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विदेश में बसने का क्रेज: पांच साल में पंजाब के दस लाख युवाओं ने छोड़ा वतन, पढ़ने जाते हैं फिर लौटकर नहीं आते
Mon, 13 Mar 2023 04:42 PM IST
निवेदिता वर्मा
सुरिंदर पाल/अमित शर्मा, अमर उजाला, जालंधर/चंडीगढ़
सुरिंदर पाल/अमित शर्मा, अमर उजाला, जालंधर/चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 13 Mar 2023 04:42 PM IST
सार
लोकसभा में विदेश राज्य मंत्री के जवाब के अनुसार साल 2016 से फरवरी 2021 के बीच 9.84 लाख लोग पंजाब और चंडीगढ़ दूसरे देशों में चले गए हैं। इनमें करीब चार लाख छात्र और छह लाख से अधिक श्रमिक थे।
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Study Abroad
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
पंजाब के युवाओं पर विदेश में जाकर पढ़ने का जुनून सवार है। पंजाब से हर साल एक लाख से ज्यादा युवा अपना वतन छोड़ कनाडा, आस्ट्रेलिया और यूके के विभिन्न संस्थानों में पढ़ने के लिए चले जाते हैं। वर्तमान में यहां के कॉलेजों में 1.5 लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं।
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लोकसभा में विदेश राज्य मंत्री के जवाब के अनुसार साल 2016 से फरवरी 2021 के बीच 9.84 लाख लोग पंजाब और चंडीगढ़ से दूसरे देशों में चले गए हैं। इनमें करीब चार लाख छात्र और छह लाख से अधिक श्रमिक थे। विशेषज्ञ बताते हैं कि पंजाब में बाहर जाकर पढ़ना और नौकरी करना अब एक स्टेटस सिंबल बन चुका है। पहले सिर्फ अमीर घर के लोग बाहर जाते थे। पिछले चार से पांच सालों में गरीब घर के बच्चों में बाहर जाने का क्रेज देखा जा रहा है। मकसद सिर्फ एक ही होता है कि विदेश में जाकर स्थायी निवासी बनना और बाकी जिंदगी अराम से गुजारना।
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विदेशों में पढ़ाई का एक छात्र पर औसतन 15 से 22 लाख रुपये वार्षिक खर्च आता है, जिसमें खाने-पीने व कमरे का किराया शामिल है। एक छात्र पर औसतन 15 लाख खर्च मान भी लिया जाए तो पंजाब से हर साल 15 हजार करोड़ रुपये बतौर फीस बाहर भेजी जा रही है। विदेशों में पढ़ाई की ललक इस कदर छाई है कि सितंबर से शुरू होने वाले सेशन के लिए अभिभावकों ने अभी से दौड़धूप शुरू कर दी है। कॉलेज की सीटों को अभी से रिजर्व कराने की कशमकश चल रही है। युवाओं के पलायन की वजह से पंजाब के कुछ गांवों में सिर्फ बुजुर्ग ही बचे हैं। बड़े मकान वीरान पड़े हैं। गलियों कूचों में सन्नाटा पसरा रहता है।
पंजाब से पलायन की वजहें
- नशे की समस्या का खत्म न होना
- इंडस्ट्री और आईटी क्षेत्र न होने से रोजगार की कमी
- रोजगार है तो तनख्वाह कम और काम के घंटे ज्यादा
- कई सरकारी नौकरियों में प्रारंभिक वेतन का कम होना
- प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था
- विदेश में आबाद रिश्तेदारों से प्रभावित होकर
विदेशों की लुभावनी नीतियां
पंजाब से लोगों को बाहर ले जाने में कनाडा और यूके की लुभावनी नीतियां भी काफी जिम्मेदार हैं। कनाडा से डिप्लोमा के बाद तीन साल का वर्क परमिट है और प्रति सप्ताह 40 घंटे काम करने की अनुमति भी मिलती है। वहीं, स्टूडेंट को 20 घंटे प्रति सप्ताह। यूके की अकादमिक डिग्रियां काफी उच्च गुणवत्ता वाली मानी जाती हैं। यूके में भी अध्ययन करने के साथ भारतीय छात्रों के लिए कई तरह की स्कॉलरशिप उपलब्ध है। यूके में जीवनसाथी को वीजा दिया जा रहा है। आस्ट्रेलिया में भी मेहनताना अच्छा मिलता है। वहां भी घंटों के हिसाब से भुगतान होता है।
विद्यार्थियों की जुबानी...
