फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Year Ender 2019 for Punjab, Fatehveer Singh, Navjot Sidhu, Kartarpur Corridor

साल 2019: पंजाब को करतारपुर कॉरिडोर मिला, एक साथ 20 जानें गईं, फतेहवीर की मौत ने झकझोरा

Mon, 30 Dec 2019 02:59 PM IST
खुशबू गोयल अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 30 Dec 2019 02:59 PM IST
विज्ञापन
Year Ender 2019 for Punjab, Fatehveer Singh, Navjot Sidhu, Kartarpur Corridor
फाइल फोटो
साल 2019 पंजाब और पंजाबियों के लिए यादगार रहेगा। क्योंकि इस वर्ष जहां करतारपुर कॉरिडोर का सपना पूरा हुआ, वहां मासूम फतेहवीर के साथ हुए हादसे ने झकझोर कर रख दिया।
विज्ञापन


इस साल सिखों की देश के विभाजन के समय से चली आ रही मांग पूरी हुई। संगतों की अरदास रंग लाई और पाकिस्तान स्थित गुरद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शन का सपना साकार हुआ। वहां गुरु जी ने अपने जीवन के अंतिम साल बिताए और प्रमुख संदेश दिए थे।
विज्ञापन


यह सपना सच होने से खुशी दोगुनी हो गई, क्योंकि दुनिया भर में संगत श्री गुरु नानक देव जी का 550वां प्रकाश पर्व मना रही है। हालांकि इस संजीदा मसले पर भी आशंकाओं और सियासत का साया रहा। भारत और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच कई बैठकों के बाद सहमति बनी।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन पाकिस्तान ने बीस डॉलर प्रति यात्री फीस वसूलने की शर्त नहीं छोड़ी। बिना पासपोर्ट दर्शन करवाने के लिए भी वह तैयार नहीं हुआ। आखिर अक्तूबर के अंत में भारत और पाकिस्तान ने डेरा बाबा नानक में अंतरराष्ट्रीय सीमा के जीरो प्वाइंट पर कॉरिडोर बनाने के समझौते पर दस्तखत किए, जो पाकिस्तान के नारोवाल जिले स्थित गुरद्वारा करतारपुर साहिब से भारत के डेरा बाबा नानक गुरद्वारा साहिब तक बनाया गया है।

कॉरिडोर पर राजनीति और बयानबाजी भी खूब हुई

Year Ender 2019 for Punjab, Fatehveer Singh, Navjot Sidhu, Kartarpur Corridor
करतारपुर कॉरिडोर
करतारपुर कॉरिडोर प्रोजेक्ट को लेकर कांग्रेसियों और अकालियों के बीच राजनीति और बयानबाजी आखिरी दिन तक चलती रही। ऐन मौके पर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एलान किया कि करतारपुर साहिब जाने वाले पहले जत्थे की अगुवाई वह करेंगे तो केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने बयान दिया कि उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडू इसकी अगुवाई करेंगे।

इन सभी के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने नवंबर में करतारपुर कॉरिडोर देश को समर्पित कर दिया। सीएम की अगुवाई में पहले जत्थे का स्वागत पाक पीएम इमरान खान ने किया। जत्थे में अकाली दल का शीर्ष नेतृत्व भी शामिल था। हालांकि, करतारपुर साहिब जाने वाली संगत की संख्या उम्मीद से काफी कम रही। इसके लिए पासपोर्ट और बीस डॉलर फीस को जिम्मेदार माना जा रहा है।

550वां प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया
इस साल श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को लेकर भी संगत में खासा उत्साह रहा। 12 नवंबर को सुल्तानपुर लोधी में लाखों की तादाद में संगत उमड़ी, जहां गुरु जी ने जीवन के 14 वर्ष बिताए थे। यहां भी सियासत हावी रही। पंजाब सरकार और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए।

इस महत्वपूर्ण मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पत्नी सहित गुरुद्वारा साहिब में नतमस्तक हुए। वह दोनों के समागम में भी गए। इतनी ज्यादा संगत के बावजूद सफलतापूर्वक समागम कराने के लिए पुख्ता इंतजाम की लोगों ने सराहना की।

