{"_id":"6acf46eec3c4f63b7f0b4146","slug":"convent-school-teacher-resigns-after-controversy-over-wearing-red-saree-and-garland-2026-10-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीजी: कॉन्वेंट स्कूल में लाल साड़ी-माला पहनने पर आपत्ति, विवाद के बाद शिक्षिका ने दिया इस्तीफा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीजी: कॉन्वेंट स्कूल में लाल साड़ी-माला पहनने पर आपत्ति, विवाद के बाद शिक्षिका ने दिया इस्तीफा
Wed, 14 Oct 2026 02:40 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Wed, 14 Oct 2026 02:40 PM IST
सार
मदर टेरेसा ज्योति कॉन्वेंट स्कूल में नवरात्र पर लाल साड़ी और भवानी माला पहनने को लेकर विवाद हुआ। शिक्षिका लक्ष्मी प्रसन्ना ने इस्तीफा दिया। मामले में हिंदू समाज ने विरोध जताकर जांच की मांग की।
विज्ञापन
विवाद के बाद शिक्षिका ने दिया इस्तीफा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंटा स्थित मदर टेरेसा ज्योति कॉन्वेंट स्कूल में शारदीय नवरात्र के दौरान धार्मिक परिधान पहनकर पहुंचीं शिक्षिका को कथित तौर पर स्कूल आने से रोकने पर विवाद खड़ा हो गया है। करीब 15 वर्षों से सेवाएं दे रहीं शिक्षिका लक्ष्मी प्रसन्ना नवरात्र के दौरान धार्मिक परंपरा अनुसार लाल वस्त्र और भवानी माला धारण कर विद्यालय पहुंची थीं। प्राचार्य की ओर से जताई गई आपत्ति से आहत होकर शिक्षिका ने अपना त्यागपत्र संस्था को सौंप दिया। इस घटना की जानकारी मिलते ही हिंदू समाज के लोगों ने विद्यालय परिसर में पहुंचकर कड़ा विरोध जताया।
विवाद और पुलिस का हस्तक्षेप
शिक्षिका लक्ष्मी प्रसन्ना का कहना है कि लाल वस्त्र और भवानी माला धारण करना उनकी धार्मिक दीक्षा का हिस्सा है। प्राचार्य द्वारा इस पहनावे पर आपत्ति जताने और लाल कपड़ों में न आने के निर्देश के बाद विवाद बढ़ गया। सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद हिंदू समाज के प्रतिनिधि विद्यालय पहुंचे, जहां दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। सूचना मिलने पर खंड शिक्षा अधिकारी एसके दीप और थाना प्रभारी शिवानंद तिवारी मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत कर शांति बनाए रखने की अपील की। विरोध दर्ज करा रहे लोगों ने आरोप लगाया कि धार्मिक आस्था के मामलों में ऐसा भेदभावपूर्ण रवैया सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकता है।
सांस्कृतिक और शैक्षणिक मांगें
प्रदर्शनकारियों ने विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर अन्य गंभीर सवाल भी खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि बसंत पंचमी जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक और सांस्कृतिक पर्व पर विद्यालय बंद रखा जाता है। उनका कहना है कि विद्यालय में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र हिंदू समुदाय से हैं, लेकिन उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं का सम्मान नहीं किया जाता। हिंदू समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की कि परिसर में देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित की जाएं और शिक्षा विभाग के नियमों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
विज्ञापन
प्रशासनिक जांच और ज्ञापन
मामले की गंभीरता को देखते हुए हिंदू समाज के लोगों ने खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में विद्यालय की कमियों और कार्यप्रणाली की जांच कराने तथा आवश्यक सुधार करने की मांग की गई है। इसके साथ ही संस्था के उच्च पदाधिकारी फादर के समक्ष भी इस मामले को रखकर आगे की चर्चा करने की बात कही गई है। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के प्रयास जारी हैं और शिक्षा विभाग द्वारा जांच के बाद की जाने वाली कार्रवाई का इंतजार है।
विज्ञापन
विवाद और पुलिस का हस्तक्षेप
शिक्षिका लक्ष्मी प्रसन्ना का कहना है कि लाल वस्त्र और भवानी माला धारण करना उनकी धार्मिक दीक्षा का हिस्सा है। प्राचार्य द्वारा इस पहनावे पर आपत्ति जताने और लाल कपड़ों में न आने के निर्देश के बाद विवाद बढ़ गया। सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद हिंदू समाज के प्रतिनिधि विद्यालय पहुंचे, जहां दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। सूचना मिलने पर खंड शिक्षा अधिकारी एसके दीप और थाना प्रभारी शिवानंद तिवारी मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत कर शांति बनाए रखने की अपील की। विरोध दर्ज करा रहे लोगों ने आरोप लगाया कि धार्मिक आस्था के मामलों में ऐसा भेदभावपूर्ण रवैया सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकता है।
विज्ञापन
सांस्कृतिक और शैक्षणिक मांगें
प्रदर्शनकारियों ने विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर अन्य गंभीर सवाल भी खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि बसंत पंचमी जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक और सांस्कृतिक पर्व पर विद्यालय बंद रखा जाता है। उनका कहना है कि विद्यालय में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र हिंदू समुदाय से हैं, लेकिन उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं का सम्मान नहीं किया जाता। हिंदू समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की कि परिसर में देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित की जाएं और शिक्षा विभाग के नियमों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
विज्ञापन
प्रशासनिक जांच और ज्ञापन
मामले की गंभीरता को देखते हुए हिंदू समाज के लोगों ने खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में विद्यालय की कमियों और कार्यप्रणाली की जांच कराने तथा आवश्यक सुधार करने की मांग की गई है। इसके साथ ही संस्था के उच्च पदाधिकारी फादर के समक्ष भी इस मामले को रखकर आगे की चर्चा करने की बात कही गई है। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के प्रयास जारी हैं और शिक्षा विभाग द्वारा जांच के बाद की जाने वाली कार्रवाई का इंतजार है।