जालंधर के बस्ती बावा खेल की रहने श्रुति चावला का कहना है कि पंजाब में आईटी इंडस्ट्री नहीं है। पंजाब में अगर वह किसी इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ भी लेती हैं, तो नौकरी नहीं है। नौकरी के लिए दक्षिण भारत जाना पड़ेगा, इससे अच्छा है कि कनाडा में ही आईटी में डिग्री लेकर वहीं की स्थायी नागरिक बन जाऊं।
जालंधर के न्यू गार्डन कालोनी की रहने वाली काशवी धवन कनाडा जाने की तैयारी कर रही हैं। उनका कहना है कि पंजाब में माहौल सकारात्मक नहीं रहा है। यहां भविष्य भी नजर नहीं आता। जब हम अपने सीनियर्स को कनाडा व यूके में सफल होते देखते हैं, तो निश्चित तौर पर महसूस होता कि वहां बेहतर भविष्य है। पंजाब में वातावरण से लेकर पानी, भ्रष्ट सिस्टम से लेकर कानून-व्यवस्था कई तरह की समस्याएं हैं, जिनसे निकलने में पंजाब में लंबा वक्त लगेगा।
जो गए, वहीं बस गए
चंडीगढ़ सेक्टर-23 निवासी जसप्रीत सिद्धू और उनकी पत्नी बरलीन कौर आठ साल पहले स्टडी वीजा पर ऑस्ट्रेलिया गए थे। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें वहीं नौकरी मिल गई। अब दोनों आस्ट्रेलिया के ही स्थायी निवासी बन गए हैं। सिद्धू का कहना है कि उनके कई रिश्तेदार पहले से ही बाहर बसे थे। उन्हें देखकर लगता था कि हमें भी बाहर जाना चाहिए। जाने का सफर थोड़ा कठिन था, लेकिन अब वहां सब कुछ ठीक है। माहौल अच्छा है। आठ घंटे की नौकरी के बाद ओवरटाइम मिलता है। साफ सफाई है। न छीना झपटी डर है और न ही गुंडों का। सभी सपने भी सच हो रहे हैं।
मोहाली के गौरव स्टडी वीजा पर यूके गए थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद गौरव भी वहीं बस गए। उन्होंने बताया कि वे सिर्फ पढ़ाई के लिए यूके गए थे, लेकिन जब पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी की तलाशी तो यूके में अच्छी सैलरी में नौकरी मिल गई। भारत में पंजाब से बाहर नौकरियां मिल रही थी। ऐसे में यूके में ही रहना ज्यादा सही था। यहां पर कैरियर ऑप्शन भी ज्यादा हैं।
पंजाब से लोगों को बाहर ले जाने में कनाडा और यूके की लुभावनी नीतियां भी काफी जिम्मेदार हैं। कनाडा से डिप्लोमा के बाद तीन साल का वर्क परमिट है और प्रति सप्ताह 40 घंटे काम करने की अनुमति भी मिलती है। वहीं, स्टूडेंट को 20 घंटे प्रति सप्ताह। यूके की अकादमिक डिग्रियां काफी उच्च गुणवत्ता वाली मानी जाती हैं। यूके में भी अध्ययन करने के साथ भारतीय छात्रों के लिए कई तरह की स्कॉलरशिप उपलब्ध है। यूके में जीवनसाथी को वीजा दिया जा रहा है। आस्ट्रेलिया में भी मेहनताना अच्छा मिलता है। वहां भी घंटों के हिसाब से भुगतान होता है।
विद्यार्थियों की जुबानी...
जालंधर के बस्ती बावा खेल की रहने श्रुति चावला का कहना है कि पंजाब में आईटी इंडस्ट्री नहीं है। पंजाब में अगर वह किसी इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ भी लेती हैं, तो नौकरी नहीं है। नौकरी के लिए दक्षिण भारत जाना पड़ेगा, इससे अच्छा है कि कनाडा में ही आईटी में डिग्री लेकर वहीं की स्थायी नागरिक बन जाऊं।
जालंधर के न्यू गार्डन कालोनी की रहने वाली काशवी धवन कनाडा जाने की तैयारी कर रही हैं। उनका कहना है कि पंजाब में माहौल सकारात्मक नहीं रहा है। यहां भविष्य भी नजर नहीं आता। जब हम अपने सीनियर्स को कनाडा व यूके में सफल होते देखते हैं, तो निश्चित तौर पर महसूस होता कि वहां बेहतर भविष्य है। पंजाब में वातावरण से लेकर पानी, भ्रष्ट सिस्टम से लेकर कानून-व्यवस्था कई तरह की समस्याएं हैं, जिनसे निकलने में पंजाब में लंबा वक्त लगेगा।
जो गए, वहीं बस गए
चंडीगढ़ सेक्टर-23 निवासी जसप्रीत सिद्धू और उनकी पत्नी बरलीन कौर आठ साल पहले स्टडी वीजा पर ऑस्ट्रेलिया गए थे। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें वहीं नौकरी मिल गई। अब दोनों आस्ट्रेलिया के ही स्थायी निवासी बन गए हैं। सिद्धू का कहना है कि उनके कई रिश्तेदार पहले से ही बाहर बसे थे। उन्हें देखकर लगता था कि हमें भी बाहर जाना चाहिए। जाने का सफर थोड़ा कठिन था, लेकिन अब वहां सब कुछ ठीक है। माहौल अच्छा है। आठ घंटे की नौकरी के बाद ओवरटाइम मिलता है। साफ सफाई है। न छीना झपटी डर है और न ही गुंडों का। सभी सपने भी सच हो रहे हैं।
मोहाली के गौरव स्टडी वीजा पर यूके गए थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद गौरव भी वहीं बस गए। उन्होंने बताया कि वे सिर्फ पढ़ाई के लिए यूके गए थे, लेकिन जब पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी की तलाशी तो यूके में अच्छी सैलरी में नौकरी मिल गई। भारत में पंजाब से बाहर नौकरियां मिल रही थी। ऐसे में यूके में ही रहना ज्यादा सही था। यहां पर कैरियर ऑप्शन भी ज्यादा हैं।
क्या कहते हैं वीजा सेंटर संचालक
ज्यादातर अभिभावक पंजाब के हालात को देखकर चिंतित होते हैं। मेरे पास काउंसलिंग के लिए जो अभिभावक व स्टूडेंट आते हैं, उनसे बातचीत में यही सामने आया है कि वे पंजाब में नशे की समस्या से काफी चिंतित हैं। - सुकांत, संचालक स्टडी वीजा सेंटर, जालंधर
पंजाब में हर साल आइलेट्स की परीक्षा पर 500 करोड़ की राशि खर्च की जाती है। सूबे में हर साल 3.5 लाख युवा आईईएलटीएस (इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्टिंग सिस्टम) की परीक्षा देते हैं। एग्जाम फीस 210 से 225 डॉलर (15 हजार रुपये) हैं। पंजाब में आईटी इंडस्ट्री भी नहीं है। - सोनिया धवन, एमडी ग्रे मैटर
अब लोगों की सोच बदल गई है। वह कम समय में ज्यादा पैसा कमाना चाहते हैं। पंजाब के लोग भी अब यह सुनना नहीं चाहते है कि उनके घर से कोई बाहर नहीं गया। इन सब कारणों की वजह से लोग पंजाब से पलायन करना चाहते हैं। - हरिंदर चंढोक, संचालक आईलेट्स कोचिंग
बेरोजगारी की दर में पड़ोसी राज्यों से पंजाब का बेहतर प्रदर्शन
राज्य बेरोजगारी दर
पंजाब 8.2
राजस्थान 28.3
हरियाणा 29.4
हिमाचल 13.9
(सीएमआई के जारी आंकड़ों के मुताबिक)
विदेशों में अध्ययन के लिए भारतीय छात्रों ने लिया पढ़ाई के लिए ऋण
साल छात्र लोन राशि
2012-13 20366 1180 करोड़
2019-20 62947 5885 करोड़
2020-21 51784 4503 करोड़ *
2021-22 69898 7576 करोड़
(13 फरवरी को लोकसभा के जवाब के मुताबिक, * कोरोनाकाल)
पंजाब सरकार के प्रयास
पंजाब सरकार ने हाल ही में नई औद्योगिक एवं व्यापार विकास नीति-2022 को मंजूरी दी है। इसके तहत पंजाब के मूल निवासियों को रोजगार देने वाले उद्योगों को पंजाब सरकार सब्सिडी देगी। मुख्य इकाइयों को 5 साल की अवधि के लिए प्रति कर्मचारी 36000 रुपये सालाना और महिला एससी, बीसी व ओबीसी कर्मचारियों के लिए 48000 रुपये सालाना तक रोजगार उत्पत्ति सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
पंजाब सरकार का दावा है कि दस महीने में 20 हजार से ज्यादा सरकारी नौकरियां दी हैं। नौ हजार संविदा कर्मचारियों को पक्की नौकरी दी है। स्कूली शिक्षा सुधारने के लिए सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल को ट्रेनिंग के लिए सिंगापुर भेजा गया है। अब तक दो बैच जा चुके हैं। वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार 2020-21 के लिए स्कूली शिक्षा में पंजाब टॉप पर रहा है।
ज्यादातर अभिभावक पंजाब के हालात को देखकर चिंतित होते हैं। मेरे पास काउंसलिंग के लिए जो अभिभावक व स्टूडेंट आते हैं, उनसे बातचीत में यही सामने आया है कि वे पंजाब में नशे की समस्या से काफी चिंतित हैं। - सुकांत, संचालक स्टडी वीजा सेंटर, जालंधर
पंजाब में हर साल आइलेट्स की परीक्षा पर 500 करोड़ की राशि खर्च की जाती है। सूबे में हर साल 3.5 लाख युवा आईईएलटीएस (इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्टिंग सिस्टम) की परीक्षा देते हैं। एग्जाम फीस 210 से 225 डॉलर (15 हजार रुपये) हैं। पंजाब में आईटी इंडस्ट्री भी नहीं है। - सोनिया धवन, एमडी ग्रे मैटर
अब लोगों की सोच बदल गई है। वह कम समय में ज्यादा पैसा कमाना चाहते हैं। पंजाब के लोग भी अब यह सुनना नहीं चाहते है कि उनके घर से कोई बाहर नहीं गया। इन सब कारणों की वजह से लोग पंजाब से पलायन करना चाहते हैं। - हरिंदर चंढोक, संचालक आईलेट्स कोचिंग
बेरोजगारी की दर में पड़ोसी राज्यों से पंजाब का बेहतर प्रदर्शन
राज्य बेरोजगारी दर
पंजाब 8.2
राजस्थान 28.3
हरियाणा 29.4
हिमाचल 13.9
(सीएमआई के जारी आंकड़ों के मुताबिक)
विदेशों में अध्ययन के लिए भारतीय छात्रों ने लिया पढ़ाई के लिए ऋण
साल छात्र लोन राशि
2012-13 20366 1180 करोड़
2019-20 62947 5885 करोड़
2020-21 51784 4503 करोड़ *
2021-22 69898 7576 करोड़
(13 फरवरी को लोकसभा के जवाब के मुताबिक, * कोरोनाकाल)
पंजाब सरकार के प्रयास
पंजाब सरकार ने हाल ही में नई औद्योगिक एवं व्यापार विकास नीति-2022 को मंजूरी दी है। इसके तहत पंजाब के मूल निवासियों को रोजगार देने वाले उद्योगों को पंजाब सरकार सब्सिडी देगी। मुख्य इकाइयों को 5 साल की अवधि के लिए प्रति कर्मचारी 36000 रुपये सालाना और महिला एससी, बीसी व ओबीसी कर्मचारियों के लिए 48000 रुपये सालाना तक रोजगार उत्पत्ति सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
पंजाब सरकार का दावा है कि दस महीने में 20 हजार से ज्यादा सरकारी नौकरियां दी हैं। नौ हजार संविदा कर्मचारियों को पक्की नौकरी दी है। स्कूली शिक्षा सुधारने के लिए सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल को ट्रेनिंग के लिए सिंगापुर भेजा गया है। अब तक दो बैच जा चुके हैं। वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार 2020-21 के लिए स्कूली शिक्षा में पंजाब टॉप पर रहा है।