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बीजापुर: विधायक विक्रम मंडावी ने लगाया आदिवासियों की पैतृक जमीनों को हड़पने का आरोप, सरकार पर साधा निशाना
Wed, 03 Dec 2025 08:06 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
Published by: Digvijay Singh
Updated Wed, 03 Dec 2025 08:06 PM IST
सार
बीजापुर में बस्तर संभाग के आदिवासी बहुल जिले बीजापुर में संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून और पंचायत अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार अधिनियम लागू होने के बावजूद आदिवासियों की बेशकीमती पैतृक जमीनों को सुनियोजित ढंग से हड़पा जा रहा है।
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जमीन हड़पने का आरोप
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बीजापुर में बस्तर संभाग के आदिवासी बहुल जिले बीजापुर में संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून और पंचायत अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार अधिनियम लागू होने के बावजूद आदिवासियों की बेशकीमती पैतृक जमीनों को सुनियोजित ढंग से हड़पा जा रहा है। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब बुधवार को जिला मुख्यालय में विधायक विक्रम मंडावी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार पर खुलेआम आदिवासियों की जमीन लुटने देने का सनसनीखेज आरोप लगाया।
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विधायक मंडावी ने कहा बीजापुर जिला अनुसूचित क्षेत्र है। यहाँ आदिवासी अपनी मिट्टी को माँ कहकर पूजते हैं। लेकिन आज छल, कपट और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए उनकी सदियों पुरानी पैतृक जमीनें गैर-आदिवासियों के नाम की जा रही हैं। यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं, आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और अस्तित्व पर सीधा हमला है। विधायक ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि तहसील उसूर के ग्राम संकनपल्ली में आदिवासी परिवारों की लगभग 41 हेक्टेयर से अधिक बहुमूल्य कृषि भूमि को पहले एक गैर-आदिवासी रामसिंग पिता बुधराम यादव (जाति रावत) ने अपने नाम कर लिया और फिर उसे जगदलपुर निवासी कमलदेव झा व अन्य को को बेच दिया।
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विधायक ने कहा संकनपल्ली के ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि जिन खसरा नंबरों की जमीन इस सौदे में शामिल की गई, वे मूल रूप से निम्नलिखित आदिवासी परिवारों के नाम दर्ज है जो इस प्रकार हैं- 1. खसरा 314 (5.634 हे.) – बतक्का यालम 2. खसरा 400 (5.831 हे.) – यालम लक्ष्मीनारायण, कामेश यालम 3. खसरा 435 (6.144 हे.) – यालम लक्ष्मीनारायण 4. खसरा 437 (5.843 हे.) – धरमैया यालम, पवन, राजैया, गौरैया 5. खसरा 613 (4.897 हे.) – बसवैया जव्वा 6. खसरा 648/3 (2.023 हे.) – शांता जव्वा, मोहन जव्वा 7. खसरा 650/2 (0.809 हे.) – दशरथ जव्वा, कामेश जव्वा 8. खसरा 651/3 (1.214 हे.) – नागैया यालम 9. खसरा 631 (4.076 हे.) – बिचमैया टिंगे, चलमैया, शिवैया 10. खसरा 658/2 (5.031 हे.) – हनुमंत यालम, शंकर, सम्मैया आदि इन सभी खसरा मालिकों के नाम स्पष्ट रूप से आदिवासी हैं और ये जमीनें पीढ़ी-दर-पीढ़ी से उनके पास हैं।
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विधायक ने आगे कहा कि भूमाफियाओ द्वारा संकनपल्ली के जमीनों को सबसे पहले रामसिंग यादव के नाम कराई गईं जो संकनपल्ली गांव का रहने वाला है। फिर रामसिंग ने अपने नाम की जमीन को जगदलपुर के कमलदेव झा व अन्य दो को बेच दिया इसके बाद तहसीलदार उसूर ने बिना किसी जांच-पड़ताल के जमीन के दस्तावेज तैयार करवा दिए, अब क्रेता कमलदेव झा व अन्य दो पटवारी पर दबाव डाल रहे है कि उनकी जमीन को कंप्यूटर में ऑनलाइन कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम की भनक गांव के किसी भी व्यक्ति को नहीं लगी। न ग्राम सभा को सूचना, न पंचायत को खबर मिली पूरी प्रक्रिया को गुपचुप तरीक़े से किया गया।