फतेहवीर सिंह की मौत दुखद घटना

Year Ender 2019 for Punjab, Fatehveer Singh, Navjot Sidhu, Kartarpur Corridor
मासूम फतेहवीर की मौत - फोटो : अमर उजाला
संगरूर में दो साल के फतेहवीर सिंह की मौत साल की सबसे दुखद घटनाओं में रही। फतेहवीर खेलते-खेलते 150 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था। उसे बचाने के लिए 109 घंटे तक ऑपरेशन चला, लेकिन जिंदगी मौत से हार गई। उसे बचाया नहीं जा सका। जब तक उसे बाहर निकाला गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

फैक्ट्री में ब्लास्ट, 20 की मौत
बटाला में रिहायशी इलाके में चल रही एक पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ, जिसमें बीस लोगों की मौत हो गई, कई लोग जख्मी हो गए। इस हादसे ने पूरे पंजाब को हिलाकर रख दिया।

बारिश, बाढ़ और पराली का जलना
अगस्त में पंजाब और हिमाचल प्रदेश में लगातार तेज बारिश से भाखड़ा बांध का जलस्तर बढ़ गया। फिर जब बांध से पानी छोड़ा गया तो पंजाब के कई जिलों में बाढ़ आ गई, जिससे करीब दो हजार करोड़ का नुकसान हुआ।

पराली जलाने का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर छाया
नवंबर में एक बार फिर पंजाब में पराली जलाने का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर छाया। स्मॉग ने दिल्ली को बेदम किया। राज्य सरकार के तमाम इंतजाम के बाद भी पराली जलाने के मामले बढ़ गए। 50000 से ज्यादा केस सामने आए।

आतंकियों, ड्रोन और हथियारों ने चौंकाया
सितंबर में आतंकियों ने नया तरीका अपनाते हुए ड्रोन से हथियार भेज कर सुरक्षा एजेंसियों को चौंकाया। यह अपनी तरह का पहला मामला था, जब पाकिस्तान से जीपीएस लगे ड्रोन से तरनतारन में हथियार और कम्यूनिकेशन हार्डवेयर भेजे गए। पंजाब पुलिस की जांच में पता चला कि इसके पीछे खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स का हाथ था।

प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टर्स समिट
इस साल भी सरकार आर्थिक तंगी से जूझती रही। निवेश आकर्षित करने को दिसंबर में प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टर्स समिट भी कराया गया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।

कैप्टन और सिद्धू के बीच तल्खी रही चर्चा का विषय

Year Ender 2019 for Punjab, Fatehveer Singh, Navjot Sidhu, Kartarpur Corridor
Amarinder Singh, Navjot Singh Sidhu - फोटो : Scroll.in
इस साल कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिद्धू के बीच तल्खी चर्चा का विषय रही। दोनों के संबंध वैसे तो कभी सामान्य नहीं थे, पर लोकसभा चुनाव में बात काफी बढ़ गई। सिद्धू ने बठिंडा में रैली के दौरान कैप्टन पर गंभीर आरोप लगा दिया। सिद्धू ने कहा कि वह अकालियों के साथ फ्रेंडली मैच खेल रहे हैं। बठिंडा से कांग्रेस उम्मीदवार अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग हार गए। कैप्टन ने प्रतिक्रिया दी कि सिद्धू के सार्वजनिक बयान का पार्टी को नुकसान हुआ। मतदान से ऐन पहले उन्हें सार्वजनिक तौर पर ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए थी।

इसके कुछ दिन पहले ही सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर ने कहा कि कैप्टन के कहने पर पार्टी ने उन्हें चंडीगढ़ से लोकसभा की टिकट नहीं दी। इस पर कैप्टन ने कहा कि चंडीगढ़ के लिए न तो पार्टी में उनकी राय के कोई मायने हैं और न ही उन्होंने दी है। फिर भी अगर उनसे पूछा जाएगा तो पवन बंसल बेहतर कैंडिडेट हैं। नवजोत कौर को बठिंडा से लड़ने को कहा गया था, पर उन्होंने मना कर दिया। कांग्रेस की हार के बाद राहुल गांधी ने इस्तीफा दे दिया और सिद्धू कमजोर पड़ गए।

