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...तो इस वजह से थम जाएगा दुनिया के सबसे ऊंचे रावण का कद
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 25 Sep 2017 09:04 AM IST
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दुनिया का सबसे ऊंचा रावण
- फोटो : अमर उजाला
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दुनिया का सबसे ऊंचा रावण अपनी पहचान खोने जा रहा है, क्योंकि उसका कद कम होने जा रहा है और इसके पीछे की वजह भी बेहद चौंकाने वाली है। यदि हरियाणा सरकार और स्थानीय प्रशासन ने सुध न ली तो देशभर में बरसों से अपनी खास पहचान बनाने वाले बराड़ा (अंबाला) दशहरा महोत्सव की परंपरा ज्यादा नहीं चल पाएगी। दरअसल, इस महोत्सव के समक्ष अब कम जगह का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
देशभर में दशहरे पर सबसे ऊंचे 210 फुट के रावण का दहन यहीं बराड़ा में होता है, लेकिन पिछले तीन साल से इस रावण के पुतले का हर साल बढ़ने वाला कद थमा हुआ है। वजह है इतने बड़े पुतले के लिए बराड़ा कस्बे में पर्याप्त मैदान का न मिल पाना। जगह की कमी के कारण ही कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले का दहन तो श्रीरामलीला कमेटी बराड़ा वर्ष 2013 में ही बंद कर चुकी है।
पहले 1987 में इस पंरपरा की शुरुआत से ये दोनों पुतले भी रावण के पुतले के साथ ही जला करते थे। इस साल भी 210 फुट का रावण बराड़ा में 24 सितंबर को खड़ा हो जाएगा, जिसका दहन विजयादशमी के दिन होगा। छह दिन तक यहां रंगारंग कार्यक्रम चलेंगे और अंतिम दिन रावण पूजन के बाद रिमोट कंट्रोल से आकर्षक व रोमांचक आतिशबाजी के साथ देश के इस सबसे बड़े रावण पुतले का दहन होगा। लेकिन श्रीरामलीला कमेटी बराड़ा को चिंता अगले साल की सताने लगी है।
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देशभर में दशहरे पर सबसे ऊंचे 210 फुट के रावण का दहन यहीं बराड़ा में होता है, लेकिन पिछले तीन साल से इस रावण के पुतले का हर साल बढ़ने वाला कद थमा हुआ है। वजह है इतने बड़े पुतले के लिए बराड़ा कस्बे में पर्याप्त मैदान का न मिल पाना। जगह की कमी के कारण ही कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले का दहन तो श्रीरामलीला कमेटी बराड़ा वर्ष 2013 में ही बंद कर चुकी है।
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पहले 1987 में इस पंरपरा की शुरुआत से ये दोनों पुतले भी रावण के पुतले के साथ ही जला करते थे। इस साल भी 210 फुट का रावण बराड़ा में 24 सितंबर को खड़ा हो जाएगा, जिसका दहन विजयादशमी के दिन होगा। छह दिन तक यहां रंगारंग कार्यक्रम चलेंगे और अंतिम दिन रावण पूजन के बाद रिमोट कंट्रोल से आकर्षक व रोमांचक आतिशबाजी के साथ देश के इस सबसे बड़े रावण पुतले का दहन होगा। लेकिन श्रीरामलीला कमेटी बराड़ा को चिंता अगले साल की सताने लगी है।
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ये है देश के सबसे ऊंचे रावण की खासियत
दुनिया के सबसे ऊंचे रावण का दहन
- फोटो : अमर उजाला
