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छत्तीसगढ़: बच्ची से दुष्कर्म करने वाले 62 वर्षीय दोषी को बीस साल कैद, आरोप पत्र पेश होने के 23 दिन में फैसला
Sat, 26 Sep 2026 08:44 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जशपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जशपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sat, 26 Sep 2026 08:44 PM IST
सार
जशपुर के कांसाबेल थाना क्षेत्र में सात वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी विनोद एक्का को 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। 2 सितंबर को आरोप पत्र दाखिल होने के 23 दिन बाद 24 सितंबर को फैसला आया। अदालत ने जुर्माना भी लगाया।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
जशपुर नगर के कांसाबेल थाना क्षेत्र में सात साल की बालिका से दुष्कर्म के मामले में त्वरित अदालत (फास्ट ट्रैक कोर्ट) ने 62 वर्षीय आरोपी विनोद एक्का उर्फ जशपुरिया उर्फ छोटा दादू को 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश जनार्दन खरे की अदालत ने 24 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाया। पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने के 40 दिन और अदालत में आरोप पत्र पेश होने के 23 दिन के भीतर ही इस मामले का फैसला आ गया है।
झांसा देकर वारदात को अंजाम दिया
यह मामला 9 अगस्त का है। शाम करीब छह बजे पीड़िता गांव के ही एक घर में टीवी देखते हुए खाना खा रही थी। उसी समय आरोपी वहां पहुंचा और रोटी खिलाने का झांसा देकर बालिका को अपने घर ले गया। आरोपी ने अपने घर का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। बालिका जब काफी देर तक वापस नहीं लौटी, तो परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू की। इसी बीच गांव के एक व्यक्ति ने आरोपी के घर की खिड़की से अंदर देखा और बालिका को वहां से सकुशल वापस ले आया।
अगले दिन 10 अगस्त को बालिका की मां ने जब उससे पूछा, तो बालिका ने आरोपी द्वारा गलत काम करने की जानकारी दी। इसके बाद परिजनों ने पुलिस को घटना की सूचना दी। बालिका के पिता की शिकायत पर 13 अगस्त को कांसाबेल थाने में अपराध क्रमांक 151/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 65(2) और पॉक्सो अधिनियम की धारा चार व छह के तहत मामला दर्ज किया।
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ये भी पढ़ें- अवैध गर्भपात मामला : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 3 डॉक्टरों को ठहराया दोषी, अस्पताल में बोतलों में मिले थे भ्रूण
दो सितंबर को दाखिल किया आरोप पत्र
थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार ताम्रकार ने मामले की विवेचना की। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर नजरी नक्शा तैयार किया और पीड़िता व अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए। पुलिस ने पीड़िता और आरोपी का चिकित्सीय परीक्षण भी कराया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस 2 सितंबर को अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। अदालत की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक अनुपम कुमार तिर्की ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की। इस दौरान अदालत में पीड़िता समेत 13 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और विभिन्न दस्तावेजी व अन्य साक्ष्य पेश किए गए।
विभिन्न धाराओं में सजा और जुर्माना
अदालत ने आरोपी को बीएनएस की धारा 65(2) के तहत 20 साल के सश्रम कारावास और 2000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही बीएनएस की धारा 127(2) में एक साल का सश्रम कारावास व 1000 रुपये का अर्थदंड तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा छह में 20 साल के सश्रम कारावास और 2000 रुपये के अर्थदंड का फैसला सुनाया। अदालत ने निर्देश दिया कि सभी सजाएं साथ चलेंगी और जुर्माना न देने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि जशपुर पुलिस गंभीर मामलों में त्वरित विवेचना और प्रभावी पैरवी के साथ कानूनी कार्रवाई जारी रखेगी।
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झांसा देकर वारदात को अंजाम दिया
यह मामला 9 अगस्त का है। शाम करीब छह बजे पीड़िता गांव के ही एक घर में टीवी देखते हुए खाना खा रही थी। उसी समय आरोपी वहां पहुंचा और रोटी खिलाने का झांसा देकर बालिका को अपने घर ले गया। आरोपी ने अपने घर का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। बालिका जब काफी देर तक वापस नहीं लौटी, तो परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू की। इसी बीच गांव के एक व्यक्ति ने आरोपी के घर की खिड़की से अंदर देखा और बालिका को वहां से सकुशल वापस ले आया।
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अगले दिन 10 अगस्त को बालिका की मां ने जब उससे पूछा, तो बालिका ने आरोपी द्वारा गलत काम करने की जानकारी दी। इसके बाद परिजनों ने पुलिस को घटना की सूचना दी। बालिका के पिता की शिकायत पर 13 अगस्त को कांसाबेल थाने में अपराध क्रमांक 151/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 65(2) और पॉक्सो अधिनियम की धारा चार व छह के तहत मामला दर्ज किया।
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दो सितंबर को दाखिल किया आरोप पत्र
थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार ताम्रकार ने मामले की विवेचना की। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर नजरी नक्शा तैयार किया और पीड़िता व अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए। पुलिस ने पीड़िता और आरोपी का चिकित्सीय परीक्षण भी कराया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस 2 सितंबर को अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। अदालत की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक अनुपम कुमार तिर्की ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की। इस दौरान अदालत में पीड़िता समेत 13 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और विभिन्न दस्तावेजी व अन्य साक्ष्य पेश किए गए।
विभिन्न धाराओं में सजा और जुर्माना
अदालत ने आरोपी को बीएनएस की धारा 65(2) के तहत 20 साल के सश्रम कारावास और 2000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही बीएनएस की धारा 127(2) में एक साल का सश्रम कारावास व 1000 रुपये का अर्थदंड तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा छह में 20 साल के सश्रम कारावास और 2000 रुपये के अर्थदंड का फैसला सुनाया। अदालत ने निर्देश दिया कि सभी सजाएं साथ चलेंगी और जुर्माना न देने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि जशपुर पुलिस गंभीर मामलों में त्वरित विवेचना और प्रभावी पैरवी के साथ कानूनी कार्रवाई जारी रखेगी।