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36 संविदा डॉक्टर छत्तीसगढ़ से जा रहे मध्यप्रदेश, चिकित्सा विभाग में मचा हड़कंप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
Updated Tue, 03 Apr 2018 07:47 PM IST
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छत्तीसगढ़ से संविदा पर काम कर रहे डॉक्टरों ने अब मध्यप्रदेश में अपनी सेवाएं देने का निर्णय लिया है। जिसकी वजह से छत्तीसगढ़ चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। छत्तीसगढ़ के दो सरकारी मेडिकल कॉलेजों के 36 संविदा डॉक्टरों ने कॉलेज डीन से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मांगा है। इन सभी डॉक्टरों ने मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नौकरी के लिए आवेदन किया है। क्योंकि वहां स्थायी नियुक्तियां हो रही हैं।
कहां के डॉक्टरों ने छोड़ी नौकरी
राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज- 19
रायगढ़ मेडिकल कॉलेज- 17
क्यों छोड़ रहे हैं नौकरी
संविदा डॉक्टरों को छत्तीसगढ़ में ज्यादा तनख्वाह मिल रही है लेकिन वे स्थाई नहीं हैं, उन्हें पद से हटाया जा सकता है। जबकि मध्यप्रदेश में स्थाई नौकरी है भले ही छत्तीसगढ़ की तुलना में तनख्वाह कम है।
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कहां के डॉक्टरों ने छोड़ी नौकरी
राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज- 19
रायगढ़ मेडिकल कॉलेज- 17
क्यों छोड़ रहे हैं नौकरी
संविदा डॉक्टरों को छत्तीसगढ़ में ज्यादा तनख्वाह मिल रही है लेकिन वे स्थाई नहीं हैं, उन्हें पद से हटाया जा सकता है। जबकि मध्यप्रदेश में स्थाई नौकरी है भले ही छत्तीसगढ़ की तुलना में तनख्वाह कम है।
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शिक्षा विभाग में इसलिए मचा हड़कंप
डॉक्टरों ने कॉलेज प्रबंधन को नौकरी छोड़ने का अल्टीमेटम दे दिया है जिसके बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। डॉक्टरों के इतनी बड़ी संख्या में नौकरी छोड़ने के नोटिस के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने भी मध्यप्रदेश सरकार के नियमों को लागू करने पर विचार शुरू कर दिया है। इन नियमों के तहत मेडिकल कॉलेज डीन/स्वशासी समिति को नियमित नियुक्ति का अधिकार है।
चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने नियमों को लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत संचालक और कॉलेजों के डीन ने स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर से मुलाकात की, जिसके बाद चंद्राकर ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया है।
गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के निरीक्षण का दौर है। निरीक्षण के दौरान अगर डॉक्टरों के पद खाली रहे तो 3 मेडिकल कॉलेजों की मान्यता खतरे में पड़ जाएगी।
चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने नियमों को लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत संचालक और कॉलेजों के डीन ने स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर से मुलाकात की, जिसके बाद चंद्राकर ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया है।
गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के निरीक्षण का दौर है। निरीक्षण के दौरान अगर डॉक्टरों के पद खाली रहे तो 3 मेडिकल कॉलेजों की मान्यता खतरे में पड़ जाएगी।