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झीरम का सच दबाने का आरोप: कांग्रेस एमएलए विक्रम मंडावी बोले- बड़े नक्सली नेताओं को जांच से क्यों बाहर किया?
Sun, 06 Sep 2026 03:30 PM IST
बीजापुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
Published by: बीजापुर ब्यूरो
Updated Sun, 06 Sep 2026 03:30 PM IST
सार
झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए इसे आधा-अधूरा न्याय बताया है।
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प्रेसवार्ता लेते बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए इसे आधा-अधूरा न्याय बताया है। बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने आरोप लगाया कि मामले की जांच में राजनीतिक षड्यंत्र, सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव और बड़े नक्सली नेतृत्व की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की पूरी तरह जांच नहीं हुई।
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर जिला कांग्रेस कमेटी बीजापुर ने जिला मुख्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित की। इस दौरान विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि 2013 में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हुए हमले में नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल और उदय मुदलियार सहित बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस न्यायालय के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन उनका मानना है कि अदालत के सामने एनआईए ने जो तथ्य रखे, उसी आधार पर फैसला आया है।
बड़े नक्सली नेतृत्व की भूमिका पर उठाए सवाल
विधायक मंडावी ने दावा किया कि मामले में दोषी ठहराए गए 10 आरोपी निचले स्तर के नक्सली हैं। उनका सवाल है कि इतनी बड़ी और संगठित घटना के पीछे बड़े नक्सली नेतृत्व की भूमिका की जांच क्यों नहीं हुई। उन्होंने प्रारंभिक एफआईआर और बाद की चार्जशीट का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि कुछ प्रमुख नक्सली नेताओं के नाम बाद की चार्जशीट से क्यों हटाए गए। मंडावी ने गणपति और रमन्ना सहित कई फरार आरोपियों के नाम हटाए जाने को लेकर भी जांच एजेंसी से सवाल किए। उन्होंने कहा कि जिन नक्सलियों को कभी मामले में वांछित या फरार आरोपी बताया गया, उनमें से कई बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। विधायक ने सवाल किया कि ऐसे लोगों से झीरम मामले में एनआईए ने पूछताछ की या नहीं।
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सरेंडर कर चुके नक्सलियों से पूछताछ का सवाल
विक्रम मंडावी ने दावा किया कि झीरम मामले से कथित तौर पर जुड़े या जांच एजेंसियों द्वारा वांछित बताए गए कुछ नक्सली बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। उन्होंने चैतू उर्फ श्याम दादा, रूपेश उर्फ मोल्ला राजिरड्डी, निर्मला उर्फ सुमित्रा, भूपति उर्फ सोनू दादा और सुजाता सहित कुछ नामों का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ये लोग बाद में सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर चुके थे तो झीरम हमले के संबंध में उनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई और उन्हें अभियोजन में शामिल क्यों नहीं किया गया।
सुरक्षा और रूट बदलने पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक ने झीरम हमले से जुड़े कई अनसुलझे सवाल गिनाते हुए पूछा कि परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था क्यों हटाई गई थी और यात्रा का मार्ग किसके कहने पर बदला गया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि हमले की योजना किसने बनाई और घटना के प्रत्यक्षदर्शियों तथा घायलों के बयान किस स्तर तक दर्ज किए गए। मंडावी ने आरोप लगाया कि घटना के बाद महत्वपूर्ण दस्तावेज और सामान लंबे समय तक घटनास्थल पर पड़े रहे तथा कई अहम साक्ष्यों को लेकर भी गंभीर सवाल हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि एनआईए ने तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी और एडीजी नक्सल से कब और किस स्तर पर पूछताछ की।
भाजपा पर जांच प्रभावित करने का आरोप
विधायक विक्रम मंडावी ने आरोप लगाया कि झीरम मामले की जांच को लेकर तत्कालीन भाजपा सरकार की भूमिका शुरू से संदिग्ध रही है। उन्होंने तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक द्वारा न्यायिक जांच आयोग के खिलाफ स्टे लिए जाने और बाद में कांग्रेस सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट से एसआईटी की जांच के पक्ष में स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद राज्य में जांच आगे नहीं बढ़ाई गई। मंडावी ने कहा कि भाजपा नहीं चाहती कि झीरम घाटी हमले के पीछे का पूरा सच सामने आए। हालांकि, भाजपा और जांच एजेंसी की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर उनका पक्ष इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
कांग्रेस ने की स्वतंत्र जांच की मांग
विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि कांग्रेस शहीदों के परिजनों और हमले में घायल हुए लोगों के साथ खड़ी है। उन्होंने झीरम घाटी मामले में राजनीतिक षड्यंत्र, सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव, यात्रा का मार्ग बदले जाने और बड़े नक्सली नेतृत्व की कथित भूमिका की स्वतंत्र, निष्पक्ष और संपूर्ण जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए केवल कुछ आरोपियों को सजा मिलना पर्याप्त नहीं है और जब तक हमले के पीछे की पूरी साजिश सामने नहीं आती, तब तक न्याय अधूरा रहेगा।
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छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर जिला कांग्रेस कमेटी बीजापुर ने जिला मुख्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित की। इस दौरान विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि 2013 में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हुए हमले में नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल और उदय मुदलियार सहित बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस न्यायालय के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन उनका मानना है कि अदालत के सामने एनआईए ने जो तथ्य रखे, उसी आधार पर फैसला आया है।
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बड़े नक्सली नेतृत्व की भूमिका पर उठाए सवाल
विधायक मंडावी ने दावा किया कि मामले में दोषी ठहराए गए 10 आरोपी निचले स्तर के नक्सली हैं। उनका सवाल है कि इतनी बड़ी और संगठित घटना के पीछे बड़े नक्सली नेतृत्व की भूमिका की जांच क्यों नहीं हुई। उन्होंने प्रारंभिक एफआईआर और बाद की चार्जशीट का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि कुछ प्रमुख नक्सली नेताओं के नाम बाद की चार्जशीट से क्यों हटाए गए। मंडावी ने गणपति और रमन्ना सहित कई फरार आरोपियों के नाम हटाए जाने को लेकर भी जांच एजेंसी से सवाल किए। उन्होंने कहा कि जिन नक्सलियों को कभी मामले में वांछित या फरार आरोपी बताया गया, उनमें से कई बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। विधायक ने सवाल किया कि ऐसे लोगों से झीरम मामले में एनआईए ने पूछताछ की या नहीं।
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सरेंडर कर चुके नक्सलियों से पूछताछ का सवाल
विक्रम मंडावी ने दावा किया कि झीरम मामले से कथित तौर पर जुड़े या जांच एजेंसियों द्वारा वांछित बताए गए कुछ नक्सली बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। उन्होंने चैतू उर्फ श्याम दादा, रूपेश उर्फ मोल्ला राजिरड्डी, निर्मला उर्फ सुमित्रा, भूपति उर्फ सोनू दादा और सुजाता सहित कुछ नामों का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ये लोग बाद में सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर चुके थे तो झीरम हमले के संबंध में उनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई और उन्हें अभियोजन में शामिल क्यों नहीं किया गया।
सुरक्षा और रूट बदलने पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक ने झीरम हमले से जुड़े कई अनसुलझे सवाल गिनाते हुए पूछा कि परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था क्यों हटाई गई थी और यात्रा का मार्ग किसके कहने पर बदला गया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि हमले की योजना किसने बनाई और घटना के प्रत्यक्षदर्शियों तथा घायलों के बयान किस स्तर तक दर्ज किए गए। मंडावी ने आरोप लगाया कि घटना के बाद महत्वपूर्ण दस्तावेज और सामान लंबे समय तक घटनास्थल पर पड़े रहे तथा कई अहम साक्ष्यों को लेकर भी गंभीर सवाल हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि एनआईए ने तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी और एडीजी नक्सल से कब और किस स्तर पर पूछताछ की।
भाजपा पर जांच प्रभावित करने का आरोप
विधायक विक्रम मंडावी ने आरोप लगाया कि झीरम मामले की जांच को लेकर तत्कालीन भाजपा सरकार की भूमिका शुरू से संदिग्ध रही है। उन्होंने तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक द्वारा न्यायिक जांच आयोग के खिलाफ स्टे लिए जाने और बाद में कांग्रेस सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट से एसआईटी की जांच के पक्ष में स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद राज्य में जांच आगे नहीं बढ़ाई गई। मंडावी ने कहा कि भाजपा नहीं चाहती कि झीरम घाटी हमले के पीछे का पूरा सच सामने आए। हालांकि, भाजपा और जांच एजेंसी की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर उनका पक्ष इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
कांग्रेस ने की स्वतंत्र जांच की मांग
विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि कांग्रेस शहीदों के परिजनों और हमले में घायल हुए लोगों के साथ खड़ी है। उन्होंने झीरम घाटी मामले में राजनीतिक षड्यंत्र, सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव, यात्रा का मार्ग बदले जाने और बड़े नक्सली नेतृत्व की कथित भूमिका की स्वतंत्र, निष्पक्ष और संपूर्ण जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए केवल कुछ आरोपियों को सजा मिलना पर्याप्त नहीं है और जब तक हमले के पीछे की पूरी साजिश सामने नहीं आती, तब तक न्याय अधूरा रहेगा।