति ही आरोपी नहीं होता, बल्कि पत्नी और उसके मायके पक्ष के रिश्तेदार भी आरोपी बन सकते हैं। कोर्ट ने माना कि साझा घर में रहने और पारिवारिक संबंधों से जुड़े विवादों में आरोपों की सच्चाई साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के बाद ही सामने आती है।
विज्ञापन


जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने इस टिप्पणी के साथ बहू और उसके मायके वालों की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने निचली अदालत और सत्र न्यायालय के फैसलों में दखल देने से इन्कार करते हुए मामले की सुनवाई जारी रखने का आदेश दिया।
विज्ञापन


सास और ननद ने दर्ज कराई थी शिकायत
मामला रायपुर निवासी निर्मला अग्निवंशी और उनकी बेटी श्रुति अग्निवंशी से जुड़ा है। सास निर्मला अग्निवंशी और ननद श्रुति ने अपनी बहू अनीशा अग्निवंशी और उसके मायके पक्ष के लोगों के खिलाफ घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 की धारा 12 के तहत याचिका दाखिल की थी। इस शिकायत में उन्होंने बहू अनीशा के अलावा उसके मायके के रिश्तेदारों सुषमा सिंह, अभिषेक सिंह, अविनाश सिंह, अंजू सिंह और अलका सिंह को भी आरोपी बनाया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि बहू और उसके मायके वाले उनसे लगातार दुर्व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोपी उन्हें मानसिक प्रताड़ना दे रहे हैं और परिवार से अलग रहने के लिए दबाव बना रहे हैं। सास व ननद की इस शिकायत के आधार पर निचली अदालत ने मामले की प्रक्रिया शुरू की थी।

साझा घर में न रहने की दी गई दलील
बहू अनीशा अग्निवंशी और उसके मायके पक्ष के लोगों ने अदालत में याचिका का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि वे शिकायतकर्ताओं के साथ एक साझा घर में नहीं रहते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ घरेलू हिंसा कानून के तहत कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती।

निचली अदालत ने याचिकाकर्ताओं के इस तर्क को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया। इसके बाद आरोपियों ने सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। दोनों अदालतों ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि साझा घर में रहने और पारिवारिक संबंधों की प्रकृति से जुड़े तथ्य केवल साक्ष्यों की जांच के बाद ही तय हो सकते हैं। इस चरण पर मामले को रद्द करना या खारिज करना न्यायसंगत नहीं होगा।

हाईकोर्ट ने ट्रायल प्रक्रिया को माना अनिवार्य
निचली अदालत और सत्र न्यायालय से राहत न मिलने पर बहू और उसके मायके वालों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालतों के फैसलों को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि किसी मामले के शुरुआती चरण में कार्यवाही खत्म करना उचित नहीं है।


अदालत ने आदेश में रेखांकित किया कि याचिकाकर्ताओं पर लगे आरोपों की सत्यता का परीक्षण गवाहों के बयानों और प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच के बाद ही संभव है। न्याय प्रक्रिया में बहस और साक्ष्यों के बाद ही सच्चाई सामने आ सकती है। हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ बहू और उसके परिजनों की याचिका खारिज कर दी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed