{"_id":"57b9faab4f1c1b270ed4f0d2","slug":"yogeshwar-dutt-mother-on-his-defete","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बेटे की हार पर मां के उमड़े जज्बात, 'गोल्ड' के सवाल पर कह दी ये बड़ी बात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेटे की हार पर मां के उमड़े जज्बात, 'गोल्ड' के सवाल पर कह दी ये बड़ी बात
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Mon, 22 Aug 2016 09:44 AM IST
विज्ञापन
योगेश्वर दत्त की मां
- फोटो : Amar ujala
रियो में योगेश्वर की जीत के लिए सुबह से ही उनके गांव भैंसवाल कलां हवन-यज्ञ शुरू हो गया था। महिलाएं घरों में पूजा पाठ कर रही थी, वहीं योगेश्वर की मां सुशीला देवी मुकाबला शुरू होने से पांच मिनट पहले हनुमान चालीसा पाठ कर उसकी जीत की अरदास करने लगी, लेकिन जैसे ही उसे हार होने की जानकारी मिली वह बेसुध हो गई।
वहां मौजूद अन्य परिजनों की भी रूलाई फूट गई। करीब घंटे भर बाद योगेश्वर की मां को होश आया तो उसने कहा योगी के सिर पर गोल्ड जीतने का जुनून सवार था। इसी वजह से चोटिल होने के बावजूद कड़ी मेहनत करता रहा। गोल्ड मेडल जीतने की जिद न होती तो चार साल पहले ही उसकी शादी कर देती।
उधर रियो से अपने भाई से बातचीत में योगेश्वर दत्त ने कहा कि आज उसका दिन नहीं था। वह गोल्ड नहीं जीते सके तो क्या, मेरी अकादमी के पहलवान एक दिन जरूर उसका सपना पूरा करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
वहां मौजूद अन्य परिजनों की भी रूलाई फूट गई। करीब घंटे भर बाद योगेश्वर की मां को होश आया तो उसने कहा योगी के सिर पर गोल्ड जीतने का जुनून सवार था। इसी वजह से चोटिल होने के बावजूद कड़ी मेहनत करता रहा। गोल्ड मेडल जीतने की जिद न होती तो चार साल पहले ही उसकी शादी कर देती।
विज्ञापन
उधर रियो से अपने भाई से बातचीत में योगेश्वर दत्त ने कहा कि आज उसका दिन नहीं था। वह गोल्ड नहीं जीते सके तो क्या, मेरी अकादमी के पहलवान एक दिन जरूर उसका सपना पूरा करेंगे।
विज्ञापन
Trending Videos
'वह एक ही जिद पर अड़ा था कि गोल्ड मैडल जीतना हैं'
Yogeshwar sister
- फोटो : Amar ujala
योगेश्वर के पैतृक गांव में सुबह से ही जश्न व उत्साह का माहौल रहा। गाव में मैच देखने के लिए बड़ी स्क्रीन लगाई गई और हवन भी हुआ। शाम पांच बजे मैच से पांच मिनट पहले उसकी मां सुशीला दूसरे कमरे में बेटे की जीत केलिए हनुमान चालीसा पढ़ने चली गई। जबकि ममेरे भाई चिंटू व अन्य परिजन टीवी पर योगेश्वर का मुकाबला देखने लगे।
मैच के दूसरे मिनट में ही मंगोलिया पहलवान ने तीन अंक की बढ़त ले ली। योगेश्वर ने विरोधी पहलवान को ऊपर उठाकर चित करने का दाव चला, लेकिन कामयाब नहीं हो सका। छह मिनट की कुश्ती में योगेश्वर रंग में ही नहीं दिखा और मैच हार गया। इसकी के साथ पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। बेटे के हारने की जानकारी मिलते ही सुशीला देवी बेहोश हो गई। उनकी हालत देखकर परिजन रोने लगे।