इस बीच कैप्टन ने चुनाव की समीक्षा की और कहा कि सिद्धू के स्थानीय निकाय विभाग द्वारा काम न करने से पार्टी शहरों में हारी। फिर उन्होंने सिद्धू का विभाग वापस लेकर ब्रह्म मोहिंदरा को दे दिया। सिद्धू को बिजली और नवीनीकरण योग्य ऊर्जा विभाग दे दिया गया। 14 जुलाई को सिद्धू ने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। कई दिन सार्वजनिक जीवन से दूर रहने के बाद सिद्धू ने अमृतसर में लोगों से मिलना शुरू किया, पर यह कुछ ही दिन चला। वह विधानसभा के विशेष सत्र में भी नहीं आए।

लोकसभा चुनाव में नहीं चली पीएम मोदी की आंधी

Year Ender 2019 for Punjab, Fatehveer Singh, Navjot Sidhu, Kartarpur Corridor
Punjab Election
मई में लोकसभा चुनाव 2019 हुए, लेकिन पंजाब में पीएम नरेंद्र मोदी का विजय रथ रुक गया। देश में आंधी की तरह जीतती चली आ रही भाजपा और उसकी सहयोगी शिअद यहां दो-दो सीटें ही जीत सकीं। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी भी अमृतसर से हार गए।

अकाली दल से भी सिर्फ पॉवर कपल सुखबीर व हरसिमरत कौर बादल ही जीत सके। कांग्रेस आठ सीटें ले गई। भगवंत मान आम आदमी पार्टी को देश भर से एक सीट दिलाने में कामयाब रहे। लोकसभा चुनाव में लोगों ने छोटे दलों को नकार दिया।

शिअद से अलग होकर बना शिअद-टकसाली और आम आदमी पार्टी छोड़ कर पंजाब एकता पार्टी बनाने वाले सुखपाल खैरा चुनाव में बेअसर रहे। बाद में हुए चार विधानसभा सीटों के उप चुनाव में भी कांग्रेस का जलवा बरकरार रहा।

पार्टी ने फगवाड़ा, मुकेरियां और जलालाबाद सीटें जीतीं। हालांकि, सीएम के करीबी कैप्टन संदीप संधू दाखा से नहीं जीत सके।

कांग्रेस में विधायकों की नाराजगी भी बनीं सुर्खियां

Year Ender 2019 for Punjab, Fatehveer Singh, Navjot Sidhu, Kartarpur Corridor
अमरिंदर सिंह
कांग्रेस में कुछ विधायकों की नाराजगी भी सुर्खियां बनीं। इनमें सीएम के शहर पटियाला के विधायक भी थे। आरोप था कि प्रशासन में उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। एक विधायक ने तो फोन टेप करवाने का आरोप लगाया। पार्टी की बैठक में कई लोगों ने नाराजगी दिखाई। दिसंबर आने के साथ कैप्टन ने डैमेज कंट्रोल एक्सरसाइज शुरू की। उन्होंने विधायकों, सांसदों से मुलाकात करके समस्याएं पूछीं। तीन साल से लंबित बोर्ड, निगमों के चेयरमैन नियुक्त करने शुरू किए।

भाजपा में गुटबाजी हावी रही
भाजपा सारा साल गुटबाजी से जूझती रही। प्रदेश प्रधान श्वेत मलिक अपने शहर अमृतसर में केंद्रीय मंत्री पुरी को नहीं जितवा पाए। होशियारपुर और गुरदासपुर सीटें भी हिमाचल से सटी बेल्ट के चलते आईं, जहां साफतौर पर भाजपा की लहर चल रही थी।

आप भी गुटबाजी से जूझती रही
आम आदमी पार्टी गुटबाजी से जूझती रही। नेता प्रतिपक्ष पद से हटाए गए सुखपाल खैरा ने इस्तीफा दे दिया। उनके साथ ही मास्टर बलदेव ने भी इस्तीफा दे दिया। दो विधायक निर्मल सिंह मानशाइया और जय किशन रोड़ी कांग्रेस में चले गए।

शिअद के अध्यक्ष सुखबीर का विरोध
सुखबीर बादल एक बार फिर पांच साल के लिए शिरोमणि अकाली दल के प्रधान बने, पर सुखदेव ढींडसा के खुल कर सुखबीर का विरोध करके साल के अंत में पार्टी को मुश्किल में डाल दिया। बेअदबी के मुद्दे से इस साल भी अकाली दल उबर नहीं सका।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed