{"_id":"5e6dddc58ebc3ea4e62ce843","slug":"wrong-answer-from-ministry-of-mp-kirron-kher-question-asked-in-lok-sabha-session","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"लोकसभा में सांसद किरण खेर के सवाल पर मंत्रालय का गलत जवाब, सफाई कर्मी बोले- आंकड़े गलत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोकसभा में सांसद किरण खेर के सवाल पर मंत्रालय का गलत जवाब, सफाई कर्मी बोले- आंकड़े गलत
Sun, 15 Mar 2020 01:18 PM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 15 Mar 2020 01:18 PM IST
विज्ञापन
सांसद किरण खेर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सांसद किरण खेर के एक सवाल पर केंद्रीय शहरी आवास मंत्रालय ने लोकसभा में जवाब दिया है कि चंडीगढ़ में 100 फीसदी डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन हो रहा है। इसके अलावा शहर के कुल 26 वार्ड में से 24 वार्डों में गीला व सूखा कचरा 100 फीसदी अलग-अलग किया जा रहा है। लेकिन इन आंकड़ों को सफाई यूनियन के नेताओं ने गलत करार दिया है।
संसद के प्रश्नकाल के दौरान किरण खेर ने केंद्रीय शहरी आवास मंत्रालय से चार सवाल पूछे थे। पहला सवाल था कि चंडीगढ़ समेत सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के कितने वार्डों में 100 फीसदी डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन हो रहा है। दूसरा सवाल था कि चंडीगढ़ समेत सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के कितने वार्डों में सोर्स लेवल से ही गीले व सूखे कचरे को अलग-अलग किया जा रहा है।
तीसरा सवाल था कि वह कौन से राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं, जहां एक तिहाई से भी कम वार्डों में कचरे को अलग-अलग किया जा रहा है। इसके अलावा चौथा सवाल था कि भारत सरकार डोर-टू-डोर कचरा और सोर्स लेवल से ही कचरे के सेग्रिगेशन को 100 फीसदी करने के लिए क्या कदम उठा रही है।
विज्ञापन
मंत्रालय के जवाब के अनुसार, चंडीगढ़ के 26 वार्ड में 100 फीसदी डोर-टू-डोर कचरा एकत्रित किया जाता है। इसके अलावा 24 वार्ड में 100 फीसदी सोर्स सेग्रिगेशन है। शहर का सोर्स सेग्रिगेशन का प्रतिशत 92 फीसदी है। हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, दमन और दीव, मेघालय में यह 100 फीसदी है जबकि अरुणांचल प्रदेश में 15 फीसदी, जम्मू-कश्मीर में 17 फीसदी और दिल्ली, नागालैंड, पश्चिम बंगाल में सिर्फ 20-20 फीसदी है। मंत्रालय ने यह भी बताया है कि पूरे देश में 81,135 वार्ड हैं।
विज्ञापन
संसद के प्रश्नकाल के दौरान किरण खेर ने केंद्रीय शहरी आवास मंत्रालय से चार सवाल पूछे थे। पहला सवाल था कि चंडीगढ़ समेत सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के कितने वार्डों में 100 फीसदी डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन हो रहा है। दूसरा सवाल था कि चंडीगढ़ समेत सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के कितने वार्डों में सोर्स लेवल से ही गीले व सूखे कचरे को अलग-अलग किया जा रहा है।
विज्ञापन
तीसरा सवाल था कि वह कौन से राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं, जहां एक तिहाई से भी कम वार्डों में कचरे को अलग-अलग किया जा रहा है। इसके अलावा चौथा सवाल था कि भारत सरकार डोर-टू-डोर कचरा और सोर्स लेवल से ही कचरे के सेग्रिगेशन को 100 फीसदी करने के लिए क्या कदम उठा रही है।
विज्ञापन
मंत्रालय के जवाब के अनुसार, चंडीगढ़ के 26 वार्ड में 100 फीसदी डोर-टू-डोर कचरा एकत्रित किया जाता है। इसके अलावा 24 वार्ड में 100 फीसदी सोर्स सेग्रिगेशन है। शहर का सोर्स सेग्रिगेशन का प्रतिशत 92 फीसदी है। हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, दमन और दीव, मेघालय में यह 100 फीसदी है जबकि अरुणांचल प्रदेश में 15 फीसदी, जम्मू-कश्मीर में 17 फीसदी और दिल्ली, नागालैंड, पश्चिम बंगाल में सिर्फ 20-20 फीसदी है। मंत्रालय ने यह भी बताया है कि पूरे देश में 81,135 वार्ड हैं।
आंकड़े कैसे हो सकते हैं सच, जब कालोनियों में पहुंचती ही नहीं गाड़ियां
डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन एसोसिएशन के प्रधान ओम प्रकाश सैनी का कहना है कि यह आंकड़े सच कैसे हो सकते हैं, जब शहर की प्रमुख कालोनियों जिनमें कालोनी नंबर-4, बुड़ैल, संजय कालोनी, फैदा गांव समेत अन्य गावों में कचरे की गाड़ियां कालोनी के अंदर जा ही नहीं पाती। शहर की काफी आबादी इन कालोनियों में ही रहती है। तो डोर-टू-डोर गारबेज का आंकड़ा 100 फीसदी कैसे हो सकता है। ठीक इसी तरह सोर्स सेग्रिगेशन का भी यही हाल है।
‘सहज सफाई केंद्रों में कूड़े को अलग-अलग करने की व्यवस्था नहीं’
सैनी ने बताया कि घर-घर से कूड़ा एकत्रित करने के लिए नगर निगम के पास पर्याप्त गाड़ियां नहीं हैं। इसके लिए वह करीब 3 हजार डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्टर कर्मचारियों की मदद ले रहे हैं। कर्मचारी तो घरों से सूखा और गीला कचरा अलग-अलग ले रहे हैं लेकिन जब वह इस कचरे को विभिन्न सेक्टरों में मौजूद सहज सफाई केंद्रों में लेकर जाते हैं तो वहां पर नगर निगम की तरफ से कोई ऐसी सुविधा नहीं दी गई है, जहां सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग किया जा सके। ऐसी स्थिति में घर से अलग-अलग कूड़ा एकत्रित करने के बाद भी कूड़े को मिक्स कर दिया जाता है।
‘सहज सफाई केंद्रों में कूड़े को अलग-अलग करने की व्यवस्था नहीं’
सैनी ने बताया कि घर-घर से कूड़ा एकत्रित करने के लिए नगर निगम के पास पर्याप्त गाड़ियां नहीं हैं। इसके लिए वह करीब 3 हजार डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्टर कर्मचारियों की मदद ले रहे हैं। कर्मचारी तो घरों से सूखा और गीला कचरा अलग-अलग ले रहे हैं लेकिन जब वह इस कचरे को विभिन्न सेक्टरों में मौजूद सहज सफाई केंद्रों में लेकर जाते हैं तो वहां पर नगर निगम की तरफ से कोई ऐसी सुविधा नहीं दी गई है, जहां सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग किया जा सके। ऐसी स्थिति में घर से अलग-अलग कूड़ा एकत्रित करने के बाद भी कूड़े को मिक्स कर दिया जाता है।
जल्द कचरा निस्तारण नहीं हुआ तो हर माह 10 लाख जुर्माना
नगर निगम कमिश्नर केके यादव ने बताया कि जल्द कचरे का निस्तारण नहीं हुआ तो एनजीटी की ओर से एक अप्रैल के बाद हर माह 10 लाख रुपये जुर्माना लगने लगेगा इसलिए तय करना होगा कि निगम डड्डूमाजरा के जेपी गारबेज प्लांट को टेकओवर करेगा तो कैसे संचालित करेगा।
कमिश्नर ने कहा कि प्लांट को संचालित करने के लिए 60 लाख ऑपरेशन, 15 लाख बिजली बिल, 25 लाख रुपये लेबर और 20 लाख रुपये उसकी रखरखाव पर खर्च होंगे। वहीं प्लांट में एक एसडीओ, 3 जेई, 5 सुपरवाइजर और 30 हेल्पर लगेंगे। दो शिफ्ट में 60 कर्मचारियों की तैनाती होगी।
एक हफ्ते के अंदर पूरे चंडीगढ़ में सेग्रिगेशन का काम शुरू हो जाएगा। वार्डों में कचरे को अलग-अलग किया जा रहा है लेकिन अभी सभी घरों में यह व्यवस्था शुरू नहीं हुई है क्योंकि यह दोनों अलग-अलग हैं।
- डॉ. अमृतपाल सिंह वडिंग, एमओएच
कमिश्नर ने कहा कि प्लांट को संचालित करने के लिए 60 लाख ऑपरेशन, 15 लाख बिजली बिल, 25 लाख रुपये लेबर और 20 लाख रुपये उसकी रखरखाव पर खर्च होंगे। वहीं प्लांट में एक एसडीओ, 3 जेई, 5 सुपरवाइजर और 30 हेल्पर लगेंगे। दो शिफ्ट में 60 कर्मचारियों की तैनाती होगी।
एक हफ्ते के अंदर पूरे चंडीगढ़ में सेग्रिगेशन का काम शुरू हो जाएगा। वार्डों में कचरे को अलग-अलग किया जा रहा है लेकिन अभी सभी घरों में यह व्यवस्था शुरू नहीं हुई है क्योंकि यह दोनों अलग-अलग हैं।
- डॉ. अमृतपाल सिंह वडिंग, एमओएच