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महासमुंद: मानव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश, पांच गिरफ्तार; 1.48 करोड़ रुपये जब्त

Sat, 26 Sep 2026 02:50 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Sat, 26 Sep 2026 02:50 PM IST
सार

महासमुंद पुलिस ने मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी से जुड़े कथित गिरोह का भंडाफोड़ किया। 10 ठिकानों पर छापेमारी में पांच आरोपी गिरफ्तार हुए और 1.48 करोड़ रुपये से ज्यादा नकद समेत बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल और दस्तावेज जब्त किए गए।

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Human trafficking gang busted, five arrested; Rs 1.48 crore seized in Mahasamund
पुलिस के गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ के महासमुंद पुलिस ने मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी से जुड़े बड़े संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने गिरोह के दस ठिकानों पर एक साथ छापेमारी करके 1,48,54,750 रुपये नकद और एक नोट गिनने की मशीन जब्त की है।
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पुलिस ने पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए गिरोह के कथित मास्टरमाइंड मुकेश चंद्राकर समेत उसके चार अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया है। मौके से बड़ी मात्रा में मजदूरों के पलायन से जुड़े रजिस्टर, डायरियां, मोबाइल फोन, पासबुक और वित्तीय दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के तार छत्तीसगढ़ के अलावा पड़ोसी राज्य ओडिशा और देश के कई अन्य राज्यों से जुड़े हुए हैं।
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अस्पताल के मेमो से शुरू हुई जांच
नेटवर्क का खुलासा एक अस्पताल के मेमो से हुआ। बीते 21 सितंबर को पुलिस को सरकारी अस्पताल से एक मेमो मिला था। मेमो में एक नाबालिग बालिका के शारीरिक शोषण और उसके गर्भवती होने की जानकारी दी गई थी। पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। शुरुआती जांच के दौरान पुलिस को क्षेत्र में मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी और मजदूरों के संगठित पलायन से जुड़े एक संगठित गिरोह की मौजूदगी के सुराग मिले। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने संदिग्ध ठिकानों और गिरोह से जुड़े लोगों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखनी शुरू कर दी।
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दस ठिकानों पर एक साथ छापा
पुख्ता साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने दस संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। छापेमारी के दौरान पुलिस को 1,48,54,750 रुपये की बड़ी नकद राशि मिली, जिसे गिनने के लिए मौके पर मौजूद नोट गिनने की मशीन की मदद ली गई। पुलिस ने मौके से मुख्य आरोपी मुकेश चंद्राकर के साथ लता सवर, नंदू मोहंती, पीयूष अग्रवाल और मनीष गुप्ता को गिरफ्तार किया। मौके से मजदूरों के पलायन से जुड़े रजिस्टर, डायरियां, कई मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और बंधक से संबंधित कई महत्वपूर्ण कागजात जब्त किए गए।

एडवांस रकम का लालच और दबाव
जांच में गिरोह को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। गिरोह के सदस्य मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब परिवारों के मजदूरों को अपना निशाना बनाते थे। आरोपी मजदूरों को एडवांस रकम देने का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे और फिर उन्हें छत्तीसगढ़ से दूसरे राज्यों के ईंट भट्ठों व अन्य काम-धंधों के लिए भेज देते थे। पुलिस का आरोप है कि वहां मजदूरों को कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता था तथा डर, दबाव व धमकी के बल पर उनकी आवाजाही पर सख्त नियंत्रण रखा जाता था।


संगठित अपराध की धाराओं में केस दर्ज
पुलिस ने खल्लारी थाने में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं और संगठित अपराध से जुड़ी धारा 111 के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस अब मानव तस्करी के साथ-साथ बाल मजदूरी, नाबालिगों की तस्करी तथा महिलाओं व बालिकाओं के शोषण के गंभीर आरोपों की भी गहन जांच कर रही है। जब्त किए गए मोबाइल फोन, बैंक खातों और वित्तीय दस्तावेज की विस्तृत जांच की जा रही है, ताकि गिरोह के आर्थिक लेन-देन और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका सामने आ सके।
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