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Bangladesh Crisis: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बोले- भारत की सरहद पर हजारों बांग्लादेशी हिंदू जमा, आना चाह रहे अंदर
Thu, 08 Aug 2024 02:18 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: श्याम जी.
Updated Thu, 08 Aug 2024 02:18 PM IST
सार
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि बांग्लादेश में शेख हसीना की हुकूमत का तख्तापलट किया जाना राजनीतिक इच्छाओं का प्रर्दशन है। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी विचारधारा वालों को सत्ता हासिल करने का माध्यम है, जो निहायती अफसोसजनक बात है।
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मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि बांग्लादेश में छात्र और जनता ने मिलकर तख्तापलट का अंजाम दिया, इस तरह की राजनीतिक घटनाएं विदेशों में होती रही हैं, मगर सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के घरों में आग लगा दी गई और कई लोगों को मारा गया। साथ ही मंदिरों में भी तोड़फोड़ की गई। अब अल्पसंख्यकों के हालात ये हैं कि वो अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। भारत की सरहद पर हजारों की तादाद में अल्पसंख्यक जमा हो चुके हैं, वो भारत के अंदर दाखिल होना चाहते हैं।
मौलाना अल्पसंख्यकों की स्थिति देखते हुए बांग्लादेश के आंदोलनकारियों पर जम कर बरसे और उनको नसीहत दी कि इस्लाम और पैग़म्बरे इस्लाम की शिक्षा ये नहीं है कि इस्लाम के मानने वाले गैर मुस्लिमों पर जुल्म ज्यादती करें और मंदिरों को निशाना बनाएं। इस्लाम सभी को सम्मान देने की बात करता है, इस्लाम मानवतावादी धर्म है, इस्लाम किसी दूसरे धर्म को मानने वाले के इबादत गाहो को तोड़फोड़ करने और आग लगाने की इजाजत नहीं देता है, बल्कि ऐसी परिस्थितियों में उनको सुरक्षा प्रदान करने की बात करता है। ये आंदोलनकारी कैसे हैं? और किस तरह इन्होंने इस्लाम पढ़ा है, जो इस्लाम के वसूलों के खिलाफ काम कर रहे हैं।
मौलाना ने कहा कि बांग्लादेश में हो रहे हिंदुओं पर हमले की वजह से भारत के मुसलमानों को शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है। मौलाना ने मीडिया के माध्यम से बंगलादेश के आंदोलनकारियों को नसीहत देते हुए कहा कि सत्ता हासिल करने का जो भी मकसद हो उस सिलसिले में जो चाहें करें, मगर अल्पसंख्यकों के मकानों में आगजनी और मंदिरों में तोड़फोड़ न करें। बांग्लादेश में प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने वाले मोहम्मद युनूस और आंदोलन के कन्वीनर नवेद इस्लाम के ऊपर सबसे बड़ी जिम्मेदारी बनती है कि वो अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के पुख्ता इंतेजामात करें।
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मौलाना अल्पसंख्यकों की स्थिति देखते हुए बांग्लादेश के आंदोलनकारियों पर जम कर बरसे और उनको नसीहत दी कि इस्लाम और पैग़म्बरे इस्लाम की शिक्षा ये नहीं है कि इस्लाम के मानने वाले गैर मुस्लिमों पर जुल्म ज्यादती करें और मंदिरों को निशाना बनाएं। इस्लाम सभी को सम्मान देने की बात करता है, इस्लाम मानवतावादी धर्म है, इस्लाम किसी दूसरे धर्म को मानने वाले के इबादत गाहो को तोड़फोड़ करने और आग लगाने की इजाजत नहीं देता है, बल्कि ऐसी परिस्थितियों में उनको सुरक्षा प्रदान करने की बात करता है। ये आंदोलनकारी कैसे हैं? और किस तरह इन्होंने इस्लाम पढ़ा है, जो इस्लाम के वसूलों के खिलाफ काम कर रहे हैं।
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मौलाना ने कहा कि बांग्लादेश में हो रहे हिंदुओं पर हमले की वजह से भारत के मुसलमानों को शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है। मौलाना ने मीडिया के माध्यम से बंगलादेश के आंदोलनकारियों को नसीहत देते हुए कहा कि सत्ता हासिल करने का जो भी मकसद हो उस सिलसिले में जो चाहें करें, मगर अल्पसंख्यकों के मकानों में आगजनी और मंदिरों में तोड़फोड़ न करें। बांग्लादेश में प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने वाले मोहम्मद युनूस और आंदोलन के कन्वीनर नवेद इस्लाम के ऊपर सबसे बड़ी जिम्मेदारी बनती है कि वो अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के पुख्ता इंतेजामात करें।
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