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Bijapur: नक्सल दहशत कम हुई तो नेशनल पार्क इलाके में उम्मीदवारों की लगी होड़, सिमटने लगा नक्सलियों का खौफ

Thu, 06 Feb 2025 01:02 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर Published by: Digvijay Singh Updated Thu, 06 Feb 2025 01:02 PM IST
सार

बीजापुर में नक्सलियों कि दहशत अब नक्सलगढ़ में सिमटने लगी हैं। इसका परिणाम बखूबी निकलकर सामने आ रहा हैं। इस साल के पंचायत चुनाव में इसका सार्थक परिणाम देखने को मिला हैं। 

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Naxal terror decreased there was competition among candidates in National Park area fear of Naxalites started
सिमटने लगा नक्सलियों का खौफ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीजापुर में नक्सलियों कि दहशत अब नक्सलगढ़ में सिमटने लगी हैं। इसका परिणाम बखूबी निकलकर सामने आ रहा हैं। इस साल के पंचायत चुनाव में इसका सार्थक परिणाम देखने को मिला हैं। नेशनल पार्क सेड्रा इलाके में नक्सलियों के इशारे के बगैर पत्ता भी नहीं हिलता था। लेकिन अब माहौल बदलता हुआ नजर आ रहा हैं। मौजूदा समय में हालत बदल गए हैं। मतदान के इस महा पर्व में कई वर्षो बाद उन इलाके के प्रत्याशी खुलकर सामने आ रहे हैं। एक समय ऐसा भी था कि जब इन इलाक़ों से पंच सरपंच और जनपद सदस्य के प्रत्याशी निर्विरोध होते थे। लेकिन अब चुनाव लड़ने वालों में कम्पटीशन हो गया है। 

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नक्सलियों के भय को दरकिनार कर निडर होकर सभी पदों के लिए कई वर्षो बाद नामांकन आए हैं। यह प्रत्याशी अपने पक्ष में वोट मांगने उन दहशतगर्द इलाकों में निकलेंगे। यह राष्ट्रीय पर्व कि गूंज सुनाई देगी। आपको बता दे कि 2005 के सलवा जुडूम के बिगड़ाते हालातो कि वजह से यह चुनाव कराना संभव नहीं था।कोई भी प्रत्यासी यहां से खड़े होने कि हिम्मत नहीं करता था। उस समय के बिगड़ते हालत से ग्रामीणों के आशियाने छीन गए। कई ग्रामीण अपने घर से बेघर हो गए। यहां के ग्रामीण ब्लाक और जिला मुख्यालय में आकर बसने लगे। नक्सली दहशत इस कदर था कि उनका नाम लेने से लोग कतराते थे। अब समय ने करवट ले ली हैं। सरकार के सहयोग से नक्सल दहशत सिमटता जा रहा हैं । उन नक्सल इलाकों में राष्ट्रीय पर्व का उत्साह देखने को मिल रहा हैं।
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दो दशको से इन इलाके में निर्विरोध चुनकर जाते थे सरपंच
वर्ष 2005 सलवा जुडूम के बाद नेशनल पार्क इलाके के चार पंचायतो के जन प्रतिनिधि निर्विरोध चुनकर आए हैं। सेंड्रा इलाके में सेंड्रा, बड़ेकाकलेड, एडापल्ली,और केरपे पंचयात हैं। इन पंचायतो के कई गांव सलवा जुडूम के वक्त खाली हो गए थे। बीजापुर जिले के भोपालपटनम सहित आसपास के इलाकों में जाकर बसने लगे। उसके बाद से उन जगहों पर चुनाव नही होता है। इनके पोलिंग बूथ ब्लॉक मुख्यालय में शिफ्ट कर दिए गए हैं।
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चार पंचायतों में सरपंच के 13 उम्मीदवार मैदान में है
केरपे पंचायत के सरपंच पद के लिए तीन आवेदन आए हैं। वहां 13 वार्ड हैं सभी निर्विरोध हुए हैं। यहां 785 मतदाता हैं। 356 महिला व 429 पुरुष है। वही  बड़े काकलेट में सरपंच के लिए चार आवेदन आए हैं। वह 16 वार्ड हैं। सभी निर्विरोध हुए हैं। वहां कुल 958 मतदाता हैं। जिनमें 478 महिला व  480 पुरुष हैं। वही  एडापल्ली में सरपंच के तीन आवेदन आए हैं। वह कुल  13 वार्ड हैं। जिनमे छः निर्विरोध हुए हैं। साथ ही 14 पंचो ने आवेदन किया हैं। जहाँ  कुल 739 मतदाता हैं। इनमें 373 महिला व 366 पुरुष हैं। इसी तरह सेड्रा पंचायत के लिए तीन आवेदन आए हैं। वह 15 वार्ड हैं 11 निर्विरोध हुए हैं। आठ आवेदन आए हैं। जिनमे कुल 845 मतदाता हैं।  419 महिला व 426 पुरुष शामिल  हैं।


क्या कहते हैं अफसर
रिटर्निंग अधिकारी दिलीप उईके ने बताया की  दस जनपद सदस्यो के लिए 39 आवेदन आए हैं। स्कूटनी में 1 रिजेक्ट किया गया है। वही 35 ग्राम पंचायतो के लिए 134 आवेदन आए हैं और 420 पंचो के लिए 633 आवेदन आए। जिनमे से 5 निरस्त हुए है। 628 आवेदन हैं। स्कूटिंग कि प्रक्रिया हो चुकी हैं। अब कल नाम वापसी का अंतिम दिन है।

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