- 1987 में बराड़ा निवासी राणा तेजिंद्र चौहान ने अपनी टीम के साथ एक ही रात में 20 फुट का रावण का पुतला तैयार कर विजयादशमी को उसका दहन किया।
- क्रेज इतना बढ़ा कि रावण के पुतले का कद 1988 में 30 फुट, 1995 में 50 फुट, 2000 में 100 फुट और वर्ष 2015 में 200 फुट और वर्ष 2015 में 210 फुट होकर जगह की कमी की वजह से थम गया।
- इस पुतले ने पांच बार लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया है, वर्ल्ड रिकॉर्ड की तैयारी है।
- 210 फुट रावण के लिए 260 फुट का चारों बड़ा घेरा चाहिए। जबकि दर्शकों और मेले के लिए अतिरिक्त बड़ा मैदान चाहिए।
- 25 लाख के इस पुतले को बनाने में 6 महीने लगते हैं, अबकी पुतले का निर्माण 5 अप्रैल 2017 को शुरू हुआ था
- राणा तेजिंद्र की निगरानी में 70 लोगों की टीम शिफ्टों में दिन-रात काम करती है
- रावण बनाने में 30 क्विंटल लोहा, 150 किलो कागज, 3 क्विंटल कपड़ा, 10 क्विंटल बांस, 1.5 क्विंटल फाइबर लगता है
- तैयार रावण 250 लोगों द्वारा क्रेनों की मदद से बैलेंस के साथ 10 घंटे में खड़ा किया जाता है।
- क्रेज इतना बढ़ा कि रावण के पुतले का कद 1988 में 30 फुट, 1995 में 50 फुट, 2000 में 100 फुट और वर्ष 2015 में 200 फुट और वर्ष 2015 में 210 फुट होकर जगह की कमी की वजह से थम गया।
- इस पुतले ने पांच बार लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया है, वर्ल्ड रिकॉर्ड की तैयारी है।
- 210 फुट रावण के लिए 260 फुट का चारों बड़ा घेरा चाहिए। जबकि दर्शकों और मेले के लिए अतिरिक्त बड़ा मैदान चाहिए।
- 25 लाख के इस पुतले को बनाने में 6 महीने लगते हैं, अबकी पुतले का निर्माण 5 अप्रैल 2017 को शुरू हुआ था
- राणा तेजिंद्र की निगरानी में 70 लोगों की टीम शिफ्टों में दिन-रात काम करती है
- रावण बनाने में 30 क्विंटल लोहा, 150 किलो कागज, 3 क्विंटल कपड़ा, 10 क्विंटल बांस, 1.5 क्विंटल फाइबर लगता है
- तैयार रावण 250 लोगों द्वारा क्रेनों की मदद से बैलेंस के साथ 10 घंटे में खड़ा किया जाता है।
रावण का दहन
- फोटो : अमर उजाला
इस साल भी 210 फुट का रावण दहन हो जाएगा, लेकिन अगले बरस का मालूम है। इस बार जिन कालोनाइजरों की जमीन पर इस साल रावण खड़ा किया है, वे अगले साल अपनी जमीन खाली छोड़ने को तैयार नहीं है। इसलिए हरियाणा सरकार और स्थानीय प्रशासन से गुजारिश है कि बराड़ा में कोई खाली मैदान इस पर्व के लिए तय करें, वरना इस परंपरा को आगे चलाना मुश्किल हो जाएगा।’
- राणा तेजिंद्र सिंह चौहान, प्रधान व तनवीर जाफरी, संयोजक
बराड़ा मेला कमेटी के पदाधिकारी जगह के लिए प्रस्ताव बनाकर मुझसे मिल सकते हैं। हर संभव मदद की जाएगी। जगह की कमी की वजह से इस परंपरा को खत्म नहीं होने देंगे।’
- शरणदीप कौर बराड़ा, डीसी अंबाला
- राणा तेजिंद्र सिंह चौहान, प्रधान व तनवीर जाफरी, संयोजक
बराड़ा मेला कमेटी के पदाधिकारी जगह के लिए प्रस्ताव बनाकर मुझसे मिल सकते हैं। हर संभव मदद की जाएगी। जगह की कमी की वजह से इस परंपरा को खत्म नहीं होने देंगे।’
- शरणदीप कौर बराड़ा, डीसी अंबाला