मीडियाकर्मियों को बाहर निकालकर घर के दरवाजे बंद कर लिए। करीब घंटे भर बाद माहौल कुछ सामान्य हुआ। सरपंच व ग्रामीणों ने योगेश्वर की मां को दिलासा दिया कि चार ओलंपिक खेलना किसी से कम नहीं है। सामान्य होने पर सुशीला देवी ने बताया कि बार-बार चोट लगने के कारण वर्ष 2012 में लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद ही उन्होंने योगी से कहा था कि बेटा, अब शादी कर ले। लेकिन वह नहीं माना। एक ही जिद पर अड़ा था कि गोल्ड मैडल जीतना हैं।
मैच के दूसरे मिनट में ही मंगोलिया पहलवान ने तीन अंक की बढ़त ले ली। योगेश्वर ने विरोधी पहलवान को ऊपर उठाकर चित करने का दाव चला, लेकिन कामयाब नहीं हो सका। छह मिनट की कुश्ती में योगेश्वर रंग में ही नहीं दिखा और मैच हार गया। इसकी के साथ पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। बेटे के हारने की जानकारी मिलते ही सुशीला देवी बेहोश हो गई। उनकी हालत देखकर परिजन रोने लगे।
मीडियाकर्मियों को बाहर निकालकर घर के दरवाजे बंद कर लिए। करीब घंटे भर बाद माहौल कुछ सामान्य हुआ। सरपंच व ग्रामीणों ने योगेश्वर की मां को दिलासा दिया कि चार ओलंपिक खेलना किसी से कम नहीं है। सामान्य होने पर सुशीला देवी ने बताया कि बार-बार चोट लगने के कारण वर्ष 2012 में लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद ही उन्होंने योगी से कहा था कि बेटा, अब शादी कर ले। लेकिन वह नहीं माना। एक ही जिद पर अड़ा था कि गोल्ड मैडल जीतना हैं।
धरे रह गए 10 पेटी पटाखे
Yogeshwar Dutt
- फोटो : Amar ujala
योगेश्वर की हार से पूरे गांव में निराशा छा गई। सरपंच राजेश ने बताया कि घर में मैच देखने के लिए बड़ी स्क्रीन लगवाई थी, वहीं जीत का जश्न मनाने के लिए दस पेटी पटाखे लाए थे, वे अब यूं ही रखे हुए हैं।
विजेता की तरह ही करेंगे स्वागत
गांव के सरपंच राजेश मलिक व मंजीता ने कहा कि चार ओलपिंक खेलना किसी उपलब्धि से कम नहीं है। गोल्ड नहीं जीत सका तो क्या हुआ। जब योगेश्वर गांव में आएगा तो विजेता की तरह उसका स्वागत करेंगे। योगेश्वर केदम पर ही आज उनकेगांव भैंसवाल की पूरे देश में चर्चा हो रही है।
गुरु बनकर नए पहलवान तैयार करेगा योगेश्वर
कोच जगबीर मलिक ने बताया कि योगेश्वर रियो में जीत हासिल नहीं कर सका तो क्या हुआ। लौटकर न केवल गांव के अखाड़े, बल्कि अकादमी में पहलवान तैयार करेगा। अब द्रोणाचार्य की भूमिका में नजर आएगा। पूरे गांव को उन पर नाज है।
विजेता की तरह ही करेंगे स्वागत
गांव के सरपंच राजेश मलिक व मंजीता ने कहा कि चार ओलपिंक खेलना किसी उपलब्धि से कम नहीं है। गोल्ड नहीं जीत सका तो क्या हुआ। जब योगेश्वर गांव में आएगा तो विजेता की तरह उसका स्वागत करेंगे। योगेश्वर केदम पर ही आज उनकेगांव भैंसवाल की पूरे देश में चर्चा हो रही है।
गुरु बनकर नए पहलवान तैयार करेगा योगेश्वर
कोच जगबीर मलिक ने बताया कि योगेश्वर रियो में जीत हासिल नहीं कर सका तो क्या हुआ। लौटकर न केवल गांव के अखाड़े, बल्कि अकादमी में पहलवान तैयार करेगा। अब द्रोणाचार्य की भूमिका में नजर आएगा। पूरे गांव को उन पर नाज है।